#हाय रे कोरोना:कैसे पॉजिटिव से नेगेटिव हो गया,कैसे परिवार के सदस्य पर असर पड़ा?एक भुक्तभोगी की दास्ताँ “हाय रे कोरोना”पूरा खबर जरूर पढ़ें:-

राँची।झारखण्ड में कोरोना का कहर जारी है हर दिन सैकड़ों मरीज मिल रहे हैं वहीं व्यवस्था की पोल भी खुल रहे है तो कहीं जांच गलत पता ,गलत मोबाइल नम्बर भी लोग दे रहे हैं।लेकिन सबसे बड़ी समस्या और लापरवाही जो सामने आ रही है कोरोना मरीज के जांच को लेकर और अगर जांच हो भी जाएगी तो रिपोर्ट क्या आएगा भगवान भरोसे है ऐसे ही एक हकीकत बयां किये हैं खुद सरकारी कर्मचारी ने जिन्होंने एक संदेश लिखे हैं।अपना नाम पता नहीं छापने की शर्त पर उन्होंने खबर आपतक पहुंचाने कहा है।उसका शीर्षक है ‘हाय रे कोरोना’ उनके द्वारा हूबहू कॉपी किये है एक बार पूरा जरूर पढ़ें।

” हाय रे करोना


करोना को सुनना और करोना को जीना यह दो अलग-अलग बातें है । इस करोना संक्रमण के दौर में मैंने अपने स्तर से जितनी सावधानियां लेनी थी, ली थी । मैं एक जिम्मेदार नागरिक हूं जिम्मेदार पिता हूं परंतु शायद कहीं चूक हो गई अचानक covid डिटेक्टेड आना मेरे विश्वास के परे था। मैं पूरी सावधानी रखता हूं यह कैसे हो सकता है ..,.,रिपोर्ट गलत होगा !!!!!!! शायद प्राइवेट लैब से करवाया हूं!!!! मेरा मनोबल अचानक मानो डगमगा गया ।
अब क्या होगा मेरा परिवार है, छोटे-छोटे बच्चे हैं पत्नी क्या कर पाएगी$$$$$$ कैसे संभालेंगे कौन अस्पताल ???क्या इलाज ???न जाने क्या क्या मन में चलने लगा। रोज टीवी में न्यूज़ में देखता और आज खुद में जीने का फर्क समझ में आया।
हिम्मत कर जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर में अपने covid पॉजिटिव आने की सूचना दी उन्होंने भी बहुत कुछ पूछा मुझे होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी एवं आगे की कार्यवाही का विश्वास दिलाया।
अपने मन को सशक्त करते हुए अपने को पूरे नियम के साथ होम आइसोलेशन में चला गया क्योंकि मैं पूरी तरीके से आसीइंटर्मेटिक केस था इसीलिए मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही थी परंतु मन के अंदर डर तो सता रहा था क्योंकि मैं परिवार का मुखिया था इसलिए हिम्मत दिखाते हुए पत्नी को सब ठीक हो जाएगा समझाता रहा, उसने भी हिम्मत दिखाई क्योंकि हम सभी करोना के बारे में इतना कुछ सुनें वह देखे हैं कि एक अनजाना सा डर मन में समा गया।
रात को एक अछूत की तरह अलग थाली गिलास में दो रोटी खाई, खुद से थाली को साफ कर बच्चों को दूर से गुड नाइट कर सोने चला गया।
पिछले लॉकडाउन में मैं अपनी कुछ आदतें बदली थी जैसे लिफ्ट यूज़ नहीं करना,एक्सरसाइज करना जल्दी सोने जाना एवं जल्दी सुबह उठना तब भी ना जाने क्यों यह मुझे हो गया !!!! यह मन में चल रहा था सोने के लिए बिस्तर पर तो गया पर शायद आधी रात आंख खोल कर गुजार दी !!!! नींद ही नहीं आई फिर पता नहीं कब नींद लगी और मैं सो गया
अगली सुबह उठते ही लगा गला खसखस कर रहा है नहीं नहीं बुखार भी है !!!!!! मैं डरा हुआ था परंतु ऐसा कुछ भी नहीं था। सबको पता चल गया उनकी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं थी इन्हें अस्पताल जाना चाहिए##### हमारे ही सोसाइटी में क्यो हुआ????? और न जाने क्या-क्या ??? क्योंकि मैं आइसोलेशन में था इसलिए पता भी नहीं चला कि कौन क्या बोला है खैर मैंने अपने ऑफिस को खबर की मेल लिखा फोन किया पुनः शांत होकर अपने भाई को इसकी जानकारी दी।
