राँची के सिरमटोली ट्रैफिक पोस्ट में शर्मनाक हरकत का आरोप, नाबालिग लड़के से एएसआई ने की अप्राकृतिक संबंध की मांग
राँची। जिस खाकी वर्दी पर आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उसी वर्दी में तैनात एक पुलिसकर्मी पर बेहद शर्मनाक आरोप लगा है। राजधानी राँची के सिरमटोली स्थित ट्रैफिक पोस्ट में एक एएसआई पर नाबालिग लड़के से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने की मांग करने का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामले में रोके गए लड़के को संबंधित एएसआई पोस्ट के अंदर ले गया और वहां उससे कथित तौर पर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने की मांग की। नाबालिग ने इसका विरोध किया और किसी तरह वहां से निकलकर अपनी जान बचाई।
ट्रैफिक पोस्ट के अंदर हुई कथित शर्मनाक हरकत
सूत्रों के अनुसार, मामला चुटिया थाना क्षेत्र के सिरमटोली स्थित ट्रैफिक पोस्ट का है। एक नाबालिग (17) लड़के को ट्रैफिक पुलिस ने रोका था। इसी दौरान वहां तैनात एएसआई उसे ट्रैफिक पोस्ट के अंदर ले गया। आरोप है कि अंदर पहुंचने के बाद पुलिस पदाधिकारी ने नाबालिग का गुप्तांग पकड़ लिया और कहा उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाओ। इस अप्रत्याशित स्थिति से घबराए लड़के ने इसका विरोध किया और किसी तरह वहां से बाहर निकलने में सफल रहा।
परिजनों को बताई आपबीती, विधायक ने अधिकारियों तक पहुंचाया मामला
पोस्ट से निकलने के बाद नाबालिग ने अपने परिजनों को पूरी घटना बताई। परिजनों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार के एक विधायक से संपर्क किया। विधायक ने राँची पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। जैसे ही मामला वरीय पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
देर रात तक ट्रैफिक थाना में चली कार्रवाई
सूत्रों की मानें तो मामले की जानकारी मिलने के बाद देर रात तक पुलिस अधिकारियों की आवाजाही जारी रही। एसपी, डीएसपी समेत कई पुलिस पदाधिकारी ट्रैफिक थाना पहुंचे। मामले को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत और कार्रवाई का दौर चला। सूत्रों के अनुसार, संबंधित एएसआई को तत्काल निलंबित करने और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने पर सहमति बनी। निलंबन आदेश पीड़ित पक्ष को उपलब्ध कराए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
सिर्फ निलंबन नहीं, निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई जरूरी
यह घटना पुलिसिंग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर सुरक्षा और कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी निभाने वाला पुलिसकर्मी ही किसी नाबालिग से इस तरह की मांग करता है, तो आम नागरिक आखिर किससे सुरक्षा की उम्मीद करेगा? ऐसे गंभीर आरोपों में केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। मामले की निष्पक्ष जांच, नाबालिग का बयान, उपलब्ध साक्ष्यों का संरक्षण और कानून के तहत उचित कार्रवाई जरूरी है।इस तरह मामले को वरीय अधिकारियों को समझौते कर छोड़ना भी पीड़ित के लिए न्याय नहीं हैं।
खाकी की साख का सवाल
यह मामला किसी एक पुलिसकर्मी पर लगे आरोप से आगे बढ़कर पूरे पुलिस विभाग की जवाबदेही से जुड़ा है। पुलिस की वर्दी अधिकार का प्रतीक जरूर है, लेकिन यह अधिकार जनता की सुरक्षा और सेवा के लिए है। ऐसे गंभीर आरोपों पर त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई ही पुलिस व्यवस्था पर जनता का भरोसा कायम रख सकती है।

