झारखण्ड हाईकोर्ट का सीबीआई को निर्देश, एमपी-एमएलए के खिलाफ लंबित केस का जल्द कराएं निष्पादन

 

राँची।झारखण्ड हाईकोर्ट ने सांसदों और विधायकों (एमपी-एमएलए) के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।यह मामला स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका के तहत सुना जा रहा है।

जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सीबीआई द्वारा दायर शपथ पत्र का अवलोकन किया।इसके बाद कोर्ट ने मौखिक रूप से सीबीआई को निर्देश दिया कि एमपी-एमएलए से जुड़े सभी लंबित आपराधिक मामलों के शीघ्र निष्पादन की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।कोर्ट ने साफ कहा कि इन मामलों में देरी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है।

हाईकोर्ट ने पूर्व की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि ट्रायल में देरी का सीधा असर गवाहों पर पड़ता है।समय बीतने के साथ गवाहों की स्मृति कमजोर होती है, जिससे उनकी गवाही प्रभावित हो सकती है।कोर्ट ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए कहा कि न्याय में देरी और न्याय से वंचित करने के बराबर है।

सीबीआई द्वारा दायर शपथ पत्र में बताया गया कि एमपी-एमएलए से जुड़ा एक मामला निष्पादित हो चुका है, जबकि 10 आपराधिक मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।इससे पहले की सुनवाई में यह जानकारी दी गई थी कि झारखण्ड में कुल 11 ऐसे मामले लंबित थे, जिनमें अब केवल एक का निपटारा हो पाया है।

खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 जून की तिथि निर्धारित की है।तब तक कोर्ट ने सीबीआई से अपेक्षा की है कि वह लंबित मामलों में प्रगति दिखाए और निष्पादन की दिशा में ठोस कदम उठाए।

हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में स्पीडी ट्रायल बेहद जरूरी है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हो। कोर्ट के इस रुख से यह संकेत मिलता है कि अब ऐसे मामलों में देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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