स्कूली बच्चों से भरी वैन और पिकअप की भीषण टक्कर, एक मासूम की मौत; चार गंभीर

अनफिट स्कूल वैन में 15 बच्चों को बैठाकर दौड़ाया जा रहा था वाहन, हादसे के बाद फिटनेस-परमिट पर उठे गंभीर सवाल

देवघर। सारठ में मंगलवार को स्कूली बच्चों को लेकर जा रही एक मैजिक वैन और पिकअप वाहन के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर ने स्कूल प्रबंधन और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सारठ-चितरा मुख्य मार्ग पर मांझलीबाद गांव के समीप हुए इस हादसे में एक मासूम बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गयी, जबकि चार बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूल वैन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

मृत बच्ची की पहचान चितरा थाना क्षेत्र के खमार गांव निवासी मुन्नी कुमारी के रूप में बतायी गयी है। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गयी। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए घायल बच्चों को अस्पताल पहुंचाया।
एक वैन में करीब 15 बच्चे, फिर भी जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ी?

जानकारी के अनुसार, एमडी एकेडमी के बच्चों को लेकर स्कूल मैजिक नारंगी मोड़ स्थित विद्यालय की ओर जा रही थी। बताया जा रहा है कि वैन में करीब 15 बच्चे सवार थे। मांझलीबाद गांव के पास सामने से आ रही पिकअप से उसकी सीधी टक्कर हो गयी।
हादसे के बाद बच्चों में अफरातफरी मच गयी। स्थानीय लोगों ने क्षतिग्रस्त वाहन से बच्चों को बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने मुन्नी कुमारी को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल चार बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए देवघर रेफर किया गया।

हादसे के बाद एक ओर घायल बच्चों के इलाज की व्यवस्था को लेकर भागदौड़ होती रही, वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक की कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि एक स्थानीय व्यक्ति ने हस्तक्षेप कर स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक से क्रमश: 50 हजार और 30 हजार रुपये इलाज के लिए जमा करवाये।मगर बड़ा सवाल यह है कि इलाज का खर्च जुटा देने भर से क्या बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सवाल खत्म हो जाएंगे? अगर वाहन के कागजात और फिटनेस में खामी थी, तो बच्चों को रोज इसी वाहन से स्कूल ले जाने की अनुमति आखिर किसकी जिम्मेदारी थी?

हादसे में शामिल स्कूल वैन का नंबर जेएच 15 ई-1466 बताया जा रहा है। आरोप है कि वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट अपडेट नहीं था। साथ ही परमिट और इंश्योरेंस को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला महज सड़क दुर्घटना नहीं रह जाता, बल्कि बच्चों की जान को जोखिम में डालकर नियमों की अनदेखी करने का गंभीर मामला बन सकता है।

स्कूली वाहनों के लिए फिटनेस, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र समेत निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस वाहन में रोजाना मासूम बच्चों को बैठाकर स्कूल भेजा जा रहा था, उसकी जांच कभी हुई भी थी या नहीं हुई थी।

सारठ की यह घटना एक स्कूल या एक वाहन तक सीमित सवाल नहीं खड़ा करती। आरोप है कि क्षेत्र के कई स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।स्कूल वैन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना, वाहन की फिटनेस की अनदेखी करना और जरूरी सुरक्षा इंतजामों के बिना बच्चों को सड़क पर भेजना सीधे तौर पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ है।अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस हादसे को सिर्फ दुर्घटना मानकर आगे बढ़ता है या फिर स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा और क्षमता की व्यापक जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करता है।

हादसे की सूचना के बाद कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग घटनास्थल तथा निजी क्लिनिक पहुंचे और घायलों का हाल जाना। विधायक चुन्ना सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता, पूर्व कृषि मंत्री रंधीर सिंह, झामुमो नेता परिमल सिंह, समाजसेवी अशोक राय और विधायक प्रतिनिधि राहुल सिंह समेत अन्य लोगों ने घटना पर दुख जताया।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुटी है। हादसा किसकी लापरवाही से हुआ और स्कूल वैन के दस्तावेज एवं फिटनेस की वास्तविक स्थिति क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

 

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