JPSC परीक्षा धांधली मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य सरकार-JPSC-JSSC को नोटिस

राँची/नईदिल्ली।झारखण्ड की JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 और JSSC CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं व धांधली के मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई हुई।वहीं,सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखण्ड राज्य सरकार, JPSC और JSSC को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए बताया गया है कि 19 अप्रैल को आयोजित JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के संचालन और OMR/उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है और वे न्याय की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मामले की जांच CBI को सौंपने या किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई। हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूर्व न्यायाधीश को जांच की कमान सौंपने के सुझाव को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि किसी सेवानिवृत्त जज को जांच संभालने के लिए नहीं कहा जा सकता।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने झारखण्ड में न्यायिक भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य में न्यायिक भर्ती परीक्षाएं भी JPSC के माध्यम से आयोजित की जाती हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने सहमति जताते हुए जवाब दिया।
‘सिर्फ परीक्षा रद्द करने से सिस्टम में बदलाव नहीं आएगा’
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि महज परीक्षा रद्द कर देने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। याचिका में निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए मामले को राज्य पुलिस से CBI को ट्रांसफर करने की मांग की गई है।
याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के संचालन और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कथित गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। साथ ही परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष परीक्षा कराने की मांग की गई है। सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार, JPSC और JSSC को नोटिस जारी किया है।
याचिका के माध्यम से शीर्ष अदालत से गुहार लगाई गई है कि विवादित परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाकर नए सिरे से निष्पक्ष परीक्षा का आयोजन कराया जाए। इसके साथ ही अभ्यर्थियों के विश्वास को बहाल करने के लिए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, व्यापक और समयबद्ध सीबीआई जांच के आदेश देने की मांग भी की गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीनों प्रमुख पक्षों को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब राज्य सरकार और आयोगों को अदालत में अपनी सफाई देनी होगी, जिससे परेशान परीक्षार्थियों के बीच न्याय की एक नई उम्मीद जगी है।

