55.59 लाख की बैंक गारंटी निकली फर्जी, सिल्क मिशन में काम लेने की कोशिश, भोपाल की फर्म और पदाधिकारियों पर प्राथमिकी

-करूर वैश्य बैंक के फर्जी लेटरहेड, मुहर और जाली हस्ताक्षर का किया गया इस्तेमाल, सरकारी फंड में सेंधमारी और धोखाधड़ी का आरोप

– पिछले सप्ताह भी बैंक ने 1.06 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का मामला हिंदपीढ़ी थाने में कराया था दर्ज

राँची। झारखण्ड सिल्क डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी में सरकारी योजनाओं के तहत काम हासिल करने के लिए 55.59 लाख रुपए से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का सनसनीखेज एक और मामला सामने आया है। इस संबंध में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राँची की अदालत में दायर शिकायत वाद के आधार पर हिंदपीढ़ी थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला भोपाल स्थित फर्म ‘महलवाला इंटरनेशनल एडुकेयर सर्विसेज एलएलपी’ और उसके अधिकृत पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया गया है। इससे पहले पिछले सप्ताह भी करूर वैश्य बैंक, मेन रोड रांची शाखा के प्रबंधक सुनील तिवारी की ओर से झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (जेएसडीएमएस) में काम हासिल करने के लिए करूर वैश्य बैंक के नाम से 1.06 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का गंभीर मामला मेसर्स गिमिट ई सर्विसेज (साझेदारी फर्म, साउथ एक्सटेंशन-1, नई दिल्ली), इसके साझेदार सचिन अग्रवाल (निवासी यमुना विहार, दिल्ली), मोहम्मद शाहनवाज (निवासी न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, दिल्ली व हिंदपीढ़ी, रांची) और रूपेश कुमार (निवासी डाल्टनगंज, पलामू) के विरुद्ध दर्ज कराया गया था।

सत्यापन के दौरान पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

दर्ज मामले के अनुसार, करूर वैश्य बैंक की राँची मुख्य शाखा (जोखिराम चैंबर, मेन रोड) के शाखा प्रबंधक सुनील तिवारी ने अदालत में इस मामले में भी परिवाद दाखिल किया था। शिकायत में बताया गया कि 18 जुलाई 2024 को झारखण्ड सिल्क डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी के मिशन निदेशक सह सीईओ के कार्यालय से बैंक को एक ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में 55,59,330 रुपये मूल्य की बैंक गारंटी (संख्या- 89BGP22360012) की वैधता और प्रामाणिकता की जांच करने का अनुरोध किया गया था। बैंक प्रबंधन ने जब अपने आंतरिक रिकॉर्ड की गहन जांच की, तो सामने आया कि शाखा द्वारा ऐसी कोई बैंक गारंटी कभी जारी ही नहीं की गई थी। इसके अलावा बैंक गारंटी दस्तावेज पर मौजूद बैंक अधिकारियों के हस्ताक्षर, पदनाम, मुहर और सीरियल नंबर पूरी तरह फर्जी, जाली और कूटरचित पाए गए।

बैंक और आरोपी कंपनी के बीच कोई खाता भी नहीं

बैंक की ओर से स्पष्ट किया गया कि आरोपित फर्म और करूर वैश्य बैंक के बीच किसी भी प्रकार का कोई बैंकिंग संबंध या खाता मौजूद नहीं है। बैंक के आंतरिक निरीक्षण विभाग की जांच रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई कि बैंक के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की इस पूरे षड्यंत्र में कोई संलिप्तता नहीं है। इसके बाद बैंक ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन फर्म की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।

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