सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: राज्यों की ‘प्रभारी डीजीपी’ नियुक्ति पर लगाम,यूपीएससी को मिले विशेष अधिकार
राँची/नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकारों द्वारा पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति में देरी करने और लंबे समय तक कार्यवाहक (Acting) DGP के सहारे पुलिस विभाग चलाने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है।कोर्ट ने साफ कहा कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे कई योग्य और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करियर के साथ गंभीर अन्याय होता है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस समस्या पर रोक लगाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को अहम अधिकार दिए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि UPSC समय पर DGP चयन के लिए राज्यों को पत्र लिखकर नामों का प्रस्ताव मांग सकता है। यदि कोई राज्य सरकार प्रस्ताव भेजने में टालमटोल करती है, तो UPSC सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले राज्यों के खिलाफ जवाबदेही तय की जाएगी और सख्त कार्रवाई होगी।
यह मामला तेलंगाना सरकार द्वारा DGP की नियमित नियुक्ति में की गई देरी से जुड़ा है। राज्य के अंतिम स्थायी DGP अनुराग शर्मा वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वर्षों तक राज्य सरकार ने UPSC को स्थायी नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश नहीं भेजी। आखिरकार अप्रैल 2025 में प्रस्ताव भेजे गए, जिस पर UPSC ने आपत्ति जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस देरी के चलते 2017 के बाद DGP बनने के हकदार कई काबिल अधिकारी बिना इस पद पर पहुंचे ही रिटायर हो गए।
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर प्रकाश सिंह मामले में तय दिशा-निर्देशों को दोहराया। अदालत ने कहा कि DGP की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, जिसमें UPSC द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए तीन सबसे वरिष्ठ और योग्य अधिकारियों के पैनल में से ही राज्य सरकार को चयन करना होता है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कई राज्य अपनी पसंद के अधिकारी को बनाए रखने के लिए ‘एक्टिंग DGP’ का रास्ता अपनाते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की मूल भावना के खिलाफ है। हालांकि UPSC ने तेलंगाना सरकार की देरी पर आपत्ति जताई थी, लेकिन अदालत ने कहा कि प्रक्रिया को और टालना गलती करने वाले राज्यों को ही फायदा पहुंचाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर तेलंगाना में DGP चयन प्रक्रिया पूरी करें।
इस फैसले से इधर झारखण्ड में भी असर दिख सकता है।क्योंकि यहाँ कि सरकार ने भी यूपीएससी की अनदेखी कर डीजीपी नियुक्ति कर दिए हैं।

