यौन शोषण के आरोपी डीएसपी का ‘मास्टरमाइंड’ खेल: पीड़िता के परिवार पर दर्ज कराया फर्जी केस, पुलिसिया जांच में खुला राज; 2 थानेदार नपे

-गृह जिले में कराया ‘जीरो FIR’, राँची ट्रांसफर कर 1 माह में केस डायरी व परिजनों की गिरफ्तारी की बना ली थी पटकथा; पोल खुली तो दो थाना प्रभारी हटाए गए
राँची। खाकी के रसूख और पद के दुरुपयोग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक पुलिस उपाधीक्षक ने खुद पर दर्ज यौन शोषण के मामले से बचने और पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बनाने के लिए एक ऐसा षड्यंत्र रचा, जिसने पुलिसिया जांच व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीएसपी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने गृह जिले में अपने एक जानने वाले के माध्यम से यौन शोषण की पीड़िता के पिता और परिजनों के खिलाफ ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज करवाई। इसके बाद केस को राँची ट्रांसफर कराकर महज एक महीने के भीतर जांच पूरी करवा परिजनों की गिरफ्तारी की पूरी पटकथा तैयार कर ली गई। लेकिन जब यह फर्जी मामला समीक्षा के लिए सीनियर अधिकारियों के पास पहुंचा, तो इस ‘सैट-अप’ की पोल खुल गई। निष्पक्ष जांच के बाद धांधली उजागर होने पर वरीय पदाधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया।
शादी का झांसा, फर्जी दस्तावेज और आत्महत्या के लिए उकसाना
दरअसल,मामले की शुरुआत पीड़िता द्वारा राँची में एक थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी से हुई। पीड़िता ने डीएसपी के खिलाफ शादी का झांसा देकर लगातार शारीरिक शोषण करने, फर्जी आधार कार्ड बनाने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। पीड़िता के अनुसार,वर्ष 2024 में फेसबुक के जरिए उसकी पहचान डीएसपी से हुई। आरोपी ने उसे प्यार का इजहार किया और शादी का वादा कर 10 दिसंबर 2024 को राँची एक होटल तथा 12 जनवरी 2025 को राँची में ले जाकर शारीरिक संबंध बनाए। आरोप है कि 5 फरवरी 2025 को डीएसपी ने फर्जी आधार कार्ड (नाम बदलकर) बनवाकर राँची के एक होटल में रुकवाया। बाद में जब पीड़िता को पता चला कि आरोपी की शादी जनवरी 2025 में ही कोर्ट मैरिज के तहत कहीं और तय हो चुकी है, तो आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया और जबरन एक ‘समझौता पत्र’ पर हस्ताक्षर करवा लिए। पीड़िता का आरोप है कि शारीरिक शोषण के कारण उसे दवा खिलाकर गर्भपात कराया गया। शिकायत करने पर डीएसपी और उनके परिजनों ने धमकाया कि “हम पुलिस प्रशासन में हैं, तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।” पीड़िता ने प्रताड़ित होकर आत्महत्या की नीयत तक बना ली थी।
डीएसपी का ‘काउंटर स्ट्राइक’–जीरो एफआईआर और फर्जी केस का जाल
सूत्रों के अनुसार,खुद पर यौन शोषण का शिकंजा कसता देख डीएसपी ने मामले को भटकाने के लिए काउंटर प्लान बनाया। उन्होंने अपने गृह जिले के रहने वाले अपने परिचित का इस्तेमाल किया। उसके जरिए वहीं के एक थाने में शिकायत दर्ज कराई गई कि पीड़िता के परिजनों ने उसकी पत्नी को नौकरी दिलाने के नाम पर 22 अक्टूबर 2025 को राँची बुलाकर बंधक बनाया, दुष्कर्म किया और आपत्तिजनक वीडियो बनाया। पुलिस ने बिना जांच किए तुरंत जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला घटना स्थल यानी राँची ट्रांसफर कर दिया। राँची के संबंधित थानों में इस ट्रांसफर केस पर इतनी तेजी से काम हुआ कि महज एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट तैयार कर पीड़िता के बेकसूर परिजनों को गिरफ्तार करने की नौबत आ गई।
ऐसे खुली पोल: वरीय अधिकारियों की चौकसी ने बेनकाब किया षड्यंत्र
जब यौन शोषण पीड़िता के परिजनों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची, तो पूरा मामला समीक्षा और स्वीकृति के लिए वरीय पुलिस अधिकारियों के समक्ष आया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जब वरीय अधिकारियों ने दोनों केस डायरियों (डीएसपी पर दर्ज एफआईआर और परिजनों पर दर्ज ट्रांसफर एफआईआर) का बारीकी से अध्ययन कराया, तो पूरी साजिश बेनकाब हो गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि डीएसपी ने अपने पद और प्रभाव का बेजा इस्तेमाल कर जीरो एफआईआर करवाई थी, ताकि पीड़िता के परिवार पर दबाव बनाकर यौन शोषण का केस वापस कराया जा सके। इस गंभीर लापरवाही और मिलीभगत पर कड़ा रुख अपनाते हुए वरीय पुलिस अधिकारियों ने राँची के दो थाना प्रभारियों को पद से हटा दिया।
रिपोर्ट;आर सिंह,राँची।

