कुदरत का कहर: कच्चे मकान की दीवार बनी काल, मलबे में दबकर दिव्यांग सुखमती की मौत

चाईबासा।कहते हैं कि बेटियां घर का स्तंभ होती हैं, लेकिन जब वही कच्चा घर ढह जाए, तो एक परिवार के सपने मलबे में तब्दील हो जाते हैं। पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र के बामेहुटुब गांव से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ लगातार हो रही बारिश ने एक गरीब परिवार की खुशियां छीन लीं। दो दिनों की अनवरत बारिश से भीगी एक कच्ची मिट्टी की दीवार अचानक गिर गई, जिसकी जद में आने से 34 वर्षीय दिव्यांग युवती सुखमती बानरा की दर्दनाक मौत हो गई।

सुबह की एक आम शुरुआत और अचानक पसरा मातम:
​रोज की तरह रविवार की सुबह भी सामान्य थी। सुबह के करीब सात बज रहे थे। सुखमती बानरा (34 वर्ष) अपने घर की उसी मिट्टी की दीवार के पास बैठकर दातून कर रही थी, जिसे उसने बचपन से देखा था। वह नहीं जानती थी कि लगातार दो दिनों से हो रही बारिश ने उस दीवार की नींव को खोखला कर दिया है।​अचानक एक जोरदार आवाज हुई और भरभराकर वह भारी-भरकम मिट्टी की दीवार सुखमती के ऊपर गिर गई। चीखने तक का मौका नहीं मिला और वह मलबे के नीचे दफन हो गई।

बहन ने मलबे से निकाला, पर थम चुकी थीं सांसें

दीवार गिरने की धमक सुनकर सुखमती की छोटी बहन बदहवास होकर घटना स्थल की ओर दौड़ी। उसने हिम्मत दिखाते हुए अकेले ही मलबे को हटाना शुरू किया और अपनी बड़ी बहन को खींचकर बाहर निकाला। आनन-फानन में सुखमती को चाईबासा के सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल परिसर परिजनों कीचीख-पुकार से गूंज उठा।

‘वो पांच बहनों में सबसे बड़ी थी और मेरा सहारा भी…’

​मृतका के पिता कुशनू बानरा का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि उनका कोई बेटा नहीं है, पांच बेटियां ही उनका संसार हैं। सुखमती उन सबमें सबसे बड़ी थी।

बचपन से थी दिव्यांग: सुखमती दोनों पैरों से विकलांग थी (बौनी थी), लेकिन वह परिवार पर बोझ नहीं थी।

पेंशन से मिलता था संबल: सरकार की तरफ से उसे हर महीने मिलने वाली ₹1000 की पेंशन परिवार के लिए एक बड़ा सहारा थी।

​वही सहारा अब हमेशा के लिए छिन चुका है। इस हादसे ने एक बार फिर मानसून के मौसम में ग्रामीण इलाकों के कच्चे मकानों की सुरक्षा और गरीबों की लाचारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। प्रशासन से अब पीड़ित परिवार को मुआवजे और मदद की दरकार है।

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