गृह विभाग का फर्जी अंडर सेक्रेटरी बनकर थाना प्रभारी पर झाड़ रहा था रौब, ID मांगी तो खुली पोल; 52 वर्षीय जालसाज गिरफ्तार

राँची। झारखण्ड सरकार के गृह विभाग का फर्जी अंडर सेक्रेटरी और स्पेशल ब्रांच का फर्जी डीएसपी बनकर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर धौंस जमाने और मंत्रालयों से गोपनीय दस्तावेज चुराने वाले एक बड़े जालसाज को राँची के पिठोरिया पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी खुद को गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी अजय कुमार बताता था, जबकि उसका असली नाम अरुण कुमार अग्रवाल (उम्र 52 वर्ष), पिता बंशीधर अग्रवाल है, जो राँची के लालपुर थाना क्षेत्र स्थित अमरावती अपार्टमेंट (बीआईटी एक्सटेंशन के सामने) का निवासी है। आरोपी के पास से वीआईपी पास लगी ब्रेजा कार, आईफोन समेत कई मोबाइल, वीआईपी लेटरहेड और पुलिस मुख्यालय व गृह विभाग से जुड़े अति-संवेदनशील और गोपनीय सरकारी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इस संबंध में पिठोरिया थाना प्रभारी सतीश कुमार के स्वलिखित बयान पर आरोपी के विरुद्ध पिठोरिया थाना कांड संख्या-97/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की धारा 3, 5 एवं 6 के अंतर्गत केस दर्ज कर उसे जेल भेजा जा रहा है।

थाना प्रभारी पर बना रहा था गैर-कानूनी काम का दबाव

प्राथमिकी के अनुसार, पिठोरिया थाना प्रभारी सतीश कुमार ने दर्ज बयान में बताया कि विगत एक वर्ष से 9470168666 नंबर से एक व्यक्ति खुद को गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी अजय कुमार बताकर लगातार फोन करता था। वह कहता था कि उसी ने वरीय अधिकारियों से कहकर उनकी पोस्टिंग पिठोरिया थाने में कराई है। इस बहाने वह छोटे-मोटे मामलों में गैर-कानूनी कार्य कराने का दबाव बनाता था और पिठोरिया क्षेत्र स्थित अपने घर पर उपहार भेजने की मांग करता था। 21 सितंबर 2026 को आरोपी ने फोन कर थाना प्रभारी को सूचना दी कि चंदवे स्थित उसके घर के बाहर कुछ लोग हंगामा कर रहे हैं। जब थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ चंदवे पहुंचे, तो तथाकथित अंडर सेक्रेटरी रौब जमाते हुए कहने लगा- “क्या सतीश तुमको नौकरी नहीं करनी है? मेरी बात विभाग के वरीय पदाधिकारियों से होती रहती है, मेरी बातों को हल्के में मत लो।”

गाड़ी पर पुलिस लोगो और मंत्रालय का कार पास देख हुआ संदेह

घटनास्थल पर थाना प्रभारी की नजर आरोपी की सिल्वर-ब्लैक कलर की मारुति ब्रेजा कार (जेएच01एफएन-3100) पर पड़ी। कार के डैशबोर्ड पर लाल-नीले रंग का पुलिस लोगो बोर्ड, विंडशील्ड पर गृह विभाग 2024 का तिकोना कार पास और पंचम झारखण्ड विधानसभा व झारखण्ड सरकार की मुहर लगे फर्जी स्टिकर चिपके हुए थे। संदेह गहराने पर थाना प्रभारी ने वरीय अधिकारियों से विमर्श कर उसे 22 सितंबर को कागजात के साथ थाने बुलाया। 22 सितंबर को जब आरोपी दोपहर करीब 1:20 बजे पिठोरिया थाने पहुंचा और उससे गृह विभाग का आधिकारिक परिचय पत्र मांगा गया, तो वह कोई वैध पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद जब गृह विभाग के अधिकारियों व कर्मियों से संपर्क साधा गया, तो पुष्टि हुई कि अजय कुमार नाम का कोई भी व्यक्ति गृह विभाग में अंडर सेक्रेटरी के पद पर पदस्थापित नहीं है। इसी बीच वरीय पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय-1) अमर कुमार पाण्डेय से सत्यापन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि यही व्यक्ति उनके मोबाइल पर भी फर्जी अंडर सेक्रेटरी बनकर कॉल और व्हाट्सएप के जरिए प्रभाव जमाने की कोशिश करता रहा था।

