एनजीटी की रोक हटते ही निर्माण कार्यों को मिलेगी रफ्तार; खान विभाग ने कोडरमा, सिमडेगा और गिरिडीह समेत 47 बालू घाटों की ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू की

-अक्टूबर से पीक पर होंगे निर्माण कार्य: मानसून के बाद राज्य भर में सरकारी व निजी निर्माण में आएगी तेजी, मांग पूरी करने के लिए विभाग ने पहले से कसी कमर.
-5 वर्षों के लिए बंदोबस्ती: कोडरमा के 33 ग्रुप, सिमडेगा के 10 और गिरिडीह के 3 ग्रुप घाटों की बिडिंग सितंबर में होगी पूरी; 15 सितंबर तक फाइनल होगी प्रक्रिया.
राँची। मानसून खत्म होते ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक हटते ही राज्य में बालू की किल्लत न हो और आम लोगों को सस्ते दाम पर बालू मिल सके, इसे लेकर खान एवं भूतत्व विभाग ने अभी से मिशन मोड में काम शुरू कर दिया है।अक्टूबर महीने से राज्य भर में निजी मकानों से लेकर बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स और निर्माण कार्यों में भारी तेजी आएगी. उस दौरान बालू की भारी मांग को देखते हुए और कालाबाजारी रोकने के लिए विभाग ने जिलों के विभिन्न बालू घाटों की ई-नीलामी की प्रक्रिया तेज कर दी है। खान विभाग की मंशा है कि 15 अक्टूबर को एनजीटी का प्रतिबंध समाप्त होते ही वैध बालू घाटों से तुरंत सुचारू उठाव शुरू हो सके. इससे बाजार में बालू की पर्याप्त आपूर्ति होगी और दरों में सीधे तौर पर बड़ी गिरावट आएगी।
सितंबर के पहले-दूसरे हफ्ते में पूरी हो जाएगी नीलामी प्रक्रिया
विभाग द्वारा जारी ताजा टेंडर के अनुसार, राज्य के प्रमुख जिलों में 5 वर्षों की अवधि के लिए बालू घाटों की बंदोबस्ती (सेटलमेंट) की जा रही है।इसके तहत निविदाएं जारी कर दी गई हैं और सितंबर के पहले व दूसरे सप्ताह तक बिडिंग और टेक्निकल इवैल्यूएशन पूरा कर लिया जाएगा।
कोडरमा जिला: नॉर्थ छोटानागपुर सर्किल के तहत कोडरमा जिले में सबसे ज्यादा 33 ग्रुप्स (Group A से लेकर Group AG तक) के बालू घाटों की ई-नीलामी निकाली गई है. यहां 5 सितंबर तक बिड जमा होगी और 7 सितंबर को बिड खोली जाएगी.
सिमडेगा जिला: साउथ छोटानागपुर सर्किल के अधीन सिमडेगा के 10 प्रमुख बालू घाटों (कोरोमिया, पाइकपारा, खूंटीटोली-तामाडीह, गुलडा-करुआजोर, दुमकी-किरेसेरा, पिथरा-पोथाटोली, लाताकेल, रामजाल, सोगरा-नानेसेरा और गोर्रा) की नीलामी 10 सितंबर तक जमा होगी और 15 सितंबर को ऑक्शन प्रक्रिया संपन्न होगी.
गिरिडीह व सरायकेला: गिरिडीह जिले में ग्रुप-बी, ग्रुप-डी और ग्रुप-ई के बालू घाटों के लिए 7 सितंबर तक टेंडर डाले जा सकेंगे और 8 सितंबर को ऑक्शन खुलेगा. वहीं सरायकेला-खरसावां में जब्त बालू की नीलामी प्रक्रिया भी 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच पूरी की जा रही है.
अक्टूबर से क्यों जरूरी है बालू की सुलभ उपलब्धता
मानसून के 4 महीनों (10 जून से 15 अक्टूबर) के दौरान नदियों से बालू उठाव पर पूरी तरह रोक रहती है. इसके चलते स्टॉक बालू महंगे दामों पर बिकता है और कई जगह विकास कार्य ठप पड़ जाते हैं. अक्टूबर से जैसे ही बारिश का दौर थमेगा, राज्यभर में सड़क, पुल-पुलिया, सरकारी भवनों के साथ-साथ निजी निर्माण कार्यों में अचानक तेजी आएगी. खान विभाग की इस समयबद्ध तैयारी से जहां बिचौलियों के सिंडिकेट पर चोट लगेगी, वहीं उपभोक्ताओं को तय सरकारी दरों पर सुगमता से बालू मिल सकेगा.

