राँची में तिरंगा यात्रा में दिखी छात्रों की ताकत, भर्ती परीक्षाओं की कथित गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन जारी

–स्वतंत्रता दिवस पर निकली विशाल तिरंगा यात्रा, व्हील चेयर पर पहुंचे दो अनशनकारी छात्र-छात्रा,अस्पताल में देवेंद्र नाथ महतो से पुलिस ने की धक्का-मुक्की

राँची।झारखण्ड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन स्वतंत्रता दिवस के दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी छात्रों ने 15 अगस्त को राँची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर में ध्वजारोहण किया और इसके बाद शहर में विशाल तिरंगा यात्रा निकाली। बड़ी संख्या में छात्र हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल हुए और पूरे रास्ते देशभक्ति के नारे लगाते रहे।तिरंगा मार्च में शामिल छात्रों ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं जैसे जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल में पारदर्शिता होना जरूरी है।साथ ही जो परीक्षा में धांधली हुई है उसकी जांच सीबीआई से होना चाहिए। वहीं आंदोलन कमजोर होने के सवाल पर कहा कि जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी आंदोलन जारी रहेगा।तिरंगा यात्रा में अनशन कर रहे एक छात्र और छात्रा भी व्हीलचेयर पर शामिल हुए।अनशन कर रहे छात्रों को उम्मीद है कि सरकार उनलोगों की बातों को जरूर मानेगी।इस दौरान आंदोलन स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो को लेकर भी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।

जयपाल सिंह स्टेडियम से निकली तिरंगा यात्रा
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्र सुबह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे। यहां तिरंगा फहराने के बाद छात्रों ने तिरंगा यात्रा शुरू की। यात्रा जयपाल सिंह स्टेडियम से निकलकर कचहरी चौक, न्यूक्लियस मॉल, जेल चौक और लालपुर चौक होते हुए अल्बर्ट एक्का चौक पहुंची।यात्रा के दौरान हजारों छात्र हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ते रहे और भारत माता की जय के नारे लगाते रहे। अल्बर्ट एक्का चौक पर पहुंचने के बाद छात्रों ने सामूहिक रूप से भारत माता की जय का उद्घोष किया। इसके बाद यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए वापस जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंची, जहां इसका समापन किया गया।छात्रों ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा निकालने का उद्देश्य देशभक्ति, लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्रों की एकजुटता का संदेश देना है।

आंदोलन का आज 22वां दिन
यह आंदोलन अब तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है। 15 अगस्त को उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक राँची में छात्रों के आंदोलन का 22वां दिन था। छात्र JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पारदर्शिता की कमी और भर्ती प्रक्रिया की जांच की मांग को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं।आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर उठे सवालों की स्वतंत्र जांच, कथित अनियमितताओं की CBI जांच तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने अभ्यर्थियों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था पर उनके भरोसे को प्रभावित किया है।

विधानसभा घेराव के बाद भी जारी है आंदोलन
आंदोलनकारी छात्र पहले भी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च कर चुके हैं। 10 अगस्त को विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। पुलिस ने बैरिकेडिंग के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की भी खबर सामने आई थी।इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन और अधिक राजनीतिक एवं प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है।


देवेंद्र नाथ महतो को लेकर अस्पताल में विवाद
इसी बीच स्वतंत्रता दिवस के दिन आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो को लेकर राँची सदर अस्पताल में विवाद की स्थिति बन गई।देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें राँची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आयोजित ध्वजारोहण और तिरंगा यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से इसके लिए अनुमति भी मांगी थी।बताया गया कि अस्पताल से बाहर निकलकर कार्यक्रम में शामिल होने की कोशिश के दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ उनकी धक्का-मुक्की हो गई। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं।


स्ट्रेचर पर तिरंगा यात्रा में शामिल होने की कोशिश
घटना से जुड़े वीडियो में देवेंद्र नाथ महतो को अस्पताल से बाहर निकलने की कोशिश करते देखा जा रहा है। उनके आसपास पुलिसकर्मी और समर्थक मौजूद दिखाई देते हैं। इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बनती नजर आती है बताया गया है कि महतो को स्ट्रेचर के जरिए बाहर ले जाने की कोशिश की गई। बाद में उन्हें तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोक दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अस्पताल परिसर में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।
महतो ने आरोप लगाया है कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया और धक्का-मुक्की में उनके सीने में चोट लगी। उन्होंने बताया कि घटना के बाद उनका इलाज और चिकित्सकीय जांच जारी है।हालांकि, पुलिस-प्रशासन की ओर से घटना के सभी आरोपों और धक्का-मुक्की के संबंध में विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

समर्थकों ने लगाए गंभीर आरोप
देवेंद्र नाथ महतो के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर अस्पताल में रोका गया और स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। समर्थकों का कहना है कि महतो आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों के साथ तिरंगा यात्रा में शामिल होना चाहते थे।दूसरी ओर, अस्पताल में भर्ती एक अनशनकारी के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर प्रशासन की ओर से एहतियाती कदम उठाए जाने की बात भी सामने आई है। इस पूरे मामले में अब सवाल यह है कि अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति किस आधार पर रोकी गई और पुलिस की तैनाती का आदेश किस स्तर से दिया गया था।
इधर,छात्र आंदोलन की एक बड़ी मांग JSSC-CGL से जुड़ी है। यहां आंदोलनकारियों और सरकार के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।सरकार ने कुछ JPSC परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है, लेकिन JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की छात्रों की मांग स्वीकार नहीं की है। सरकार का तर्क बताया गया है कि CGL परीक्षा न्यायालय के निर्देशों के तहत हुई और उसके परिणाम के आधार पर नियुक्तियां भी की जा चुकी हैं।
झारखण्ड सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक JSSC-CGL 2023 के माध्यम से 1,910 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। सरकार ने उस समय परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अदालत के समक्ष पारदर्शिता बरतने की बात कही थी।
यही मुद्दा आंदोलन को जटिल बना रहा है—छात्र जहां पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर कायम हैं, वहीं सरकार पहले से हो चुकी नियुक्तियों और न्यायिक प्रक्रिया का हवाला दे रही है।
सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कही
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भरोसे से जुड़े मुद्दे पर बात की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल की परीक्षा संबंधी घटनाओं से युवाओं का परीक्षा व्यवस्था और शासन पर विश्वास प्रभावित हुआ है और सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने युवाओं से धैर्य बनाए रखने और निष्पक्ष न्याय का भरोसा दिलाया।सरकार पहले भी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देती रही है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक रिकॉर्ड में JSSC परीक्षा से जुड़े विवादों की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात दर्ज है।
आंदोलन के अगले चरण पर सबकी नजर
स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा के बावजूद छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र अभी भी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। आंदोलन के दौरान बारिश, खुले मैदान में रहने और लंबे समय तक धरना देने की परिस्थितियों के बीच भी छात्रों के प्रदर्शन जारी रहने की रिपोर्टें सामने आती रही हैं।
अब देवेंद्र नाथ महतो और पुलिस के बीच अस्पताल में हुई कथित धक्का-मुक्की ने आंदोलन को नया मुद्दा दे दिया है। एक तरफ छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन के सामने आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।
स्वतंत्रता दिवस के दिन निकली तिरंगा यात्रा ने इस आंदोलन के एक अलग पक्ष को भी सामने रखा—नौकरी और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों के साथ छात्रों ने राष्ट्रीय पर्व को अपने आंदोलन से जोड़ते हुए देशभक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों का संदेश देने की कोशिश की।अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेता है।

