जयराम महतो बनाम पुलिस एसोसिएशन: टकराव अब आंदोलन की दहलीज पर, 8 सितंबर से काला बिल्ला और अक्टूबर में सामूहिक अवकाश

 

राँची। झारखण्ड की सियासत में डुमरी विधायक जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच शुरू हुआ विवाद अब खुले टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है। बरवाअड्डा थाना प्रभारी से जुड़े विवाद में विधायक के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग को लेकर झारखण्ड पुलिस एसोसिएशन ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। वहीं दूसरी ओर जयराम महतो ने भी साफ कर दिया है कि उनकी लड़ाई किसी पुलिस अधिकारी या पुलिसकर्मी से व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है, जिसमें आम लोगों और निचले स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मियों की समस्याएं दब जाती हैं।

पुलिस एसोसिएशन के फैसले के मुताबिक 8 सितंबर से राज्यभर के पुलिसकर्मी वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करेंगे। इसके बाद आंदोलन के अगले चरण में विरोध को और तेज किया जाएगा। सबसे बड़ा कदम 5 से 10 अक्टूबर तक छह दिनों के सामूहिक अवकाश का बताया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के सम्मान, गरिमा और अधिकार से जुड़ी है।

नौ मुद्दों ने बढ़ाया आंदोलन का दायरा
एसोसिएशन का आंदोलन सिर्फ विधायक जयराम महतो के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है। संगठन ने कुल नौ मुद्दों को लेकर आंदोलन का फैसला किया है। हालांकि, बरवाअड्डा थाना प्रभारी के साथ हुए कथित विवाद और विधायक के खिलाफ दर्ज मामले में कार्रवाई की मांग फिलहाल आंदोलन का सबसे प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई है।एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, पुलिसकर्मियों की गरिमा और कामकाज से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विभाग का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता चुना गया है। एसोसिएशन के साथ अन्य पुलिस संगठनों के समर्थन की बात भी सामने आई है।

बरवाअड्डा विवाद से शुरू हुआ मामला
पूरे विवाद की शुरुआत धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार से जुड़े घटनाक्रम से हुई। पुलिस पक्ष के अनुसार, विधायक जयराम महतो पर थाना प्रभारी से कथित तौर पर अमर्यादित भाषा में बातचीत करने, धमकी देने और अन्य आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। दूसरी ओर जयराम महतो ने पूरे मामले को अलग नजरिए से पेश करते हुए कहा है कि वह एक गरीब युवक के मामले में थानेदार से बात कर रहे थे।
मामला अब अदालत तक भी पहुंच चुका है। मंगलवार को एमपी/एमएलए कोर्ट ने जयराम महतो की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और पुलिस से केस डायरी तलब की है।

जयराम का पलटवार—’मेरी लड़ाई व्यवस्था के खिलाफ’
पुलिस एसोसिएशन के आंदोलन के ऐलान के बाद जयराम महतो ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि उनका विरोध किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी से व्यक्तिगत नहीं है। उनका दावा है कि वह उस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, जिसमें आम जनता और पुलिस के निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की समस्याएं अनदेखी होती हैं।जयराम महतो ने दावा किया कि उन्होंने विधानसभा में पुलिसकर्मियों की समस्याओं को भी उठाया है। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को समय पर भोजन नहीं मिलने का मुद्दा सदन में उठाने का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि जब उन्होंने पुलिसकर्मियों की समस्या को विधानसभा में उठाया, तब पुलिस एसोसिएशन ने इस दिशा में क्या कदम उठाया।विधायक ने यह भी कहा कि छात्रों, नियुक्ति और आम लोगों के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं।

माफी नहीं मांगूंगा’ से और गरम हुआ विवाद
विवाद के बीच जयराम महतो का यह रुख भी सामने आया है कि वह माफी मांगने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जेल जाना भी मंजूर है, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर उनकी लड़ाई जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह न झुकेंगे, न रुकेंगे और न टूटेंगे।ऐसे में एक तरफ पुलिस एसोसिएशन कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग पर आंदोलन की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ विधायक अपने राजनीतिक तेवर के साथ मैदान में बने रहने का संकेत दे रहे हैं।

अब नजर 8 सितंबर पर
पुलिस एसोसिएशन के आंदोलन की शुरुआत की तारीख 8 सितंबर तय होने के बाद अब सभी की नजर इस दिन पर टिक गई है। सवाल यह है कि सरकार और पुलिस विभाग आंदोलन शुरू होने से पहले कोई समाधान निकालता है या नहीं।अगर बातचीत के जरिए मामला नहीं सुलझा तो 8 सितंबर से शुरू होने वाला काला बिल्ला आंदोलन आगे बढ़ते-बढ़ते अक्टूबर में सामूहिक अवकाश तक पहुंच सकता है। ऐसे में यह विवाद महज एक विधायक और पुलिस अधिकारी के बीच का मामला न रहकर पुलिस संगठन बनाम राजनीतिक नेतृत्व की बड़ी टकराहट का रूप ले सकता है।

फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ मजबूती से खड़े हैं। एक ओर पुलिस एसोसिएशन इसे पुलिसकर्मियों के सम्मान और गरिमा की लड़ाई बता रहा है, तो दूसरी ओर जयराम महतो इसे व्यवस्था के खिलाफ जनता और पुलिसकर्मियों की आवाज उठाने का संघर्ष बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद का अगला कदम झारखंड की राजनीति और पुलिस महकमे दोनों के लिए अहम रहने वाला है।

 

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