पश्चिम एशिया युद्ध का असर झारखण्ड के ‘नमक’ पर: पैकेजिंग व ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से सप्लायरों ने मांगे ज्यादा रेट, सरकार ने टेंडर ही रद्द किया

–मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना की चौथी तिमाही का टेंडर निरस्त; जांच कमेटी बोली- अब हालात सामान्य और बाजार में स्थिरता, नए सिरे से होगी खरीद

राँची। झारखण्ड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना’ पर वैश्विक संकट और युद्ध की मार पड़ी है। वित्तीय वर्ष 2025–2026 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च 2026) के लिए फ्री फ्लो रिफाइंड आयोडाइज्ड नमक आपूर्ति का टेंडर राज्य सरकार ने पूरी तरह रद्द कर दिया है।खाद्य एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय की जांच में यह खुलासा हुआ कि पश्चिमी एशियाई देशों के बीच छिड़े युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के कारण पैकेजिंग लागत व परिवहन भाड़े (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) में भारी उछाल आया था, जिसकी आड़ में नमक आपूर्तिकर्ताओं ने सरकार से तय मानकों से काफी अधिक दरों की मांग (L-1 बिड) कर दी थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने 6 जुलाई 2026 को क्रय समिति और केंद्रीय भंडार, नई दिल्ली से प्राप्त दरों के तुलनात्मक अध्ययन के लिए एक त्रिसदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था. जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पूर्व में वैश्विक अनिश्चितता के चलते सप्लायरों ने दरें बढ़ाकर कोट की थीं. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया कि अब वैश्विक स्थिति सामान्य हो रही है और बाजार में स्थिरता लौट आई है, ऐसे में महंगी दरों पर खरीद करने के बजाय पुराने टेंडर को रद्द करना ही राज्य हित में उचित होगा।

जांच कमेटी की इसी अनुशंसा के आधार पर खाद्य एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निर्देश के तहत 16 फरवरी 2026 को जारी निविदा (संख्या-200 एवं GeM/2026/B/7244866) को उप सचिव जेसी विनीता केरकेट्टा के हस्ताक्षर से आधिकारिक तौर पर रद्द करने का आदेश जारी कर दिया गया है. अब सरकार सामान्य हो चुके बाजार दरों पर नए सिरे से निविदा जारी कर गरीबों के लिए नमक की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।

…


…

…

…

