जयमाल के साथ शीला-मंगरु फिर हुए एक, झालसा चेयरमैन जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने पुर्नमिलन के लिए दी बधाई..

 

 

“परिवार यदि बिखर जायेगा तो समाज बिखर जायेगा इसलिए हमलोग पहले कोशिश करते हैं कि परिवार बिखरे नहीं। बहुत समझाने की कोशिश करते हैं कि आपस में जुड़ो और परिवार बढ़ाओ। जहां ऐसा नहीं होता है और एक या दूसरा यह कहता है कि हमें साथ नहीं रहना है तब हम दूसरा विकल्प सोच कर चलते हैं। लेकिन पहले फोकस यही रहता है कि हम लोग कैसे परिवार को जोड़ कर रखें। परिवार टूटेगा तो समाज बिखर जाएगा यह लोगों को भी सोचना पड़ेगा। इसमें मध्यस्थ की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।धैर्य पूर्वक दोनों को साथ करने की कोशिश करना चाहिए।अगर बच्चे हैं तो यह लोगों को सोचना होगा कि पति-पत्नी के झगड़े में बच्चों का क्या दोष है।”- न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद

राँची।आज एक हंसता खेलता परिवार बिखरने से बच गया।राँची जिले के पिठौरिया के एक पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद इस कदर बढ़ा कि दोनों अलग-अलग रहने को मजबूर हो गए थे।हालत ऐसी कि करीब दो वर्षों से अलग रह रहे यह दंपति एक दूसरे को देखना नहीं चाहते थे।करीब 35 वर्ष पहले शीला और मंगरु राय का हिन्दू विधि विधान के साथ विवाह हुआ था। इनके दो बच्चे हैं जो 12वीं और नौवीं क्लास में पढ़ते हैं।

मंगरु राज मिस्त्री का काम कर परिवार चलाते हैं।परिवार में कोई अन्य आमदनी नहीं होने की वजह से आर्थिक तंगी समय के साथ बढ़ती गई और इस बात को लेकर पति-पत्नी के बीच तकरार बढ़ती चली गई।विवाद इस कदर बढ़ा कि शीला पति को छोड़कर चली गई।अपने माता-पिता के बीच बढ़ी दूरी और कानूनी लड़ाई से बच्चे काफी दुखी थे कि आखिर हो क्या रहा है।

शीला और मंगरु का यह पारिवारिक विवाद राँची जिला विधिक सेवा प्राधिकार तक पहुंचा।दोनों के बीच मध्यस्थता के जरिए विवाद को दूर किया गया और वह वक्त आया जब राष्ट्रीय लोक अदालत के मौके पर झालसा चेयरमैन सह झारखण्ड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद के समक्ष दोनों ने एक दूसरे के गले में माला पहनाकर एक साथ जीवन बिताने की शपथ ली।

राँची सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने इस मौके पर दंपत्ति को बधाई देते हुए उनके सुखमय पारिवारिक जीवन के लिए शुभकामना व्यक्त की।

बिना बैंड बाजे के एक बार फिर एक दूजे के लिए हुए शीला और मंगरु की खुशी देखते ही बन रही थी।एक दूसरे ने साथ रहने की शपथ ली और इसके लिए डालसा के प्रति आभार जताया।

मीडिया से बात करते हुए मंगरु राय कहते हैं कि अब गिला शिकवा दूर हो गया है। अब बच्चों के लिए सोचना है और मिलकर जीवन की गाड़ी को चलाना है।वहीं शीला भी इस पुर्नमिलन से खुश थीं।वो कहती हैं कि कुछ बातें ऐसी थीं जो अब दूर हो चुकी हैं। हमें साथ में रहना है।बहरहाल शीला और मंगरु जैसे आज के समय कई लोग हैं जो छोटे-मोटे विवाद के कारण एक दूसरे से अलग हो जाते हैं।आवश्यकता है कि ऐसे लोग अपने गिले-शिकवे को दूर भगाकर परिवार को बिखरने से बचाएं।

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