पलामू में मनचलों का तांडव: छेड़खानी का विरोध करने पर चाकूबाजी और गोलीबारी, एक की मौत से सुलगा इलाका

​पलामू।झारखण्ड के पलामू जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ मनचलों की हिमाकत का विरोध करना एक परिवार के लिए भारी पड़ गया। चैनपुर थाना क्षेत्र के बंदुआ गांव में बुधवार देर शाम बेटी से छेड़खानी का विरोध करने पर शुरू हुआ विवाद पल भर में खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। बेखौफ अपराधियों ने न सिर्फ अंधाधुंध गोलियाँ बरसाईं, बल्कि खुलेआम चाकुओं से हमला कर इलाके को थर्रा दिया। इस खूनी वारदात में गंभीर रूप से घायल मकबूल मियां ने इलाज के लिए राँची ले जाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

​अस्पताल पहुँचने से पहले थमीं साँसें, दो जिंदगी और मौत से जूझ रहे

घटना के बाद गंभीर रूप से जख्मी मकबूल मियां को बेहतर इलाज के लिए आनन-फानन में राँची रेफर किया गया था, लेकिन जिंदगी और मौत की इस जंग में वे हार गए और रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। वहीं, हमले में गंभीर रूप से घायल सुलेमान मियां और शाहीना बीबी फिलहाल एमएमसीएच  मेदिनीनगर में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

​सड़क पर उतरा आक्रोश, शाहपुर-मेदिनीनगर पुल जाम

मकबूल मियां की मौत की खबर फैलते ही गरदा और बंदुआ गांव समेत समूचा इलाका सुलग उठा। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए लोगों ने इंसाफ की माँग को लेकर शाहपुर-मेदिनीनगर पुल पर तख्तियाँ और घेराबंदी कर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया। पुल पर जाम लगते ही वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।

​मनचलों की करतूत से उपजा खूनी विवाद

मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार शाम को एक लड़की के साथ हुई छेड़खानी का जब परिजनों ने विरोध किया, तो दूसरे पक्ष के हथियारबंद लोग आगबबूला हो गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने हथियार निकाल लिए। परिजनों का आरोप है कि तबरेज, अबरेज आलम, गोखुला मियां, आजाद मियां, क्युम मियां, शेरू मियां, सोनू मियां और इमरान मियां समेत कई अन्य लोगों ने मिलकर इस हिंसक वारदात को अंजाम दिया। चैनपुर थाना प्रभारी लाल जी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि पूरी घटना छेड़खानी के विवाद से ही शुरू हुई थी।

​पुलिस छावनी में तब्दील इलाका, ताबड़तोड़ छापामारी जारी

घटना की संवेदनशीलता और पुल जाम के बाद बिगड़ते हालात को देखते हुए पलामू पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड़ में आ गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। पलामू पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर नामजद आरोपियों और हमले में शामिल अन्य असामाजिक तत्वों को दबोचने के लिए उनके संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।प्रशासन लगातार उग्र ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराने और यातायात बहाल करने की कोशिशों में जुटा है, लेकिन ग्रामीणों की एक ही माँग है—”जब तक कातिल सलाखों के पीछे नहीं होंगे, आंदोलन जारी रहेगा।”

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