मुख्यधारा की ओर 16 नक्सलियों का कदम, 15 लाख का इनामी कमांडर भी डालेगा हथियार

-ऑपरेशन के दबाव से बेअसर हुई संगठन की विचारधारा, 60 लाख के कुल इनामी कैडरों का होगा सामूहिक आत्मसमर्पण

राँची।झारखण्ड में माओवादी विचारधारा का अंत अब तय नजर आ रहा है। पुलिस और सुरक्षा बलों के चौतरफा घेरेबंदी और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के प्रभाव में आकर नक्सली लगातार मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसी क्रम में 28 जुलाई को एक बार फिर बड़ा पुलिसिया और प्रशासनिक सफलता मिलने जा रही है, जब 16 नक्सली सामूहिक रूप से सरेंडर कर अपने हथियार डालेंगे। इस आत्मसमर्पण करने वाले समूह पर कुल 60 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसमें सबसे प्रमुख चेहरा 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमांडर संतोष उर्फ गांधी है।

10-10 लाख के तीन और 5-5 लाख के तीन इनामी भी शामिल

इसके साथ ही 10-10 लाख रुपये के इनामी तीन जोनल कमांडर, 5-5 लाख रुपये के तीन सब-जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और संगठन के तीन निचले दस्ता कैडर भी मुख्यधारा में शामिल होंगे। नक्सलियों के इस बड़े पैमाने पर सरेंडर करने की सबसे मुख्य वजह पुलिस का बिना रुके चल रहा निरंतर अभियान है, जिसने संगठन के आपूर्ति और कैडर नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। लगातार खत्म होते आधार के कारण नक्सलियों का मनोबल टूट चुका है। अब केवल सारंडा के जंगलों में ही कुछ नक्सली सिमट कर रह गए हैं, जिनमें ₹1-1 करोड़ के दो बड़े इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और असीम मंडल शामिल हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि बचे हुए नक्सलियों के सामने भी अब सिर्फ दो ही विकल्प बचे हैं—या तो वे सरेंडर करें या फिर पुलिस की गोली का सामना करें।

28 जुलाई को सरेंडर करने वाले 16 इनामी नक्सली

रीजनल कमांडर (15 लाख इनामी): संतोष उर्फ गांधी

जोनल कमांडर (10-10 लाख इनामी): 3 नक्सली

सब-जोनल कमांडर (5-5 लाख इनामी): 3 नक्सली

एरिया कमांडर: 6 नक्सली

दस्ता कैडर (सक्रिय सदस्य): 3 नक्सली

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