हजारीबाग में जंगली हाथी का आतंक, एक परिवार के चार सदस्य सहित 6 लोगों की ली जान..
हजारीबाग।झारखण्ड के हज़ारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड के गोंदवार में पांच हाथियों के झुंड ने 6 व्यक्तियों की जान ले ली।जिसमें एक ही परिवार के चार लोग हैं।गुरुवार-शुक्रवार की रात के लगभग 1 से 2 बजे के बीच की घटना है।इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम है और लोग दहशत में हैं। वन विभाग के पदाधिकारी घटनास्थल पर पहुंच कर लोगों से अपील की है कि धैर्य बनाकर रखें तथा जंगली क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति न जाएं।
इधर सदर हजारीबाग SDM आदित्य पांडे ने कहा, “…जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई तो नहीं हो सकती, लेकिन हम कोशिश करेंगे कि जल्द ही मुआवजा मिल जाए। हम वन विभाग से बात करके ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्पर हैं। इसके लिए, हम ट्रेनिंग देंगे और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए हर मुमकिन सावधानी बरतेंगे। प्रशासन लोगों के साथ है… हम वन विभाग के साथ मिलकर जो भी ज़रूरी कदम होंगे, उठाएंगे।”
बताया जाता है कि पूरा परिवार रात में सोया हुआ था और अचानक पांच हाथियों के झुंड ने घर पर धावा बोल दिया।घर में सो रहे सभी 4 लोगों की मौत घटना स्थल पर हो गई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद सदर एसडीओ आदित्य पांडे घटनास्थल पर पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी ली।उन्होंने बताया कि यह एक बहुत ही दुखद घटना है।नियमानुसार मांग पूरी की जाएगी।
‘हाथी का झुंड बोकारो और रामगढ़ के सीमाने पर बीती रात था।देर रात हाथी चूरचू प्रखंड के आंगो गांव के निकट गोंदवार पहुंच गया।भुइयां टोली में एक घर में अनाज की तलाश में पहुंचा।उस समय घर में सभी लोग सो रहे थे।हाथी को देख घर के लोग बाहर निकले और इसी दौरान हाथियों ने एक ही घर के 4 लोगों को चपेटे में ले लिया। पास में दो अन्य लोग थे उन्हें भी हाथी ने अपनी चपेट में ले लिया। उन दोनों की भी मौत हो गई।’- विकास कुमार उज्ज्वल, DFO, पूर्वी वन प्रमंडल
घटना के बाद स्थानीय विधायक तिवारी महतो उर्फ निर्मल महतो घटनास्थल पहुंचे और जानकारी ली।उन्होंने बताया कि 6 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है।इसके पहले भी इस क्षेत्र में हाथियों का आतंक रहा है। विभाग कभी भी हाथी को भगाने के लिए संवेदनशील नहीं रहा।यही कारण है कि इतनी बड़ी घटना घट गई।उन्होंने कहा कि मृतक परिवार के साथ संवेदना है। सरकारी प्रावधान के अनुसार प्रभावित परिवार को मुआवजा दिया जाएगा।
वन विभाग के रेंज ऑफिसर विजय कुमार ने घटनास्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों से वार्ता की। बताया कि पांच हाथियों में एक हाथी बेहद खतरनाक है।जो सिर्फ मानव पर ही हमला करता है।दुखद घटना में 6 लोगों की मौत हुई है।वन विभाग की ओर से जो प्रावधान हैं वह पीड़ित परिवार को दिया जाएगा।वहीं उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है अपने मोबाइल फोन पर हाथी एप अवश्य डाउनलोड करें जो हाथी की सूचना देगा।
जंगली हाथियों से बचकर निकलने वाले स्थानीय ने बताया कि पांच हाथियों के झुंड में देर रात गांव में हमला किया था। हाथी अनाज की तलाश में गांव में प्रवेश कर रहे हैं।बड़ी ही मुश्किल से जान बचाकर भाग पाया।
