लालबियाक्तलुआंगा ख्यांग्ते का मास्टर खेल का खुला पोल: ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को बिना टेंडर बांटे काम, विरोध करने वाले परीक्षा नियंत्रक को हटाया, छापे के बाद इस्तीफा देकर सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव लेकर भागे थे पूर्व चेयरमैन–
–पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते की सरपरस्ती में फला-फूला भर्ती सिंडिकेट, सीआईडी जांच में सामने आई साक्ष्यों को खुरच कर मिटाने की साजिश…
राँची।राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष लालबियाकत्लुआंगा ख्यांग्ते की नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए राँची की विशेष अदालत (एजेसी-1 योगेश कुमार) ने जो 19 पन्नों का आदेश जारी किया है, वह सिर्फ एक अदालती फैसला नहीं बल्कि राज्य की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था के भीतर चल रहे संगठित आपराधिक सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा है। 1988 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी एल. ख्यांग्ते पर महज मूकदर्शक रहने का नहीं, बल्कि दागी एजेंसी को संरक्षण देने, नियमों की धज्जियां उड़ाने और जांच शुरू होते ही साक्ष्यों को डिजिटल रूप से नष्ट करने के गंभीर आरोप लगे हैं। सीआईडी की जांच रिपोर्ट और केस डायरी के मुताबिक, लखनऊ की एजेंसी मैसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (जेएससीसी) ने 20 मई 2025 को घोर लापरवाही और धोखाधड़ी के आरोप में 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद तत्कालीन चेयरमैन एल. ख्यांग्ते ने किसी खुली निविदा के बिना जून 2025 से जेपीएससी की अत्यंत गोपनीय और संवेदनशील परीक्षाओं का काम इसी दागी कंपनी को सौंप दिया। जब तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने टीडीपीएल की कार्यशैली और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई, तो चेयरमैन ख्यांग्ते ने एजेंसी की जांच कराने के बजाय उल्टे परीक्षा नियंत्रक किस्पोट्टा से ही परीक्षा से जुड़े सारे अधिकार छीन लिए। ख्यांग्ते के सीधे हस्तक्षेप से यह प्रभार उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को सौंप दिया गया। हद तो यह रही कि श्वेता कुमारी गुप्ता का तबादला दूसरे विभाग में हो जाने के बावजूद उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से आयोग में रोके रखा गया ताकि टीडीपीएल के साथ मिलकर संवेदनशील खेल को बेरोकटोक जारी रखा जा सके। जांच में आयोग के कर्मचारी मनोज तिर्की और सोनू कुमार की भूमिका भी इस षड्यंत्र में सामने आई है।
छापेमारी के बाद आनन-फानन में इस्तीफा, साक्ष्यों को खुरच कर मिटाने की कोशिश
केस डायरी के सबसे सनसनीखेज पन्ने ख्यांग्ते के उस आचरण को उजागर करते हैं जो 22 जुलाई 2026 को जेपीएससी दफ्तर पर सीआईडी के पहले छापे के बाद सामने आया। पुलिस की दबिश होते ही ख्यांग्ते ने तत्काल राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। आरोप है कि पद छोड़ते समय वह आयोग का आधिकारिक लैपटॉप और गोपनीय पेन-ड्राइव अपने साथ ले गए। जब सीआईडी ने जांच का शिकंजा कसा, तो इन उपकरणों को मरम्मत के बहाने भेजा गया। फोरेंसिक लैब की तकनीकी जांच में रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा हुआ लैपटॉप और पेन ड्राइव से केवल डेटा डिलीट ही नहीं किया गया था, बल्कि फाइलों को करप्ट करने और हार्डवेयर की स्टोरेज प्लेट्स को भौतिक रूप से खुरचने तक का प्रयास किया गया था ताकि डिजिटल साक्ष्य किसी भी हाल में रिकवर न हो सकें। अदालत ने इस बिंदु पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए माना कि यह आचरण सीधे तौर पर साक्ष्यों को नष्ट करने की सोची-समझी कोशिश को साबित करता है।
जेएसएससी-सीजीएल 2024 पेपर लीक कांड का भी अभियुक्त है अभय
सीआईडी के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सरगना टीडीपीएल का मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी था। नामकुम थाना में दर्ज जेएसएससी-सीजीएल 2024 पेपर लीक कांड (कांड संख्या 45/2024) का यह पुराना अभियुक्त आयोग के शीर्ष अधिकारियों की नाक के नीचे समानांतर व्यवस्था चला रहा था। हितों के गंभीर टकराव को दरकिनार करते हुए अभय तिवारी ने अपनी ही एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में खुद बैठकर फर्जी तरीके से सफलता हासिल की। उसने जेएसएससी-सीजीएल 2023 में पूरे राज्य में रैंक-2 हासिल कर ली। इसके अलावा पीजीटीटीसीई-2023, खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) लिखित परीक्षा-2023, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (एसीएफ पीटी, रोल नंबर 24300086) और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (एफआरओ पीटी, रोल नंबर 24400147) में भी खुद को पास करा लिया।
पीटी के 5 लाख, फाइनल सलेक्शन के 25 लाख व मूल डिग्रियों से ब्लैकमेलिंग
अभय तिवारी अपनी ऊंची रैंक और कथित रसूख का झांसा देकर राज्य भर के भोले-भाले व महत्वाकांक्षी अभ्यर्थियों को जाल में फंसाता था। सिंडिकेट का बाकायदा रेट कार्ड फिक्स था। प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 5 लाख रुपए। फाइनल सेलेक्शन में नाम दर्ज कराने के लिए 10 लाख से लेकर 25 लाख रुपए तक की खुली बोली थी। अभ्यर्थियों से वसूली की गारंटी पक्की करने और बाद में किसी भी बगावत को दबाने के लिए गिरोह उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक, हस्ताक्षरित सादे स्टांप पेपर और कोरे दस्तखतशुदा कागजात सिक्योरिटी के तौर पर पहले ही बंधक बना लेता था।
सीक्रेट सेल से बदला जाता था रिजल्ट, 500 से अधिक ओएमआर शीट्स में हेरफेर
जांच एजेंसी ने पाया कि टीडीपीएल के निदेशक समरपाल सिंह, रामबीर सिंह और कर्मी मो. उस्मान व मो. अवध के साथ मिलकर एक पूरी तरह अवैध और समानांतर ””सीक्रेट सेल”” चलाया जा रहा था। इस सेल के जरिए मूल उत्तर पुस्तिकाओं को आयोग और परीक्षा केंद्रों के सुरक्षित परिसरों से बाहर निकाला जाता था और मनचाहे अभ्यर्थियों से दोबारा उत्तर लिखवाए जाते थे। सीआईडी के अनुसार, अकेले फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मुख्य परीक्षा में 350 से अधिक ओएमआर शीट्स के साथ सीधे तौर पर छेड़छाड़ की गई। असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट परीक्षा में 150 से अधिक ओएमआर शीट्स को बदला या टेंपर किया गया। इतना ही नहीं, सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 की आधिकारिक आंसर-की जारी होने से पहले ही जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक ने 26 मई 2026 को अपने निजी व्हाट्सएप नंबर से टीडीपीएल कर्मी मो. उस्मान को भेज दी थी।

