CGL घोटाला: नौकरी के लिए जमीन गिरवी, 5.50 लाख में बिका सिस्टम! पटना के फ्लैट में 30 अभ्यर्थियों को रटाई गई आंसर-की, नेपाल-बंगाल में माफिया के सेफ हाउस

 

राँची।जेएसएससी सीजीएल परीक्षा 2023 के कथित पेपर लीक मामले में सीआईडी की विशेष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। राँची के अपर न्यायिक आयुक्त योगेश कुमार की अदालत ने अभियुक्त राम कृष्ण कुमार सिंह और एक अन्य आरोपी रितेश कुमार सिंह की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि संगठित पेपर लीक गिरोह हजारों ईमानदार और मेधावी युवाओं के भविष्य और मेरिट का हनन हैं। ऐसे मामलों में केवल जेल में बिताई गई अवधि या पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास न होने की दलील पर रियायत नहीं दी जा सकती। कोर्ट के इस 14 पन्नों के आदेश ने सीआईडी जांच के उन सनसनीखेज पन्नों को बेनकाब कर दिया है, जिससे साफ होता है कि यह पेपर लीक कोई स्थानीय चूक नहीं, बल्कि नेपाल के बीरगंज से लेकर पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर, आसनसोल, बोकारो और पटना तक फैला अंतरराज्यीय सिंडिकेट था।

नौकरी के लिए गिरवी रखी जमीन, 5.50 लाख दिए तब छूटे ओरिजिनल सर्टिफिकेट

सीआईडी की जांच डायरी में दर्ज तथ्यों के मुताबिक, सिंडिकेट अभ्यर्थियों को फंसाने के लिए शातिराना जाल बुनता था। कैंडिडेट राम कृष्ण कुमार सिंह ने नौकरी के सौदे के लिए अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी। सौदे की गारंटी के तौर पर गिरोह ने उसके तमाम मूल शैक्षणिक दस्तावेज (ओरिजिनल सर्टिफिकेट) अपने कब्जे में रख लिए थे। गवाह राहुल कुमार के बयान के अनुसार, जब रिजल्ट के बाद 25 दिसंबर 2024 को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की बारी आई, तो अभियुक्त अपने दोस्त के साथ पटना भागा। वहां बिचौलिए संजय साव (संजय कुमार) को 5,50,000 की मोटी नकदी थमाई गई, तब जाकर बंधक बने सर्टिफिकेट वापस मिले। बिचौलिया खुद अपनी निगरानी में कैंडिडेट को लेकर रांची आया ताकि राजफाश न हो सके।

पटना के फ्लैट में 30 लड़कों को 3 सेटों में बांटे गए थे लीक पेपर

सीआईडी ने अदालत में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल टावर लोकेशन पेश कर साबित किया कि परीक्षा से ठीक पहले 20 और 21 सितंबर 2024 को आरोपी पटना में मौजूद था। जांच में खुलासा हुआ कि पटना के एक गुप्त अपार्टमेंट में परीक्षा की पूर्व संध्या पर 25 से 30 चुनिंदा अभ्यर्थियों को बंधक जैसी स्थिति में इकट्ठा किया गया था। वहां उन्हें प्रश्न-पत्र और उनकी उत्तर कुंजी (आंसर की) तीन सेटों में बांटी गई और रातभर बैठाकर रटवाई गई। अभियुक्त राम कृष्ण कुमार सिंह कथित तौर पर मिथिलेश सिंह उर्फ आर.के. सिंह और इस व्यवस्था में शामिल अन्य व्यक्तियों के संपर्क में था। सीआईडी की जांच में पता चला कि मिथिलेश सिंह कथित तौर पर प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी की आपूर्ति करता था, जबकि विभिन्न बिचौलियों को अभ्यर्थियों की व्यवस्था करने, आवास उपलब्ध कराने, उनकी आवाजाही का समन्वय करने और धन इकट्ठा करने का काम सौंपा गया था।

सरकार ने बंद कर रखा था इंटरनेट, उधर सेटर क्वार्टरों व सेफ हाउसों में रटवा रहे थे पर्चा

सीआईडी के अनुसार परीक्षा के दौरान राज्य सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए पूरे झारखंड का इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया था। सरकार को भरोसा था कि नेट बंद होने से न तो व्हाट्सएप पर पर्चा घूमेगा और न ही टेलीग्राम पर प्रश्न तैरेंगे। लेकिन सेटरों का सिंडिकेट सिस्टम से दो कदम आगे निकला। सरकार जब मोबाइल टावरों के सिग्नल जाम कर पीठ थपथपा रही थी, तब पेपर लीक माफिया ने ऑफलाइन पाठशाला का ऐसा नेटवर्क खड़ा कर रखा था, जिसकी भनक परीक्षा खत्म होने तक किसी को नहीं लगी। सिडिंकेट ने अभ्यर्थियों को परीक्षा से दो-तीन दिन पहले जुटाने के लिए आधा दर्जन ठिकाने बनाए गए थे। नेपाल के बीरगंज में राज्य पुलिस की पहुंच से दूर अभ्यर्थियों को ले जाकर पेपर रटवाने का सुरक्षित अड्डा बनाया गया था। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के आसनसोल व दुर्गापुर के नियामतपुर के एक मैरिज हॉल और होटल में अभ्यर्थियों का जमावड़ा हुआ था। झारखंड व बिहार में बोकारो, पटना, मुजफ्फरपुर में स्थानीय एजेंटों के जरिए कैंडिडेट जुटाने और कैश डिलीवरी के केंद्र बना था।

मास्टरमाइंड मिथिलेश सिंह के साथ मिलकर तैयार किया था नेटवर्क

सीआईडी अनुसंधान के मुताबिक, आरोपी रितेश कुमार सिंह भी कोई साधारण परीक्षार्थी नहीं, बल्कि सिंडिकेट का सक्रिय कैंडिडेट अरेंजर था। 20 सितंबर 2024 को—यानी परीक्षा से ठीक एक दिन पहले—बोकारो के दुग्दा स्थित एक क्वार्टर में 20 से 22 अभ्यर्थियों को गोपनीय तरीके से जुटाया गया था। वहां मुख्य सरगना मिथिलेश सिंह उर्फ आर के सिंह द्वारा उपलब्ध कराए गए 21 व 22 सितंबर की परीक्षा के हूबहू प्रश्नपत्र और उनकी उत्तर कुंजियां (आंसर-की) इन अभ्यर्थियों को रटवाई गई थीं। उत्तर रटने के बाद ही इन्हें सीधे परीक्षा केंद्रों पर भेजा गया। केस डायरी के मुताबिक, प्रति अभ्यर्थी भारी-भरकम राशि तय की गई थी। एडवांस पेमेंट ली गई और बाकी रकम परीक्षा व परिणाम आने के बाद वसूली गई। बैंक खातों के लेन-देन और सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स) में इसके पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

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