रात में बिना चालान पकड़े गए 9 हाईवा, शाम तक पहुंच गए कागजात; आखिर खेल क्या है?

 

राँची/तमाड़। तमाड़ थाना क्षेत्र में रविवार देर रात प्रशासन ने बिना चालान गिट्टी लेकर जा रहे नौ हाईवा को जब्त कर लिया। बुंडू अनुमंडल पदाधिकारी मोहन लाल मरांडी के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान सभी वाहनों को तमाड़ थाना लाया गया। थाना परिसर में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण हाईवा को स्थानीय स्कूल परिसर में खड़ा कराया गया। हालांकि सोमवार देर शाम संबंधित पक्ष द्वारा गिट्टी से जुड़े दस्तावेज और चालान प्रस्तुत किए जाने के बाद सभी वाहनों को चालक सहित छोड़ दिया गया।

जानकारी के अनुसार, तमाड़ थाना क्षेत्र के कुरचुडीह गांव स्थित किंग स्टोन माइनिंग एंड मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के क्रशर से गिट्टी लादकर सभी हाईवा राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर जा रहे थे। जांच के दौरान किसी भी चालक के पास गिट्टी परिवहन से संबंधित वैध चालान नहीं मिला, जिसके बाद प्रशासन ने नौों वाहनों को जब्त कर थाना पहुंचाया।प्रशासन का कहना है कि बाद में संबंधित पक्ष ने आवश्यक दस्तावेज और चालान प्रस्तुत कर दिए, जिसके बाद सभी वाहनों को छोड़ दिया गया। हालांकि दस्तावेजों की जांच और अन्य पहलुओं की पड़ताल अभी जारी है।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब रात में वाहनों की जांच हुई, तब किसी भी चालक के पास वैध चालान नहीं था। फिर आखिर अगले दिन शाम तक सभी वाहनों के कागजात कैसे उपलब्ध हो गए? ग्रामीणों का कहना है कि यदि रात में प्रशासन की कार्रवाई नहीं होती, तो क्या ये दस्तावेज सामने आते?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से बिना वैध दस्तावेज गिट्टी का परिवहन कर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अवैध खनन, बिना चालान परिवहन और राजस्व चोरी का संगठित नेटवर्क तो नहीं चल रहा है, और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है।

गौरतलब है कि कुरचुडीह स्थित यह क्रशर प्लांट पहले भी कई विवादों में घिर चुका है। ग्रामीणों ने खुदकाट्ठी रैयती भूमि पर क्रशर संचालन, रास्ता विवाद, ब्लास्टिंग से मकानों को नुकसान तथा धूल-गर्द से प्रदूषण फैलने जैसी शिकायतें कई बार प्रशासन के समक्ष उठाई हैं। इन मुद्दों को लेकर ग्रामीणों और कंपनी के बीच पहले भी तनाव की स्थिति बन चुकी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब्ती के समय जिन वाहनों के पास चालान नहीं था, उनके दस्तावेज कुछ ही घंटों में कैसे उपलब्ध हो गए? क्या यह महज संयोग है या फिर राजस्व चोरी के किसी बड़े खेल की ओर इशारा? इस पूरे मामले में निष्पक्ष और गहन जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।

 

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