आठ गवाह पलटे, फिर भी नहीं बच सके आरोपी;चर्चित एक्सट्रीम बार हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला…साक्ष्यों की ताकत के आगे बेअसर हुए पलटे गवाह, 10 दोषियों को मिली 9-9 साल की सजा

 

राँची।राजधानी राँची के बहुचर्चित एक्सट्रीम बार डीजे संचालक संदीप प्रमाणिक हत्याकांड में अदालत ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह उर्फ विक्की समेत सभी 10 दोषियों को 9-9 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। राँची के अपर न्यायायुक्त शैलेंद्र कुमार की अदालत ने प्रत्येक दोषी पर अदालत ने 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर अभियुक्तों को अतिरिक्त तीन वर्ष जेल काटनी होगी। मामला चुटिया थाना से जुड़ा है।अदालत ने स्पष्ट किया कि यह हत्या किसी पूर्व नियोजित साजिश या पुरानी दुश्मनी का परिणाम नहीं थी, बल्कि अचानक हुए विवाद और आवेश में की गई घटना थी।

मुख्य आरोपी समेत 10 दोषियों को मिली सजा
सजा पाने वालों में पुंदाग निवासी अभिषेक सिंह उर्फ विक्की, उसका पिता अशोक कुमार सिंह, पटना निवासी प्रतीक सिंह, बरियातू निवासी समीरुद्दीन, बिहार के नवादा निवासी सुमित सिंह, तुपुदाना निवासी पंकज कुमार, खेलगांव निवासी मृत्युंजय कुमार, वर्द्धवान कंपाउंड निवासी दिवाकर उपाध्याय, बोकारो सेल सिटी निवासी प्रकाश कुमार तथा नामकुम निवासी आलोक दीवा शामिल हैं।

पीड़ित परिवार को मिलेगी जुर्माने की राशि
अदालत ने दोषियों पर लगाए गए जुर्माने की 60 प्रतिशत राशि संदीप प्रमाणिक के आश्रितों को देने का निर्देश दिया है। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।

आठ गवाह मुकर गए, लेकिन पुलिस के सबूत बने सबसे बड़ी ताकत

इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दो जांच अधिकारियों (आईओ) इंस्पेक्टर उमाशंकर और इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत सहित कुल 13 गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें से आठ गवाह पूरी तरह या आंशिक रूप से अपने बयान से मुकर गए, जिसके बाद उन्हें होस्टाइल घोषित किया गया।इसके बावजूद पुलिस की वैज्ञानिक जांच और ठोस साक्ष्यों ने पूरे मामले की तस्वीर साफ कर दी। पुलिस ने तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर अदालत के सामने ऐसा मजबूत केस पेश किया कि गवाहों के पलटने के बावजूद सभी दोषियों को सजा मिल गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई महत्वपूर्ण गवाह अदालत में अपने पुराने बयान से पीछे हट गए थे, लेकिन जांच टीम ने घटना से जुड़े हर छोटे-बड़े साक्ष्य को बेहद सावधानी से एकत्र किया। इस पूरी जांच में इंस्पेक्टर उमाशंकर, इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत और चुटिया थाना की टीम ने दिन-रात मेहनत कर अहम भूमिका निभाई, जिसका परिणाम अदालत के फैसले के रूप में सामने आया।

जानिए कैसे हुई थी सनसनीखेज वारदात
यह घटना 26 मई 2024 की देर रात राँची के पॉश इलाके स्थित एक्सट्रीम बार में हुई थी। बार बंद होने के दौरान करीब आधा दर्जन युवक वहां पहुंचे, जहां प्रवेश और सेवा को लेकर बार कर्मियों से उनकी कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ते-बढ़ते मारपीट में बदल गया।
बताया गया कि इसी अपमान का बदला लेने के लिए मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह अपने साथियों के साथ मौके से निकला और बोकारो सेल सिटी स्थित किराये के फ्लैट से राइफल लेकर वापस लौटा। बार में घुसते ही उसने डीजे संचालक संदीप प्रमाणिक की छाती में बेहद करीब से गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।वारदात के बाद आरोपियों ने दहशत फैलाने के उद्देश्य से बार की पार्किंग में भी कई राउंड फायरिंग की और कार से फरार हो गए।

सीसीटीवी फुटेज ने खोला पूरा राज
पूरी घटना बार में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई थी। यही फुटेज पुलिस जांच का सबसे मजबूत आधार बनी। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मामले में कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें 9-9 साल की सजा सुनाई।

इस फैसले का बड़ा संदेश
यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि यदि जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित हो, तो गवाहों के मुकर जाने के बावजूद अपराधियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाया जा सकता है। राँची पुलिस की जांच, तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज ने इस चर्चित हत्याकांड में न्याय दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

 

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