जमशेदपुर में वाहन चोरों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 8 गिरफ्तार; चोरी की 21 बाइक बरामद, नंबर बदलकर ओडिशा तक खपाते थे

जमशेदपुर। झारखण्ड के पूर्वी सिंहभूम जिले में वाहन चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में बिष्टुपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने शहर में सक्रिय एक बड़े वाहन चोर गिरोह का खुलासा करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे और निशानदेही पर चोरी की 21 दोपहिया गाड़ियां बरामद की गई हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह भीड़भाड़ वाले इलाकों से बाइक और स्कूटी चोरी कर उनके नंबर प्लेट व रजिस्ट्रेशन नंबर बदल देता था। इसके बाद चोरी के वाहनों को ग्रामीण इलाकों के अलावा पड़ोसी राज्य ओडिशा के सीमावर्ती गांवों में बेच दिया जाता था।

एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारीब ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 21 सितंबर की रात करीब 11 बजे बिष्टुपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि पीएम मॉल के पास दो संदिग्ध चोरी की स्कूटी के साथ घूम रहे हैं और किसी अन्य वाहन चोरी की वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं।सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष छापेमारी दल का गठन किया और पीएम मॉल के पास घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया। पूछताछ में बरामद स्कूटी के चोरी की होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर बागबेड़ा, पोटका और कोवाली थाना क्षेत्रों में लगातार छापेमारी की। इसी कार्रवाई में चोरी की 21 दोपहिया गाड़ियों का पता चला।

जुबली पार्क से पीएम मॉल तक थे निशाने पर

जांच में पुलिस के सामने गिरोह के वाहन चोरी करने के तरीके की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य बिष्टुपुर के जुबली पार्क, नेचर पार्क, पीएम मॉल और नॉर्थ पार्किंग एरिया समेत शहर के अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नजर रखते थे। मौका मिलते ही बाइक और स्कूटी चोरी कर फरार हो जाते थे।चोरी के बाद पुलिस से बचने और वाहनों की पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट और रजिस्ट्रेशन नंबर में बदलाव किया जाता था। इसके बाद वाहनों को सुदूर ग्रामीण इलाकों और ओडिशा के विभिन्न गांवों में खपाने की बात सामने आई है।

8 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में महेश कुमार, मुनीराम मुर्मू, कारू मार्डी, विक्रांत सहानी, विक्रम साहनी, अशोक पात्रो, पेलाराम सरदार और काशीनाथ सरदार को गिरफ्तार किया है।एसएसपी ने बताया कि बरामद वाहनों के इंजन और चेचिस नंबर का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद इन वाहनों को उनके वास्तविक मालिकों से जोड़ने के साथ-साथ जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज वाहन चोरी के मामलों का भी मिलान किया जाएगा।

पुलिस अब गिरोह के सदस्यों के बीच संपर्क, चोरी के वाहनों की खरीद-बिक्री और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ और बरामद वाहनों के सत्यापन के बाद वाहन चोरी के कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।

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