आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला मामला : 4 राज्यों झारखण्ड, यूपी, दिल्ली, मुंबई से जुड़े तार, एटीएस खंगाल रही है आरोपियों की ट्रेवल हिस्ट्री और सोशल मीडिया फुटप्रिंट्स –

— लोहरदगा के युवाओं का दुबई में हुआ था ब्रेनवाश, हमले का वीडियो आकाओं को भेजने के मिले सबूत

राँची।राँची के चुटिया थाना क्षेत्र के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले के मामले में एक बड़ा मोड़ आ गया है। इस सनसनीखेज कांड की कड़ियां अंतरराष्ट्रीय टेरर नेटवर्क से जुड़ने के बाद झारखण्ड एटीएस ने रविवार को चुटिया थाने में दर्ज कांड (संख्या 85/26) को पूरी तरह टेकओवर कर लिया है। केस का प्रभार लेते ही एटीएस एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार को एटीएस के आला अधिकारियों की एक विशेष टीम निवारणपुर स्थित घटनास्थल पर पहुंची और बारीकी से साक्ष्य संकलित किए। एटीएस की टीम ने घटना की रात आरएसएस कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और आसपास के चश्मदीदों से पूछताछ की है। इसके अलावा, अपराधियों के आने-जाने और भागने वाले पूरे रूट का मिलान किया जा रहा है। कार्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी एटीएस ने अपने कब्जे में ले लिया है, ताकि हमले के समय की हर गतिविधि का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके।

एसी मैकेनिक से संदिग्ध आतंकी बनने की खौफनाक दास्तान

अब तक की पुलिस और एटीएस की संयुक्त जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी सैफ अंसारी, अमन अंसारी उर्फ गोलू और सायम सुजान मूल रूप से लोहरदगा जिले के रहने वाले हैं। इनमें से अमन अंसारी उर्फ गोलू का सीधा विदेशी कनेक्शन स्थापित हुआ है। एटीएस ने अमन का पासपोर्ट जब्त कर लिया है। जांच में पता चला है कि पिता स्व. सनोफ अंसारी के इंतकाल के बाद उसके सौतेले पिता नसीम खान ने साल 2022 में उसका पासपोर्ट बनवाया था। अमन दुबई में एक एसी तकनीशियन के तौर पर काम करने गया था। लेकिन, रोजी-रोटी कमाने गए इस युवक के दिमाग में वहीं पर हिंदुस्तान के खिलाफ जहर घोला गया और उसे आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की खौफनाक साजिश का हिस्सा बना दिया गया।

दुबई टू पाकिस्तान, इन 4 संदिग्धों के सिंडिकेट को तोड़ेगी एटीएस

इस पूरे हमले के पीछे चार राज्यों और खाड़ी देशों का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। एटीएस इस केस में मुख्य रूप से चार संदिग्धों के सत्यापन में जुटी है, जिनकी कड़ियां सीधे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से जुड़ रही हैं। शहबाज आलम उर्फ भट्टी और राणा हुसैन (दुबई), ये दोनों सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और खूंखार आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) से जुड़े हैं। दुबई में इन्होंने ही अमन का ब्रेनवाश किया और भारत में आतंक फैलाने का टास्क सौंपा। सबसे बड़ा सबूत यह मिला है कि आरएसएस दफ्तर पर हमले के तुरंत बाद इसका वीडियो बनाकर दुबई में बैठे इसी भट्टी को भेजा गया था। जिशान (मुंबई), यह मुंबई का एक संदिग्ध ट्रेवल एजेंट है। इसी के माध्यम से अमन अंसारी ओमान और दुबई आया-जाया करता था। बीर (अमृतसर), पंजाब का यह संदिग्ध भी सीधे तौर पर आतंकियों के संपर्क में था और इस नेटवर्क को लॉजिस्टिक या अन्य सपोर्ट दे रहा था।

डिजिटल फुटप्रिंट्स और दोबारा रिमांड की तैयारी

एटीएस की तकनीकी टीम तीनों आरोपियों के सभी इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, वाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम) को खंगाल रही है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वे अपने विदेशी आकाओं और देश के अन्य सहयोगियों (जो उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मुंबई में फैले हैं) के साथ किस तरह के कोडेड मैसेज या चैट से जुड़े थे। एटीएस इन तीनों आरोपियों को एक बार फिर अदालत से रिमांड पर लेगी, ताकि इनके द्वारा बताए गए संदिग्ध सहयोगियों का आमना-सामना कराकर सत्यापन किया जा सके।

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