एक बार हम सभी फिर परेशान आगे क्या करना है help लाइन में तो कोई सुझाव नहीं दिया शहर के सभी सरकारी अस्पताल कोविड के रोगियों से भरे हैं और कोई जगह खाली नहीं है परिचय निकालते हुए संबंधित ब्लाक के सीईओ से बात की उन्होंने मेरे घर को सील करने की बात कही तब तक मुंसिपल ऑफिस से फ्लैट सैनिटाइजेसन का काम शुरू हो गया लगा, कुछ बड़ा हो रहा है जैसे कोरोना के शुरुआती दौर में हम लोग देखते थे कि एक case निकला और पूरी व्यवस्था उस एरिया में लग गई ।
मेरा बेटा बेटी जब मैं रूम खोलता तू दूर से मुझे ऐसे देखता मानो कोई घर आने पर दरवाजे पर अपनी मम्मी के पीछे खड़ा हो देखता हो।
अब जिस से मैं डरता था कि पता नही कि मेरे अपार्टमेंट के लोग मेरे होम आइसोलेशन में रहने का सपोर्ट करेंगे या नहीं परंतु बहुत से लोगों ने मुझे फोन कर ढाढस बंधाया और हिम्मत दी कि आप होम आइसोलेशन में रहे “हम आपके साथ हैं ” समाज का यह पक्ष भी दिखा जहां प्रत्येक दिन न्यूज़ में आ रहा था की किस प्रकार लोगों ने पॉजिटिव आए व्यक्ति का तिरस्कार किया परंतु शायद समाज के यही कुछ अच्छे लोग हैं जिन्होंने मानवता को जिंदा रखा है।
मेरी संक्रमित होने की खबर आग की तरह फैली। दोस्त,पड़ोसी का फोन आना बंद ही नहीं हो रहा था मानो कुछ विशेष दर्जा पा लिया क्योंकि मैं स्वस्थ था इसलिए मुझे बड़ा अजीब लग रहा था । व्हाट्सएप पर गेट वेल सून, स्पीडी रिकवरी और फूल के मैसेजेस इतने आ रहे थे जितना होली और दशहरा में आते हैं। एक समय लगा नहीं मेरे चाहने वाले बहुत है । समय के साथ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने मेरे घर पर होम कोरनटाइन का पर्चा चिपका दिया एवं फ्लैट के बाहर से बैरिकेडिटग कर दी, परंतु जिसकी सबसे ज्यादा मुझे और मेरे परिवार को आवश्यकता थी कि कोई डॉक्टर का विजिट हो या फोन ही आए पता तो चले कितनी गंभीर स्थिति है####### क्या दवा ????? क्या इतिहात;;;; वही नहीं है । दूसरा दिन भी गुजर गया भाई ने ऑक्सीमीटर और सभी आवश्यक सामान भिजवा दिए
रात को खाना खाने के बाद दवा ली दवा मेरे एक जाने वाले डॉक्टर साहब ने मेरे मित्रों की मदद से लिखा था रात को अचानक बेचैनी होने लगी उठ कर बैठा किसको बुलाता पत्नी को और चिंता हो जाती तो इधर उधर टहलता रहा। लगा ऑक्सीजन कम हो रहा है डरा डरा सा था परंतु कुछ भी नहीं हुआ।
सोशल मीडिया में इतनी चीजें देखते हैं कि ना जानने वाली चीज भी समझ लेते हैं और एक अनजाना सा डर अपने मन में बना लेते हैं सोशल मीडिया न जाने कितना कुछ बतलाता है कोरोना की इलाज से संबंधित इतनी वीडियोस दोस्तों ने भेजें मानो सारा ज्ञान अगले के पास ही है, परंतु सोशल मीडिया का एक पहलू यह भी था कि मैं सभी से कनेक्टेड रहा । टाइम का पता नहीं चला मेरे कमरे में टीवी नहीं था केवल लैपटॉप, मोबाइल से दिन गुजारता। अगला दिन भी कोई मेडिकल प्रोफेशनल नहीं आया।
