Ranchi:मुंहबोले भाई के साले से दोस्ती की तो नाबालिग की कर दी हत्या….बाप-बेटा ने एम्बुलेंस से गया ले जाकर किया अंतिम संस्कार,बाप-बेटा गिरफ्तार
राँची।जिले के रातू थाना क्षेत्र अंतर्गत झखड़ाटांड़ गांव में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है।यहां एक नाबालिग लड़की की हत्या के आरोप में पुलिस ने सुबोध पाठक और उनके पुत्र राहुल पाठक को गिरफ्तार किया है।आरोपियों ने कथित तौर पर लोक-लाज और सामाजिक बदनामी के डर से इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया है।
यह मामला दो अप्रैल की रात का है, जब झखड़ाटांड़ गांव के ग्रामीणों ने सुबोध पाठक के घर पर हंगामा किया।ग्रामीणों का आरोप था कि उनके घर में पिछले आठ वर्षों से रह रही एक लड़की अचानक गायब हो गई है।सूचना मिलने पर रातू पुलिस ने जांच शुरू की और शुरुआती छानबीन के बाद कांड संख्या 111/26 (धारा 140(3) BNS) के तहत मामला दर्ज किया।
एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने जब गहराई से जांच की, तो परतें खुलने लगीं।पुलिस को टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य मिले. कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी सुबोध पाठक और राहुल पाठक ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।उन्होंने बताया कि नाबालिग लड़की की हत्या कर दी थी शव को ठिकाने लगाने के लिए एम्बुलेंस (नंबर JH-01-AA-1245) का सहारा लिया गया।आरोपी शव को बिहार के गया ले गए और वहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया ताकि कोई सबूत न बचे।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि मृतका इंस्टाग्राम के जरिए राहुल पाठक के साले (राहुल की पत्नी के भाई) के संपर्क में थी।दोनों के बीच की बढ़ती नजदीकी और बातचीत से परिवार को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा (लोक-लाज) खोने का डर सता रहा था।इसी कारण उन्होंने लड़की को रास्ते से हटाने की साजिश रची।पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सुबोध पाठक और राहुल पाठक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।साथ ही घटना में प्रयुक्त एम्बुलेंस और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। चालक पिंटू कुमार सिंह ने बताया कि सुबोध पाठक ने उसे यह कहकर गुमराह किया था कि उसकी 13 वर्षीय बेटी की मृत्यु हो गई है और उसका अंतिम संस्कार गया में करना है।
बताया जाता है कि आरोपियों ने चार दिनों तक पुलिस और ग्रामीणों को गुमराह किया। लेकिन लगातार पूछताछ के बाद पांचवें दिन राहुल उर्फ अक्षय ने सच्चाई स्वीकार कर ली। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस की जांच में पारिवारिक विवाद और प्रेम-प्रसंग की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, सुबोध पाठक और उसके बेटे के बीच अक्सर विवाद होता था। घटना की रात में भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें राजनंदिनी ने अपने फूफा सुबोध का पक्ष लिया।इससे नाराज होकर राजनंदिनी के मुंहबोले भाई राहुल ने उसका गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।बताया जाता है कि बच्ची का राहुल के साले के साथ प्रेम-प्रसंग भी परिवार को नागवार गुजर रहा था, जिसे लेकर भी तनाव था।
घटना के बाद कमलेश मेमोरियल अस्पताल के संचालक अमरेश पाठक मौके पर सुबोध पाठक के घर पहुंचा और बच्ची को मृत घोषित किया।इसके बाद उसकी मदद से एंबुलेंस के जरिए शव को गयाजी ले जाकर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मृत बच्ची राजनंदिनी की पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी सामने आई है।बताया गया कि राजनंदिनी मूल रूप से औरंगाबाद जिले के अंबा गांव निवासी दिनेश मइवार की दूसरी पत्नी की बेटी थी।दिनेश मइवार शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। इसी परिस्थिति को देखते हुए परिवार के परिचित रातू निवासी सुबोध पाठक राजनंदिनी को अपने साथ ले आए थे, ताकि उसका बेहतर पालन-पोषण हो सके।पिछले करीब आठ साल से राजनंदिनी सुबोध पाठक के घर में रह रही थी और उन्हें फूफा कहा करती थी।बताया जाता है कि सुबोध पाठक ने राजनंदिनी के आधार कार्ड में भी पिता के स्थान पर अपना नाम दर्ज करा रखा था। धीरे-धीरे राजनंदिनी ने पाठक परिवार को ही अपना असली परिवार मान लिया था और वह अपने पैतृक घर वापस जाना भी नहीं चाहती थी।

