सनसनीखेज खबरों के गुब्बारे की खुली हवा: JSSC का बड़ा खुलासा, TDPL एजेंसी को लेकर मीडिया रिपोर्ट को बताया पूरी तरह ‘झूठ और भ्रामक’

राँची। झारखण्ड में पिछले कुछ दिनों से मीडिया में चल रही ‘ब्रेकिंग’ और ‘सनसनीखेज’ खबरों पर अब विराम लग गया है।एक दैनिक अखबार द्वारा प्रकाशित एक खबर को लेकर झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने आधिकारिक नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया है और खबर को पूरी तरह निराधार, असत्य एवं भ्रामक करार दिया है।
अक्सर मीडिया में बिना जांचे-परखे खबरें चला दी जाती हैं, जिससे लाखों परीक्षार्थियों के बीच भ्रम और डर का माहौल बन जाता है। इस मामले में भी आयोग ने तीन-चार दिनों के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।
क्या था मामला?
दरअसल, एक दैनिक अखबार द्वारा प्रकाशित खबर में दावा किया गया था कि ‘TDPL’ नाम की एजेंसी के पास JSSC की पांच प्रमुख परीक्षाओं के आयोजन का जिम्मा है। इन परीक्षाओं में मुख्य रूप से शामिल थीं:
झारखण्ड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023
झारखण्ड तकनीकी / विशिष्ट स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023
स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा-2023
झारखण्ड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024
झारखण्ड वनरक्षक प्रतियोगिता परीक्षा
खबर के आते ही परीक्षार्थियों और अभ्यर्थियों के बीच भारी हलचल मच गई थी।
आयोग (JSSC) का करारा जवाब: 5 बड़े पॉइंट में समझें सच्चाई
आयोग द्वारा दिनांक 26.07.2026 को जारी आधिकारिक नोटिस (कार्यालय आदेश) में स्थिति पूरी तरह साफ कर दी गई है:
TDPL का परीक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं: आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऊपर बताई गई किसी भी परीक्षा के संचालन, प्रबंधन या प्रक्रिया से TDPL एजेंसी का कोई संबंध नहीं है।
वनरक्षक परीक्षा पर स्थिति साफ: वनरक्षक के पदों पर नियुक्ति के लिए आयोग को अभी तक कोई अधियाचना (Requisition) प्राप्त ही नहीं हुई है।
अतीत, वर्तमान और भविष्य—सबमें बेदखल: JSSC ने साफ कर दिया है कि विगत वर्षों में संपन्न, वर्तमान में चल रही या भावी किसी भी परीक्षा में TDPL एजेंसी की कोई भूमिका नहीं है।
2025 में ही कर दिया गया था De-empanel: आयोग ने जानकारी दी कि कार्यालय आदेश संख्या-131, दिनांक 20.05.2025 के माध्यम से TDPL एजेंसी को परीक्षा संबंधी सभी कार्यों से मुक्त करते हुए डी-एम्पैनल (De-empanel) कर दिया गया था। इस तिथि के बाद से उसकी कोई सहभागिता नहीं है।
भ्रामक खबर चलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई: आयोग की साख और विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाली असत्य व अपुष्ट खबरों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित संस्था या मीडिया माध्यम पर विधिसम्मत (कानूनी) कार्रवाई की जा सकती है।
आयोग के इस कड़े नोटिस के बाद अब यह साफ हो गया है कि अभ्यर्थियों को सोशल मीडिया या गैर-जिम्मेदाराना मीडिया रिपोर्ट्स की सनसनी पर भरोसा न करके केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही ध्यान देना चाहिए।

