पलामू में पशु तस्करी का बड़ा खुलासा, कंटेनर से 42 मवेशी बरामद, 3 तस्कर गिरफ्तार

-दम घुटने से एक भैंस की मौत, 41 मवेशियों को बचाया गया; यूपी-झारखंड नेटवर्क का खुलासा, दो मास्टरमाइंड की तलाश तेज
पलामू।झारखण्ड के पलामू जिले में तड़के सन्नाटे के बीच एनएच-98 पर दौड़ रहे एक कंटेनर में बेजुबानों की दर्दभरी चीखें कैद थीं। नावाबाजार थाना पुलिस ने गुप्त सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 42 मवेशियों से भरे कंटेनर को पकड़ लिया और अंतरराज्यीय पशु तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। इस दौरान तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार,शनिवार अहले सुबह करीब 3:10 बजे पुलिस ने नवाबाजार थाना के सामने चेक पोस्ट लगाकर संदिग्ध कंटेनर (BR24 GC 3133) को रोका। वाहन रुकते ही दो लोग कूदकर भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर एक को दबोच लिया, जबकि दूसरा फरार हो गया। कंटेनर की तलाशी में जो तस्वीर सामने आई, उसने पुलिसकर्मियों को भी झकझोर दिया।
कंटेनर के अंदर 29 भैंस और 13 भैंसे ठूंस-ठूंसकर भरे गए थे। हवा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण एक भैंस की दम घुटने से मौत हो चुकी थी, जबकि बाकी 41 मवेशियों को सुरक्षित बाहर निकालकर चारा-पानी उपलब्ध कराया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इमरान (इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश), मंसब अंसारी और सफीक अंसारी (रंका, गढ़वा) के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि मवेशियों को गढ़वा से बिहार के बारून ले जाया जा रहा था, जहां उन्हें अवैध बाजार में बेचा जाना था।
पूछताछ में पुलिस के सामने पूरे तस्करी नेटवर्क की परतें खुल गईं। जांच में सामने आया कि इस अवैध कारोबार के पीछे गढ़वा के रंका थाना क्षेत्र के जगीउल्लाह और अधर हुसैन कथित तौर पर मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। आरोप है कि दोनों के इशारे पर मवेशियों को इकट्ठा कर बिहार समेत अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाता था।
पुलिस ने इस मामले में पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। तीनों गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि फरार आरोपी और कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।
नावाबाजार पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के दिनों में पशु तस्करी के खिलाफ सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। अब पुलिस को पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

