हजारीबाग:बड़कागांव में ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, BGR माइनिंग ऑफिस में भारी तोड़फोड़…
हजारीबाग।झारखण्ड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित बादाम कोल खनन परियोजना क्षेत्र में मंगलवार की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने बीजीआर इंफ्रा माइनिंग के साइट ऑफिस पर अचानक धावा बोल दिया। देखते ही देखते गुस्साई भीड़ ने कार्यालय को चारों ओर से घेर लिया और जमकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। कुछ ही देर में ऑफिस का फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियां और अन्य सामान क्षतिग्रस्त हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह-सुबह आसपास के कई गांवों से ग्रामीण एकत्र होकर साइट ऑफिस पहुंचे थे। भीड़ का आक्रोश इतना अधिक था कि कार्यालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में भगदड़ मच गई। कई लोग जान बचाकर मौके से भाग निकले। पूरे इलाके में भय और तनाव का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि परियोजना प्रभावित ग्रामीणों और कंपनी प्रबंधन के बीच विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। ग्रामीण लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। हाल ही में कंपनी अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाए जाने की घटना के बाद कंपनी ने सैकड़ों ग्रामीणों पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिसके बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई थी।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पुलिस कार्रवाई और मांगों की अनदेखी के विरोध में यह आक्रोश फूटा। वहीं कंपनी प्रबंधन कार्यालय को हुए नुकसान का आकलन कर रहा है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक लाखों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को शांत कराने की कोशिश में जुटा है।
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल बादाम कोल परियोजना क्षेत्र में तनाव बरकरार है और सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
इधर ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के दलालों ने खुद से किया होगा तोड़फोड़ की घटना।किसानों को केस में फंसाने के लिए साजिश रची जा रही है। कंपनी चाहती है कि किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दे और उनकी जमीन आसानी से ले ले।यह कंपनी के मंशा पूरी नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि हमारे साथ कानून है। एकता है।किसान गांधीवादी तरीके से संवैधानिक नियमों के अनुसार शांतिपूर्वक 2 ढाई वर्षों से दे रहे हैं धरना। जब दो ढाई वर्षो में कोई हिंसा घटना का अंजाम नहीं दिया गया तो ,आज ग्रामीण तोड़फोड़ की घटना कैसे करेंगी ?यह सब कंपनी के साजिश है

