JSSC-CGL धांधली की जांच में बड़ा एक्शन, चार और सफल अभ्यर्थी गिरफ्तार; पांच दिन रिमांड पर सोमांश-राहुल

 

राँची। झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की JSSC-CGL परीक्षा-2023 में कथित धांधली और पेपर लीक मामले में CID ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने परीक्षा में सफल रहे चार अभ्यर्थियों दीपक कुमार, उमेश कुमार राय, विजय कुमार तिवारी और आनंद कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। वहीं, मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को अदालत से पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। एक साथ हुई इन कार्रवाइयों से परीक्षा धांधली मामले की जांच ने नया मोड़ ले लिया है।

CID अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि कथित पेपर लीक का नेटवर्क किस स्तर तक फैला था और परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों की इसमें क्या भूमिका रही। जांच टीम की नजर पेपर लीक के स्रोत, मुख्य सरगना, बिचौलियों, अभ्यर्थियों के बीच संपर्क और पैसों के लेन-देन पर है।

चार सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी से बढ़ा जांच का दायरा
CID की प्रेस रिलीज के अनुसार गिरफ्तार सफल अभ्यर्थियों में दीपक कुमार, निवासी डुप्लेक्स सनशाइन अपार्टमेंट, नावाडीह, धनबाद; उमेश कुमार राय, भोजपुर बिहार निवासी एवं वर्तमान में दुग्दा, बोकारो में रहने वाले; विजय कुमार तिवारी, राजगंज, धनबाद निवासी और आनंद कुमार सिंह, सारण बिहार निवासी एवं वर्तमान में सुदामडीह, धनबाद में रहने वाले शामिल हैं।इन चारों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इनका कथित पेपर लीक नेटवर्क से किस तरह संपर्क था और परीक्षा में उनकी सफलता के पीछे किसी तरह की अनियमितता की भूमिका थी या नहीं।

सोमांश और राहुल से पांच दिन होगी पूछताछ
दूसरी ओर, गिरफ्तार किए गए सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान CID दोनों से आमने-सामने पूछताछ कर सकती है। जांच अधिकारियों की कोशिश है कि पूछताछ में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम और कथित पेपर लीक की पूरी कड़ी सामने आए।

बैंक खाते और डिजिटल चैट भी जांच के घेरे में
CID कथित तौर पर अभ्यर्थियों से हुई पैसों की वसूली और उसके लेन-देन की भी जांच कर रही है। रकम किन खातों में पहुंची, किसके जरिए ट्रांसफर हुई और इसका अंतिम लाभार्थी कौन था, इसकी पड़ताल की जा रही है।इसके साथ ही आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि इन डिजिटल सुरागों से नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

कहां से निकला पेपर, किसने पहुंचाया—CID तलाश रही जवाब

जांच का सबसे अहम सवाल कथित प्रश्नपत्र के स्रोत को लेकर है। CID यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा सामग्री तक किसकी पहुंच थी और कथित तौर पर वह बाहर कैसे पहुंची। इसके अलावा प्रिंटिंग, सुरक्षित रखने और वितरण की प्रक्रिया से जुड़ी संभावित कड़ियों की भी जांच की जा रही है।

आगे और गिरफ्तारियां संभव
चार सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी और दो प्रमुख आरोपियों को रिमांड पर लिए जाने के बाद CID की जांच अब और तेज हो गई है। पूछताछ में यदि नए नाम सामने आते हैं तो राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी और और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

फिलहाल जांच के केंद्र में तीन बड़े सवाल हैं;पेपर कथित तौर पर कहां से लीक हुआ, इस नेटवर्क का असली सरगना कौन है और अभ्यर्थियों से जुड़े पैसों का पूरा खेल किसके जरिए चला। CID की कार्रवाई से आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे की उम्मीद बढ़ गई है।

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