फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन रजिस्ट्री और लाखों के गबन मामले में रिटायर्ड डीएसपी समेत तीन आरोपियों की जमानत खारिज

राँची। सीआईडी कोपरेटिव स्वावलंबी संघ की जमीन की कथित फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई है। कोतवाली थाना कांड संख्या 207/23 में नामजद तीन आरोपियों की जमानत याचिका एडीजे पवन कुमार की अदालत ने सुनवाई के बाद खारिज कर दी। आरोपियों पर फर्जी महिला के नाम से पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर संघ की जमीन की रजिस्ट्री कराने तथा इस प्रक्रिया में लाखों रुपये के गबन का आरोप है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पूर्व की भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धाराएं 420, 467, 468, 471 एवं 406 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। वादी केके राय भूतपूर्व पुलिस उपाधीक्षक के अनुसार, सीआईडी कोपरेटिव स्वावलंबी संघ की मूल्यवान जमीन को हड़पने की नीयत से कथित रूप से फर्जी महिला के नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई। इसके आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई, जिससे संघ को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची।
इस मामले में बैजनाथ सिंह, सेवानिवृत्त डीएसपी महेश राम पासवान तथा सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र कुमार को आरोपी बनाया गया है।तीनों ने एसीपी संख्या 1300/26 के माध्यम से अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई एडीजे पवन कुमार की अदालत में हुई, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
वादी के के राय की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय में पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष यह दलील दी कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को अग्रिम जमानत का लाभ दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। सुनवाई के उपरांत न्यायालय ने जमानत याचिका अस्वीकार कर दी।
हालांकि अधिवक्ता के न्यायालय से बाहर होने के कारण जमानत आदेश की प्रमाणित प्रति अभी प्राप्त नहीं हो सकी है। आदेश की प्रति मिलने के बाद न्यायालय द्वारा दिए गए विस्तृत कारणों की जानकारी सामने आएगी।
यह मामला सीआईडी कोपरेटिव स्वावलंबी संघ की जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और आर्थिक अनियमितताओं को लेकर दर्ज किया गया था, जिसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

