ब्रजेश के बाद TSPC में नेतृत्व का संकट, 10 लाख का इनामी शशिकांत सबसे बड़ा चेहरा; पुलिस-एजेंसियों की बढ़ी नजर
राँची। वाराणसी में टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के सामने अब नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है। ब्रजेश के बाद संगठन के प्रमुख सक्रिय चेहरों में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल निवासी 10 लाख के इनामी शशिकांत गंझू का नाम सबसे प्रमुखता से सामने आ रहा है। हालांकि, उसके औपचारिक रूप से सुप्रीमो बनाए जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, ब्रजेश गंझू की मौत के बाद शशिकांत संगठन के बचे हुए प्रमुख कमांडरों में सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा है। झारखण्ड सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। वह एनआईए के मामलों में भी वांटेड बताया जाता है।शशिकांत का प्रभाव क्षेत्र मुख्य रूप से पलामू और चतरा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग समेत अन्य क्षेत्रों में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। एक रिपोर्ट में उसके खिलाफ 50 से अधिक मामलों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, शशिकांत 2000 के दशक में माओवादी संगठन से जुड़ा था और बाद में ब्रजेश गंझू के संपर्क में आने के बाद टीएसपीसी में शामिल हुआ। इसके बाद वह संगठन के लिए पलामू-चतरा इलाके में सक्रिय रहा और धीरे-धीरे प्रमुख कमांडरों में शामिल हो गया।
पुलिस के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 2010 के बाद शशिकांत की सुरक्षा बलों के साथ कई बार मुठभेड़ हुई, लेकिन वह बच निकलने में सफल रहा। सितंबर 2025 में मनातू के केदल इलाके में भी पुलिस और उसके दस्ते के बीच मुठभेड़ हुई थी।
अब ब्रजेश गंझू के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर शशिकांत और टीएसपीसी के बचे हुए नेटवर्क पर टिक गई है। संगठन की कमान वास्तव में किसके हाथ जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

