अस्पताल में एक करोड़ के करीब का बिलिंग घोटाला…तीन कर्मचारियों पर FIR, फर्जी बिल बनाने से लेकर सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ का आरोप
राँची।राँची के कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में कथित तौर पर बड़े वित्तीय घोटाले और बिलिंग में हेराफेरी का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने अपने ही तीन कर्मचारियों पर मिलीभगत कर फर्जी बिल तैयार करने, फोटोशॉप से बिलों में बदलाव करने और बिलिंग सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर अस्पताल को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले में अस्पताल के निदेशक डॉ. वीरेंद्र प्रसाद कश्यप की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस से पूरे मामले की विस्तृत और फोरेंसिक जांच की मांग की गई है।
फर्जी बिल, फोटोशॉप और सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ का आरोप
शिकायत में अस्पताल के कर्मचारी आशुतोष कुमार, अंकित कुमार और संतोषी कुमारी को आरोपी बनाया गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार प्रारंभिक आंतरिक जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के परीक्षण में वित्तीय अनियमितता के कई गंभीर संकेत मिले हैं। आरोप है कि तीनों कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से अस्पताल की बिलिंग प्रक्रिया में हेराफेरी की।शिकायत के मुताबिक अस्पताल के मूल बिलों में कथित तौर पर फोटोशॉप या अन्य फोटो एडिटिंग माध्यम से बदलाव किया जाता था। बिल की राशि समेत अन्य विवरण बदले जाने और मरीजों को दिए गए बिल तथा अस्पताल के बिलिंग सॉफ्टवेयर में दर्ज वास्तविक रिकॉर्ड के बीच अंतर पाए जाने का दावा किया गया है।इतना ही नहीं, कुछ मेडिकल जांच और प्रक्रियाओं की संख्या में भी अस्पताल के वास्तविक रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर बिलिंग रिकॉर्ड के बीच बड़ा अंतर सामने आने की बात कही गई है।
B-Scan से लेकर OPTOS तक में मिली बड़ी गड़बड़ी
अस्पताल की ओर से पुलिस को उपलब्ध कराए गए प्रारंभिक ऑडिट और रिकॉर्ड में कई चिकित्सा सेवाओं की संख्या में भारी अंतर का उल्लेख किया गया है। शिकायत में दिए गए आंकड़ों के अनुसार-
B-Scan: रिकॉर्ड में 8,483, जबकि सॉफ्टवेयर में 7,745, यानी 738 का अंतर, जिसका वित्तीय अंतर करीब 11.07 लाख रुपये बताया गया है।
POOculyzer: रिकॉर्ड में 2,421 और सॉफ्टवेयर में 1,523, यानी 898 का अंतर, जिसका वित्तीय प्रभाव करीब 40.41 लाख रुपये बताया गया है।
Tricort Injection: रिकॉर्ड में 1,064 और सॉफ्टवेयर में 487, यानी 577 का अंतर, जिसकी राशि करीब 23.08 लाख रुपये बतायी गयी है।
OPTOS: रिकॉर्ड में 8,359 और सॉफ्टवेयर में 6,695, यानी 1,664 का अंतर, जिसका वित्तीय अंतर करीब 16.64 लाख रुपये बताया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि इन मदों के अलावा भी अन्य रिकॉर्ड और समायोजन की जांच में आर्थिक नुकसान की राशि काफी अधिक हो सकती है।अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत में कहा है कि प्रारंभिक जांच में सामने आए आंकड़ों के आधार पर कथित वित्तीय अनियमितता का प्रभाव करीब 90 लाख से एक करोड़ रुपये के आसपास होने का संदेह है। हालांकि, शिकायत में कुल संदिग्ध वित्तीय धोखाधड़ी की राशि को लेकर अंतिम आंकड़ा विस्तृत पुलिस जांच, फोरेंसिक जांच और वित्तीय ऑडिट के बाद ही स्पष्ट होने की बात कही गई है।अस्पताल ने साफ किया है कि फिलहाल सामने आई राशि और आरोप प्रारंभिक आंतरिक जांच एवं उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित हैं। वास्तविक नुकसान, घटना की पूरी प्रकृति और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
CCTV से लेकर सॉफ्टवेयर डेटा तक पुलिस को सौंपा
मामले को गंभीर बनाते हुए अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को कई महत्वपूर्ण डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही है। इनमें CCTV फुटेज, संदिग्ध बिलिंग से जुड़े रिकॉर्ड, मरीजों को दिए गए बिल और अस्पताल के वास्तविक बिल, बिलिंग सॉफ्टवेयर का डेटा, सॉफ्टवेयर में की गई गतिविधियों की जानकारी, ऑडिट रिपोर्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।
अस्पताल की ओर से इन साक्ष्यों को पेन ड्राइव के माध्यम से उपलब्ध कराने की बात कही गई है। पुलिस से डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए जरूरत पड़ने पर उनकी फोरेंसिक जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है।
यूजर आईडी, पासवर्ड और लॉग की भी होगी जांच
शिकायत में अस्पताल के बिलिंग सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर सिस्टम की तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है। इसके तहत सॉफ्टवेयर लॉग, यूजर आईडी, पासवर्ड, एक्सेस रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच करने का अनुरोध पुलिस से किया गया है।साथ ही मरीजों को उपलब्ध कराए गए बिलों का अस्पताल के मूल रिकॉर्ड से मिलान कराने, संबंधित बैंक खातों और लेन-देन की जांच करने तथा जरूरत पड़ने पर अस्पताल के कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने की मांग की गई है।
किसने कितना पैसा कमाया, पुलिस करेगी जांच
अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस से यह भी जांच करने का अनुरोध किया है कि कथित बिलिंग हेराफेरी से अस्पताल को वास्तविक रूप से कितनी आर्थिक क्षति हुई और कथित तौर पर गलत तरीके से प्राप्त धन या लाभ आखिर किन लोगों तक पहुंचा।शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी ।
फोरेंसिक जांच से खुलेगा पूरा खेल
पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया है।अब पुलिस जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कथित तौर पर बिलों में बदलाव कब और किस सिस्टम से किया गया, किस यूजर आईडी से रिकॉर्ड बदला गया, मरीजों को कौन-से बिल दिए गए और अस्पताल के सॉफ्टवेयर में कौन-सा वास्तविक डेटा मौजूद था।

