घूसखोर थानेदार की हेकड़ी खत्म: 15 हजार की रिश्वत लेते जमशेदपुर ACB के हत्थे चढ़ा बंदगांव थाना प्रभारी

चाईबासा/जमशेदपुर। पश्चिम सिंहभूम जिले के बंदगांव थाने में वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार का खेल चला रहे थाना प्रभारी (पु०अ०नि०) मनीष कुमार का पर्दाफाश हो गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) जमशेदपुर की टीम ने जाल बिछाकर उन्हें 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
भाई का नाम केस से हटाने के एवज में मांगी थी घूस
पूरा मामला पश्चिम सिंहभूम जिले के बंदगांव थाना क्षेत्र के कारिका गांव का है। गांव के निवासी बिजराय मुण्डू (पिता- मसीह मुण्डू) को बंदगांव थाना प्रभारी मनीष कुमार ने यह कहकर डराया कि उनके बड़े भाई लाचो मुण्डू उर्फ गुजरू का नाम एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के एक मामले (कांड सं०-07/2025) में शामिल है। थानेदार ने धमकीभरे अंदाज में कहा कि अगर वे अपने भाई का नाम इस मुकदमे से हटवाना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें 20,000 रुपये देने होंगे।पीड़ित बिजराय मुण्डू रिश्वत देकर काम कराने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे। उन्होंने घूसखोर थानेदार को सबक सिखाने की ठानी और सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जमशेदपुर के पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत कर दी।
ACB की जांच में खुली पोल, तय हुआ 15 हजार का सौदा
शिकायत मिलते ही एसीबी जमशेदपुर के अधिकारियों ने गुप्त रूप से मामले का विधिवत सत्यापन कराया। जांच के दौरान यह बात पूरी तरह सही साबित हुई कि थाना प्रभारी मनीष कुमार द्वारा केस से नाम हटाने के नाम पर 15,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही है।सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर एसीबी जमशेदपुर थाने में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधित) अधिनियम 2018 की धारा 7(a) के तहत कांड संख्या 04/2026 दर्ज किया गया।
रंगे हाथों दबोचे गए थानेदार
मामला दर्ज करने के बाद एसीबी की ओर से एक विशेष ‘धावादल’ (ट्रैप टीम) का गठन किया गया। योजना के मुताबिक, जैसे ही परिवादी बिजराय मुण्डू ने बंदगांव थाना प्रभारी मनीष कुमार को 15,000 रुपये की रिश्वत की रकम थमाई, आसपास मुस्तैद एसीबी की टीम ने दबिश देकर उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम आरोपी पुलिस अधिकारी को अपने साथ ले गई है, जहां उनके खिलाफ आगे की विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