मुझे अब मुझसे ज्यादा मेरे परिवार की चिंता थी। apartment में लोग पूछते परिवार को कुछ symptoms तो नहीं $$$$$ सब ठीक है ना मैंने एक बार हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया जानकारी ली परंतु सब बेकार मैं भी राज्य स्तर से कई ऐसे हेल्पलाइन का काम देखा हूं फोन में पूछने वाला अपनी ड्यूटी करता है और बड़ी ईमानदारी से करता है परंतु उसे अगला एक क्लाइंट ही देखता है यह एक अंतर है। लगा कुछ नहीं हो सकता है पैरवी लगाई शायद सुन ले !!! परिचित से अपरिचित तक सबसे बुलवाया पर कुछ नहीं हुआ भगवान का शुक्र था कि मैं और मेरा परिवार स्वस्थ थे समय गुजरता चला गया मुंसिपल ऑफिस से प्रत्येक दिन सैनिटाइजेशन करने वाला जरूर आता, परंतु जो एक मरीज को अति आवश्यक था ###डॉक्टर का संपर्क वही नहीं हो सका था एक दिन 2 दिन और निकल गए मेरी पत्नी ने मुख्यमंत्री कोषांग में शिकायत कर दी बहुत ही क्विक रिस्पांस हुआ !! मेरी पत्नी के फोन पर फोन आया मुझे भी फोन आया पर “ढाक के तीन पात ” कुछ नहीं हुआ पता चला कि मेरा आईआर रिपोर्ट (कांटेक्ट रेसिंग रिपोर्ट) थाना से नहीं मिला है मैंने कहा मुझे कैसे पता किसी ने मुझे तो फोन भी नहीं किया।।। फिर मैंने अपनी जुगाड़ नीति से संबंधित अधिकारी को कनेक्ट किया और रिपोर्ट लिखने का रिक्वेस्ट किया उन्होंने भी बड़ी तत्परता दिखाई रात के 11:00 बजे सब इंस्पेक्टर मेरा रिपोर्ट लिखा मैं पिछले 15 दिन पूर्व ऑफिस गया था अपनी कलीग का नाम फोन नंबर लिखवाया उन्होंने मेरा रिपोर्ट जिला में जमा करने का आश्वासन देकर खत्म कर दी। मुझे लगा चलो अब डॉक्टर की टीम मेरा या मेरे परिवार का खैरियत पूछेगी 1 दिन और बीत गया कोई कुछ भी नहीं पूछा जानने वालों ने और ऊपर से पैरवी की तो पता चला कि मेरा सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म नहीं जमा हुआ है मुझे ऐसा लगा कि मुझे Corona पॉजिटिव नहीं हुआ बल्कि मैं किसी कॉलेज का एडमिशन दे रहा हूं जहां मैंने यह-2 कागज जमा नहीं किया है। अजीब सी व्यवस्था है एक व्यक्ति जो पॉजिटिव हुआ है एवं जागरूक है उसे चिकित्सक मदद न मिलकर कागजी कार्रवाई की जा रही है चलो बड़ी मशक्कत के बाद 1 दिन और बीत जाने के पश्चात सेल्फ डिक्लेरेशन फॉम मंगवाया, फिल किया और संबंधित पदाधिकारी को भेज दिया अब आश्वस्त हुआ की सारी सरकारी प्रक्रिया मैंने पूरी कर दी है इस बीच पैरवी करने के पश्चात एक डॉक्टर मैडम का फोन आया मेरा हाल चाल जानी और यह पूछा कोई तकलीफ तो नहीं हो रही है आपको अभी अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे फोन कीजिएगा मैंने बड़े विनम्र होकर कहा मैडम “मेरा टेस्ट भी है” कृपा करके करवा दीजिए उन्होंने कहा हां मैंने ऊपर कह दिया है अगले दिन दोपहर एक नए नंबर से फोन आता है मैं थाना से बोल रहा हूं आपका आई आर रिपोर्ट पेंडिंग है मेरे गुस्सा मानो फट पड़ा मैंने कहा मैं तो अपनी रिपोर्ट लिखा दिया हूं उसने कहा सर कृपया करके मुझे फिर से लिखा दीजिए मुझे अभी 12:00 बजे तक यह रिपोर्ट जिला को जमा करनी है मैंने अपने गुस्से पर कंट्रोल किया और कहा मैंने पहले जीसे लिखवाया था उसका फोन नंबर आपको देता हूं आप उनसे बात कर ले उन्होंने कहा ठीक है थोड़ी देर बाद मैंने फिर से फोन कर कंफर्म किया कि उसे मेरा रिपोर्ट मिला या नहीं मिला । आईआर रिपोर्ट कि उन्हें इतनी चिंता थी उनमें से किसी भी लोग को न तो किसी ने संपर्क किया और ना ही कोई जांच हुई। हाय रे करोना,।।। सुबह-सुबह पेपर में सिविल सर्जन महोदय का नंबर देखा, योगा करने के बाद मैंने फोन लगा दिया:::: संयोग से उन्होंने फोन भी उठा लिया मैंने अपना परिचय देते हुए उन से जांच कराने की आग्रह किया उन्होंने कहा आपने सेल्फ एसेसमेंट फॉर्म भरा है मैंने कहा सर ।।।
