पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क पर NIA का शिकंजा, टेरर फंडिंग से लेकर युवाओं की भर्ती तक होगी जांच; राँची RSS हमला और लखनऊ कनेक्शन भी जांच के दायरे में

 

राँची/लखनऊ। झारखण्ड की राजधानी राँची में आरएसएस के प्रांतीय कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले के तार अब एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच से जुड़ते नजर आ रहे हैं। पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों के कथित नेटवर्क पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एजेंसी की लखनऊ इकाई ने इस नेटवर्क के जरिए भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की कथित साजिश को लेकर प्राथमिकी दर्ज की है।जांच का दायरा केवल हमले की साजिश तक सीमित नहीं रहेगा। विदेशी हैंडलरों से संपर्क, सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती, संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन, टेरर फंडिंग और देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय स्थानीय संपर्कों की भूमिका भी खंगाली जाएगी।

इस पूरे मामले में राँची का आरएसएस कार्यालय हमला भी महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है। दरअसल, इस हमले में गिरफ्तार तीन आरोपियों से पूछताछ के दौरान लखनऊ में आगे की वारदात को अंजाम देने की कथित योजना का खुलासा हुआ था।

राँची से लखनऊ तक हमले की कथित प्लानिंग, पूछताछ में सामने आया था भट्टी का नाम

जून 2026 में राँची के चुटिया थाना क्षेत्र स्थित निवारणपुर आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने लोहरदगा निवासी अमन अंसारी उर्फ गोलू, सैफ अंसारी और सायम सुजान को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान अमन अंसारी ने कथित तौर पर पुलिस को बताया था कि पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी और दुबई में बैठे आवेश राजपूत उर्फ राणा वीडियो कॉल के जरिए उसके संपर्क में थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों को आरएसएस कार्यालय पर हमले के बाद कानपुर के रास्ते लखनऊ पहुंचने का निर्देश दिया गया था। वहां उन्हें आगे का बड़ा टास्क सौंपा जाना था। अमन और सैफ ट्रेन से लखनऊ की ओर रवाना भी हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें कोडरमा के गझंडी रेलवे स्टेशन के पास पकड़ लिया था।

पूछताछ में यह भी सामने आया था कि हैंडलरों ने आरएसएस कार्यालय की तस्वीर और लोकेशन मोबाइल पर भेजी थी। हमले को अंजाम देने के बदले तीनों आरोपियों को कुल डेढ़ लाख रुपये देने का कथित आश्वासन दिया गया था। जांच में शुरुआती डिजिटल भुगतान और विदेशी हैंडलर के साथ ऑडियो बातचीत की बात भी सामने आई थी।

अब शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ एनआईए की नई कार्रवाई के बीच राँची के इस पुराने मामले की कथित लखनऊ कड़ी भी महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, राँची हमले और एनआईए की लखनऊ में दर्ज नई प्राथमिकी को एक ही केस का हिस्सा मानना अभी उचित नहीं होगा। दोनों मामलों के बीच वास्तविक संबंध की पुष्टि जांच एजेंसियों को करनी है।

30 अक्टूबर की गिरफ्तारी से खुला नया मोर्चा

इसी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में यूपी एटीएस ने 30 अक्टूबर को लखनऊ में पंजाब के तीन युवकों गगनदीप सिंह, रजत कुमार और कृष्ण को गिरफ्तार किया था। एक नाबालिग को भी निगरानी में लिया गया था।

एटीएस के अनुसार, ये युवक पाकिस्तान में बैठे राणा भाई नामक हैंडलर के निर्देश पर लखनऊ में किसी पुलिसकर्मी या सेना के जवान की हत्या अथवा सुरक्षा प्रतिष्ठान पर हमला करने की कथित साजिश रच रहे थे।

जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों को वारदात का वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजने और इसके बदले तीन लाख रुपये देने का लालच दिया गया था। उनके पास से विदेशी निर्मित पिस्तौल और 20 कारतूस बरामद किए गए थे। मोबाइल फोन में संदिग्ध चैट और वीडियो भी मिलने की बात कही गई है।

आज रिमांड पर सुनवाई, खुल सकते हैं कई राज

इधर, लखनऊ में गिरफ्तार तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ के लिए मंगलवार को एटीएस/एनआईए कोर्ट में पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल किए जाने की तैयारी है। रिमांड मिलने पर जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सएप चैट, विदेशी नंबरों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल करेंगी।

एनआईए की जांच में एक अन्य महत्वपूर्ण मामला 23 अप्रैल 2026 को नोएडा से गिरफ्तार तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान और दिल्ली निवासी समीर खान का भी है। यूपी एटीएस की जांच में दोनों के शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी आबिद जट के संपर्क में होने के आरोप सामने आए थे।

जांच के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बनाने के बाद युवाओं को वीडियो और वॉयस कॉल के माध्यम से निर्देश दिए जाते थे। युवाओं की भर्ती, कथित आतंकी गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद, विदेशी ठिकानों से संचालन और अलग-अलग राज्यों में नेटवर्क के विस्तार की जांच अब एनआईए कर रही है।

अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राँची, लखनऊ, नोएडा और दूसरे राज्यों में सामने आई घटनाओं के पीछे एक ही अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय था? विदेशी हैंडलरों से लेकर स्थानीय मददगारों और फंडिंग के स्रोत तक पहुंचने के लिए एनआईए की जांच अहम मानी जा रही है।

 

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