राँची: राढ़ू नदी में बालू उठाव पर ग्रामीणों का हंगामा,सड़क पर बालू खाली कराया, सूचना के बाद भी आधी रात तक नहीं पहुंचा प्रशासन

राँची।जिले के सिल्ली प्रखंड के हजाम-जयनगर क्षेत्र में राढ़ू नदी से कथित अवैध बालू उठाव को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। गुरुवार की रात ग्रामीणों ने बालू लदे ट्रक और हाइवा को गांव के रास्ते में रोक दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि वाहनों को रोकने के बाद पुलिस प्रशासन और अंचलाधिकारी को इसकी सूचना दी गई, लेकिन सूचना देने के बावजूद काफी देर तक कोई अधिकारी या पदाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों के मुताबिक, रात में राढ़ू नदी की ओर से बालू लदे कई वाहन गांव की सड़क से गुजर रहे थे। वाहनों को रोकने के बाद ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और मौके पर पहुंचकर जांच करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि वे यह जानना चाहते थे कि नदी से उठाया जा रहा बालू वैध है या नहीं और वाहनों के पास बालू परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
अधिकारी नहीं पहुंचे तो सड़क पर ही खाली कर दिया बालू
ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद जब काफी समय तक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, तो बालू लदे वाहनों में से बालू उसी सड़क पर खाली कर दिया गया। इसके बाद खाली वाहनों को चेतावनी देकर वहां से जाने दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, रात करीब 12 बजे तक पुलिस प्रशासन अथवा अंचलाधिकारी की ओर से मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।इस घटनाक्रम को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि उन्होंने स्वयं वाहनों को रोककर प्रशासन को सूचना दी थी, तो समय रहते मौके पर पहुंचकर वाहनों की जांच क्यों नहीं की गई?

किसकी शह पर चल रहा बालू का कारोबार?
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से बालू उठाव पर रोक या निर्धारित नियमों के बावजूद राढ़ू नदी क्षेत्र में रात के अंधेरे में बालू उठाव और परिवहन का खेल चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी से बालू का उठाव वैध तरीके से किया जा रहा है, तो संबंधित वाहनों के कागजात, चालान, अनुमति और बालू के स्रोत की जांच प्रशासन को मौके पर ही करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर रात के समय बालू लदे भारी वाहनों का परिचालन किसकी अनुमति या संरक्षण में हो रहा है। यदि बालू उठाव अवैध है, तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई और यदि वैध है, तो इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।
कई लोगों के नाम सामने आए, भूमिका की पुष्टि बाकी
मामले को लेकर ग्रामीणों की ओर से चौधरी, हरदेव,राहुल सहित कई नामों का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, वाहन रोके जाने के दौरान राहुल मौके पर पहुंचे थे और इस दौरान ग्रामीणों के साथ बहस भी हुई। हालांकि, इन लोगों की कथित भूमिका की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
नदी और पर्यावरण को नुकसान की भी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि नदी से अनियंत्रित तरीके से बालू उठाव होने पर सिर्फ राजस्व का नुकसान नहीं होता, बल्कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप और आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राढ़ू नदी क्षेत्र में बालू उठाव की स्थिति की स्थल जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि किन स्थानों से बालू निकाला जा रहा है, कितने वाहनों से परिवहन हो रहा है और उनके पास वैध दस्तावेज हैं या नहीं।
जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा नेटवर्क
ग्रामीणों ने मांग की है कि राढ़ू नदी से बालू उठाव से जुड़े वाहनों, चालकों, मालिकों और कथित रूप से इसमें शामिल लोगों की जांच की जाए। साथ ही रात के समय नदी क्षेत्र और गांव की सड़कों से गुजरने वाले बालू वाहनों की निगरानी बढ़ाई जाए।सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ग्रामीणों ने स्वयं वाहन रोककर पुलिस प्रशासन और अंचलाधिकारी को सूचना दी, तो रात करीब 12 बजे तक मौके पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ग्रामीण यह भी जानना चाहते हैं कि यदि अवैध बालू उठाव हो रहा है, तो इसके पीछे कौन लोग हैं और इतने बड़े पैमाने पर वाहन नदी तक कैसे पहुंच रहे हैं।
फिलहाल मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राढ़ू नदी से उठाया जा रहा बालू वैध था या अवैध और पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका रही है।
रिपोर्ट:सुकेश