उन्होंने कहा देखता हूं लगा चलो शायद अब हो जाएगा। उसी दिन व्हाट्सएप पर मैंने अपनी सारी जानकारियां उनसे शेयर की एक मित्र ने कहा आज करवा देते हैं लगा चलो जो करवा दे । एक बेबस आदमी की मदद कोई कर दे पर कर दे ।
मेरे एक रिश्तेदार ने थोड़ी और भारी-भरकम असरदार पैरवी लगाई तब जाकर 12 दिन के पश्चात किसी सज्जन का फोन आया सर आप अपना पता बता दे मैं आपका सैंपल लेने आ रहा हूं मैंने उसे अपना पता बताया मैं और मेरे परिवार के लोग बड़े उत्सुक थे कि चलो आज टेस्ट हो जाएगा सैंपल जाने के बाद एक अलग से टेंशन में क्या होगा$$$$ पॉजिटिव या नेगेटिव &&&&&&इस बार तो परिवार के सभी लोगों का सैंपल लिया है@@@@@@ कहीं गलती से भी ना ::::: ना नेगेटिव ही होगा।
2 दिन बीत गए कोई मैसेज नहीं आया दिन भर फोन चेक करता रहा शायद मैसेज आया हो पर अगला दिन भी निकल गया फिर जुगाड़ टेक्नोलॉजी लगाई पैरवी भी लगाया संबंधित विभाग के मित्रों से रिक्वेस्ट किया पता करें कि मेरा रिपोर्ट कहां अटका पड़ा है क्योंकि मेरा टेस्ट जिला अस्पताल से हुआ था वही के लोगों ने कहा सर जैसे आएगा आपको रिपोर्ट बतला देंगे। अगला दिन उसका फोन आता है सर आपका सैंपल यहां से मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया है और उसे ट्रेस करने में थोड़ी दिक्कत हो रही है जैसे पता चलता है वैसे ही बताते हैं सर।।। मानो करोना मेरे से ही बदला निकाल रही हो अब क्या करें दो तीन लोगों को अपना सैंपल कलेक्शन का रिकॉर्ड भेजा ताकि कोई मेडिकल कॉलेज से पता कर सके संयोग से मेरा एक मित्र का दोस्त मेडिकल कॉलेज के उसी डिपार्टमेंट में काम करता था उससे उसने रिक्वेस्ट की तो उसने अपनी दोस्ती दिखाते हुए पता कर बताया कि टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव मेरे दोस्त ने मुझे फोन कर या खुशखबरी सुनाई।।। सुनते ही मैं रो पड़ा पता नहीं क्यों पर आंसू निकल पड़े पत्नी भी रोई।।
चलो सब मिलकर इस समय भगवान को धन्यवाद दिए और मन की शांति पाई कि हम सभी स्वस्थ हैं।
समस्या का समाधान तो हो गया पर रिपोर्ट की कॉपी मिली नहीं कैसे किसी को बताए ऑफिशियल भी होना चाहिए फिर दोस्त को बोला s.m.s. तो करवा दो दोस्त बोला यह उसके बस में नहीं ।।। जुगाड़ टेक्नोलॉजी लगाई बड़ी मशक्कत के बाद रिपोर्ट का कॉपी भी मिला पॉजिटिव नेगेटिव हो चुका था इस जंग में मै जीत चुका था मैं अपने इस जीत का पूरा श्रेय अपनी पत्नी भैया भाभी को देता हूं जिनका प्यार मुझे मानसिक रूप से मजबूत किया इस जीत का बड़ा हिस्सा मेरे अपार्टमेंट के लोगों का भी है जिन्होंने मुझे अनकंडीशनल सपोर्ट किया मेरे परिवार के रिश्तेदार जो मुझे प्रत्येक दो 2 घंटे पर फोन कर मेरा हिम्मत बढ़ाते सभी दोस्त जिन्होंने हर पल इसमें विजय पाने की बात कही सच में विपत्ति आने पर ही अपनों की अहमियत समझ आती है इस प्रकार मैं करोना की जंग जीत सका । मैं आशा करता हूं की सरकार आने वाले दिनों में लोगों की तकलीफों को समझेगी और अपना बेहतरीन देने का प्रयत्न करेंगे इस संदर्भ में मैंने कुछ सुझाव भी दिए हैं जो अगर सरकार चाहे तो अपनी व्यवस्था को और मजबूत करने में उपयोग में ला सकती है धन्यवाद ।