सख्ती से पूछताछ में खुली पोल: असली पहचान अरुण कुमार अग्रवाल

कड़ाई से पूछताछ करने पर जालसाज टूट गया और उसने अपना असली नाम अरुण कुमार अग्रवाल निवासी लालपुर (रांची) बताया। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह कई वर्षों से फर्जी पहचान पत्र और वाहन पर पुलिस व मंत्रालय का लोगो लगाकर घूमता था। इस वजह से ट्रैफिक पुलिस उसे कभी नहीं रोकती थी, टोल और पार्किंग शुल्क माफ हो जाते थे और मंत्रालय में बिना रोक-टोक प्रवेश मिल जाता था। आरोपी विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में जाकर गोपनीय सूचनाएं जुटाता था और फिर विभागीय पदाधिकारियों को डरा-धमकाकर या झांसे में लेकर मनचाही पोस्टिंग कराने व लंबित विभागीय कार्रवाइयों को रफा-दफा कराने के नाम पर ठगी का धंधा चलाता था।

बरामदगी की लंबी सूची: कार, फोन और वीआईपी लेटरहेड जब्त

कार चालक धीरज कुमार (निवासी करमटोली, लालपुर) के समक्ष वाहन और आरोपी की तलाशी ली गई, जिसमें चौंकाने वाले सामान बरामद हुए।

-वाहन व मोबाइल: मारुति ब्रेजा कार (जेएच01एफएन-3100), एप्पल आईफोन 16 प्रो और सैमसंग गैलेक्सी ए-25।
-फर्जी पहचान पत्र: झारखण्ड सरकार गृह विभाग के अवर सचिव ‘अजय कुमार’ के नाम से हस्ताक्षरित फोटोयुक्त 2 पहचान पत्र तथा स्पेशल ब्रांच के डीएसपी ‘अजय कुमार’ के नाम से 2 फर्जी पहचान पत्र।
-फर्जी पास व स्टिकर: राजभवन में प्रवेश हेतु हरे रंग के 5 त्रिकोणीय कार पास, गृह विभाग मंत्रालय के 5 कार पास और इन्हें बनाने में प्रयुक्त 6 स्टिकर पेपर।
-सादा लेटरहेड: पूर्व सचिव अमित खरे (मानव संसाधन विकास विभाग), विधायक श्रीमती गीताश्री उरांव, डॉ. देवनिश खेश, डॉ. दीपक गुप्ता और सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची का सादा लेटरहेड।
-शैक्षणिक प्रमाण पत्र व पहचान: श्वेता कुमारी यादव का सीबीएसई अंक प्रमाण पत्र/सीएलसी तथा आरोपी अरुण कुमार अग्रवाल के आधार कार्ड की छाया प्रति।

नक्सली इनाम व आईपीएस प्रोन्नति से जुड़े अति-गोपनीय दस्तावेज भी मिले

तलाशी के दौरान आरोपी के पास से सरकारी विभागों के कई अति-संवेदनशील दस्तावेज बरामद हुए, जिन्हें देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। इनमें विशेष शाखा (झारखण्ड सरकार) के नक्सली संगठनों पर पुरस्कार राशि नवीनीकरण व उद्घोषणा से संबंधित अत्यंत गोपनीय पत्र (पृष्ठ संख्या 1 से 8 एवं 1 से 10)। पुलिस महानिदेशक पर्षद की 14 मार्च 2023 को संपन्न बैठक का गोपनीय कार्यवृत्त (इंस्पेक्टर से डीएसपी प्रोन्नति संबंधी, कुल 19 पृष्ठ)। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग का राज्य पुलिस सेवा के पदाधिकारियों के आईपीएस संवर्ग में प्रोन्नति संबंधी गोपनीय दस्तावेज। गृह विभाग द्वारा नक्सली इनामी राशि की घोषणा से संबंधित गोपनीय ज्ञापांक व पत्रांक की प्रतियां शामिल है।

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