इसके पहले भी हाथियों ने कई लोगों की जान ली है। जिस तरह से एक रात में एक ही गांव के 6 लोगों की मौत हाथी के कारण हुई है यह चिंता का विषय है। बहरहाल जरूरत है ग्रामीणों को सचेत रहने की।इस घटना में दो बच्चों, दो महिलाओं और दो पुरुषों की मौत हो गई। इनमें एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं।
शुक्रवार की सुबह गांव में प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि, जो क्षति हुई है, उसकी पूर्ति तो नहीं हो सकती, लेकिन मुआवजे का जो भी प्रावधान है, उसकी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कोशिश करेंगे कि मुआवजा जल्द दे दिया जाए। उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से बात हुई है। इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए हम तत्पर हैं। हम जो भी सावधानी के लिए उपाय करने की जरूरत होगी, हम करेंगे, ताकि ऐसी दुर्घटनाएं आगे न हों। ग्रामीणों का गु्स्सा स्वाभाविक है, प्रशासन पीड़ित लोगों के साथ है।
हाथियों ने 25 साल में 1400 लोगों की जान ली
झारखण्ड में हाथियों और ग्रामीणों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार होती रही हैं। इसी साल जनवरी में पश्चिम सिंहभूम जिले में एक बेकाबू हाथी ने 20 से अधिक लोगों को मार डाला था। सन 2000 से लेकर 2025 तक की 25 साल की अवधि में राज्य में विभिन्न स्थानों पर हाथियों के हमलों में 1400 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इन हमलों में 600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सन 2020 से 2025 के दौरान पांच सालों में 525 लोगों की मौतें हुई हैं।
इंसानों ने 23 सालों में ले ली 150 हाथियों की जान
झारखण्ड के पांच जिले पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, चतरा, रांची और सरायकेला ऐसे जिले हैं जहां हाथियों के हमलों की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ हाथी ही इंसानों पर हमले कर रहे हैं, मानव भी हाथियों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। पिछले 23 सालों में हुए संघर्षों में 150 से अधिक हाथियों की भी मौत हुई है। मुख्य रूप से लोगों द्वारा बचाव के लिए डाले गए बिजली के तारों से झटका लगने पर हाथियों की मौतें हुई हैं।
झारखण्ड में क्यों आक्रामक हो रहे हाथी?
झारखण्ड में इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य में जंगलों के कटने से हाथियों के प्राकृतिक आवासीय क्षेत्र में कमी आ रही है। उने कॉरिडोर नष्ट हो रहे हैं। राज्य के जंगलों में अब हाथियों के लिए भोजन की कमी हो गई है। उनके पुराने आवागमन के रास्तों पर इंसानी बस्तियां बस गई हैं। यह मानवीय दखल हाथियों की परेशानी की करण बन गई है। वे भोजन और पानी की तलाश में गांवों में घुस आते हैं। वे या तो भय से या फिर नाराज होकर लोगों पर जानलेवा हमले कर देते हैं।
आठ साल में बचे सिर्फ एक तिहाई हाथी
झारखण्ड में पिछले साल हाथियों की डीएनए के आधार पर गणना की गई थी जिसके बाद चौंकाने वाली रिपोर्ट आई। अक्टूबर 2025 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, झारखण्ड में जंगली हाथियों की तादाद में भारी कमी आई है। झारखण्ड में सन 2017 में जहां 678 हाथी थे, वहीं सन 2025 में वे सिर्फ 217 बचे हैं। पर्यावरण मंत्रालय के प्रोजेक्ट एलीफेंट और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सर्वे ऑल इंडिया सिंक्रोनस एलीफेंट एस्टीमेशन 2025 (एसएआईईई 2025) के मुताबिक झारखंड में हाथियों की संख्या 149 से 286 के बीच हो सकती है, जिसका औसत 217 है। हाथियों की संख्या का घटना वन क्षेत्र में कमी आने और उनके प्राकृतिक आवास में इंसानी हस्तक्षेप का नतीजा है।

