शराब घोटाला: ACB की जांच तेज, पूर्व उत्पाद आयुक्तों के दर्ज हुए बयान; 10 अगस्त के समन पर गैर-हाजिर रहे कई निदेशक

राँची।झारखण्ड के चर्चित शराब प्रकरण की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। अब तक जुटाए गए साक्ष्यों, विभागीय फाइलों और दर्ज बयानों के क्रमिक विश्लेषण के आधार पर एसीबी ने जांच के अगले चरण की शुरुआत कर दी है। हालिया पूछताछ और उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा में कई नए तथ्य और महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं, जिनकी पुष्टि के लिए एसीबी लगातार अधिकारियों और निजी कंपनियों के निदेशकों को समन जारी कर रही है।
जांच के इसी क्रम में एसीबी ने तत्कालीन उत्पाद आयुक्त (मुख्यालय) राकेश कुमार तथा तत्कालीन सहायक उत्पाद आयुक्त (मुख्यालय) मनोज कुमार के विस्तृत बयान दर्ज किए हैं। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदु और नए तथ्य प्रकाश में आए हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच की दिशा तय की जा रही है।
समन के बावजूद 10 अगस्त को अनुपस्थित रहे निदेशक
प्रकरण से जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक पहलुओं की पड़ताल के लिए एसीबी ने FLORENCE HEALTH CARE AND RESEARCH CENTER PRIVATE के निदेशक जतीन सहाय तथा A2Z Infra Services Ltd के निदेशक अरुण गौर, मनोज तिवारी एवं विकास अग्रवाल को 10 अगस्त 2026 को राँची स्थित एसीबी कार्यालय में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने हेतु समन जारी किया था। हालांकि, निर्धारित तिथि को इनमें से कोई भी प्रतिनिधि या निदेशक उपस्थित नहीं हुआ।
11 अगस्त को उत्पाद विभाग के अधिकारियों की होगी पेशी
जांच की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एसीबी ने 11 अगस्त 2026 को उत्पाद विभाग के तत्कालीन सहायक प्रशाखा पदाधिकारी मनोज कुमार वर्णवाल व मंगल प्रसाद सहाय तथा तत्कालीन उत्पाद निरीक्षक श्रीमती मिनाश्री प्रसाद को पूछताछ एवं बयान दर्ज कराने हेतु तलब किया है।इन अधिकारियों से उपलब्ध अभिलेखों, विभागीय नोटशीटों, अनुमोदनों, फाइलों की आवाजाही तथा अब तक जांच में प्राप्त डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों के संबंध में गहन पूछताछ की जाएगी।
साक्ष्य-आधारित और निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध: ACB
एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले की जांच चरणबद्ध, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। दर्ज किए जा रहे प्रत्येक नए बयान का मिलान उपलब्ध विभागीय दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों तथा अन्य गवाहों के कथनों के साथ किया जा रहा है, ताकि प्रकरण के हर पहलू का वैज्ञानिक एवं वस्तुनिष्ठ सत्यापन सुनिश्चित हो सके।एसीबी ने स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे प्रकरण को पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत उसके तार्किक और कानूनी निष्कर्ष तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
