विदेश में रहकर झारखण्ड में अपराध चला रहे अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, सीआईडी में पहली बार एक्सट्रैडिशन सेल का गठन

–डीएसपी के नेतृत्व में 6 अफसरों की टीम तैयार, दुबई, खाड़ी देशों व दक्षिण-पूर्व एशिया से झारखण्ड के अपराधी चला रहे है साम्राज्य

राँची। विदेश में बैठकर झारखण्ड में रंगदारी, हत्या और संगठित अपराध का नेटवर्क चलाने वाले अपराधियों पर अब शिकंजा कसने जा रहा है। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पहली बार एक्सट्रैडिशन सेल (प्रत्यर्पण प्रकोष्ठ) का गठन किया है। यह सेल उन कुख्यात अपराधियों को भारत वापस लाने का काम करेगा, जो राज्य से फरार होकर दुबई, खाड़ी देशों व दक्षिण-पूर्व एशिया में बैठकर अपना ‘क्राइम किंगडम’ चला रहे हैं। अगस्त 2025 में झारखण्ड पुलिस ने कुख्यात सुनील सिंह मीणा उर्फ मयंक सिंह की अजरबैजान से सफल प्रत्यर्पण के बाद मिली कामयाबी ने इस सेल के गठन की राह आसान की। अब इस पहल को स्थायी और संस्थागत रूप दे दिया गया है।

डीएसपी के नेतृत्व में हाई-प्रोफाइल टीम तैयार

इस विशेष सेल की कमान डीएसपी स्तर के अधिकारी को दी गई है। उनके साथ 5 तेज-तर्रार इंस्पेक्टर तैनात किए गए हैं। सबसे अहम भूमिका निभाएंगे दो लीगल ऑफिसर, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, प्रत्यर्पण संधि और कूटनीतिक प्रक्रियाओं को संभालेंगे। ये अधिकारी विदेश मंत्रालय और इंटरपोल के साथ तालमेल बनाकर केस को मजबूत करेंगे। कुख्यात अपराधी मयंक सिंह को विदेश से वापस लाना झारखण्ड पुलिस की बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता रही। इस केस ने साबित किया कि मजबूत कानूनी तैयारी और इंटरनेशनल कोऑर्डिनेशन के जरिए अपराधियों को कहीं से भी पकड़ा जा सकता है। यही मॉडल अब नए सेल का आधार बना है।

कैसे काम करेगा एक्सट्रैडिशन सेल

सीआईडी का नया एक्सट्रैडिशन सेल बेहद सुनियोजित तरीके से काम करेगा। सबसे पहले यह सेल रेड कॉर्नर और ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी अपराधियों का एक अपडेटेड डेटा बैंक तैयार करेगा, ताकि विदेश में छिपे हर वांछित अपराधी की सटीक जानकारी एक जगह उपलब्ध रहे। इसके बाद डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए उनके सोशल मीडिया अकाउंट, आईपी एड्रेस और झारखंड में मौजूद गुर्गों से संपर्क पर नजर रखी जाएगी। सेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहेगा और सीबीआई के साथ-साथ विदेश मंत्रालय के सहयोग से मजबूत एविडेंस डोजियर तैयार करेगा, ताकि प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन न आए। जैसे ही किसी अपराधी की लोकेशन कन्फर्म होगी, तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू कर उसे हिरासत में लेकर भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

राडार पर झारखण्ड के ये भगोड़े

इस सेल के राडार पर इस समय कई ऐसे भगोड़े हैं, जो विदेश में बैठकर राज्य में अपराध का नेटवर्क चला रहे हैं। इनमें सबसे कुख्यात प्रिंस खान है, जो झारखण्ड पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है और विदेश से ही अपने गिरोह के जरिए रंगदारी व आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहा है। इसके अलावा अमन श्रीवास्तव गिरोह के सदस्य भी एजेंसियों के निशाने पर हैं, जो दुबई समेत अन्य देशों से व्हाट्सएप कॉल के जरिए कोयलांचल क्षेत्र में रंगदारी वसूल रहे हैं। वहीं मयंक सिंह के नेटवर्क के कई सक्रिय सदस्य अब भी फरार हैं और विदेश में छिपकर गिरोह को संचालित कर रहे हैं।

आगे क्या…. संगठित अपराधिक गिरोह पर पड़ेगा बड़ा असर

इस सेल के गठन से सबसे बड़ा असर रंगदारी पर पड़ेगा, क्योंकि विदेश से आने वाली धमकियों और वसूली के मामलों में कमी आएगी। साथ ही डिजिटल सबूत जुटाने की प्रक्रिया मजबूत होगी, जिससे ऑनलाइन ट्रांजक्शन और कॉल ट्रेसिंग पहले के मुकाबले आसान और प्रभावी हो जाएगी।
इस पहल से अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ेगा, उन्हें यह संदेश जाएगा कि वे कहीं भी छिपे हों, सुरक्षित नहीं हैं। सबसे अहम यह कि अब प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया में तेजी आएगी और जो काम पहले वर्षों में होता था, वह अब महीनों में पूरा किया जा सकेगा।

जानिए क्या है प्रत्यर्पण

प्रत्यर्पण वह कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें एक देश अपने यहां छिपे अपराधी को उस देश को सौंप देता है, जहां उसने अपराध किया है। भारत की कई देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां हैं। नया एक्सट्रैडिशन सेल इन्हीं संधियों का इस्तेमाल कर अपराधियों को वापस लाने की प्रक्रिया तेज करेगा।

“विदेश में छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होगी तेज
एक्सट्रैडिशन सेल के गठन से विदेश में छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई अब तेज और प्रभावी होगी। इससे संगठित अपराध, रंगदारी और साइबर क्राइम पर सीधा असर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय समन्वय और मजबूत कानूनी प्रक्रिया के जरिए हम अपराधियों को जल्द भारत लाने में सफल होंगे।”–
मनोज कौशिक, एडीजी, सीआईडी

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