राँची में अवैध पत्थर क्रशरों पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: 11 क्रशर जमींदोज, 08 सील, चुटूपालू और ओरमांझी क्षेत्र में मचा हड़कंप
राँची। झारखण्ड उच्च न्यायालय के कड़े रुख और खान एवं भूतत्व विभाग के निर्देशों के बाद राँची जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। चुटूपालू और ओरमांझी प्रखंड क्षेत्रों में शनिवार को चलाए गए इस विशेष अभियान से अवैध पत्थर खनन और स्टोन क्रशिंग के कारोबार में लिप्त लोगों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। संयुक्त जांच दल ने त्वरित और सख्त कदम उठाते हुए कुल 19 स्टोन क्रशिंग इकाइयों पर गाज गिराई है, जिसमें से 11 अवैध क्रशरों को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया, वहीं ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (CTO) की अवधि समाप्त होने के कारण 08 अन्य इकाइयों को सील कर दिया गया।
यह पूरी कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में गठित विशेष संयुक्त जांच समिति द्वारा की गई। क्षेत्र में लंबे समय से बिना वैध लाइसेंस और पर्यावरणीय मानकों को धत्ता बताकर स्टोन क्रशर चलाए जाने की शिकायतें मिल रही थीं।
जांच दल ने चुटूपालू और ओरमांझी के दुर्गम खनन क्षेत्रों में पहुँचकर प्रत्येक इकाई का स्थल निरीक्षण और भौतिक सत्यापन किया। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध की स्थिति से निपटने के लिए संबंधित अंचल अधिकारी (CO), स्थानीय थाना प्रभारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहा।
जांच के दौरान अधिकारियों ने केवल कागजी दस्तावेजों का मिलान ही नहीं किया, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की पड़ताल की। इस दौरान स्वीकृत खनन पट्टे, लाइसेंस, पर्यावरणीय स्वीकृति (EC), Consent to Establish (CTE) तथा Consent to Operate (CTO) की वैधता की गहनता से जांच की गई। प्रदूषण नियंत्रण परिषद और SEIAA द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुपालन की स्थिति को भी परखा गया। जांच में जिन 08 इकाइयों का CTO लैप्स या अमान्य पाया गया, उन्हें तुरंत प्रभाव से सील कर दिया गया। वहीं, जो 11 इकाइयां बिना किसी वैधानिक अनुमति के अवैध रूप से संचालित हो रही थीं, उन्हें पोकलेन और बुलडोजर की मदद से पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया।
राँची जिला प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। प्रशासन का यह अभियान आगे भी अनवरत जारी रहेगा और संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर पूरे खनन क्षेत्र की नियमित निगरानी की जाएगी।

