सटीक खुफिया इनपुट पर कुख्यात नक्सली कमांडर का काम तमाम, एक महीने पहले मिली थी यूपी में घुसने की खबर, STF ने बिछाया जाल

चतरा/वाराणसी। झारखण्ड के चतरा से निकला प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीएसपीसी का सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता रविवार की सुबह वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया। उसके साथ ही करीब दो दशक से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में रहे इस आरोपी का एक लंबा अध्याय खत्म हो गया, लेकिन अब जांच का फोकस उसके पीछे छूटे नेटवर्क पर है।वाराणसी में वह किसके संपर्क में था, यहां किसके सहारे रह रहा था और उसके साथियों की कड़ी कहां तक जुड़ी हुई है।

बृजेश गंझू पर झारखण्ड सरकार ने 25 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यानी उसकी गिरफ्तारी पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था। एनआईए उससे जुड़े टेरर फंडिंग समेत कई मामलों में उसकी तलाश कर रही थी।

भोर में घेराबंदी, बाइक से पहुंचा और शुरू हो गई गोलियां
वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र स्थित लंका मैदान के पास रविवार तड़के करीब पांच बजे एटीएस ने घेराबंदी की। पुलिस के अनुसार, खुफिया सूचना थी कि बृजेश गंझू मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ होते हुए मुगलसराय की तरफ जाने वाला है।एटीएस टीम ने संदिग्ध बाइक सवार को रुकने का इशारा किया। पुलिस के मुताबिक, रुकने के बजाय उसने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई हुई। गोलीबारी में बृजेश गंझू घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई दो पुलिसकर्मियों की जान
मुठभेड़ के दौरान बृजेश की ओर से चलाई गई गोलियां यूपी एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगीं। दोनों सुरक्षित बताए गए हैं। इस घटना के बाद एटीएस और स्थानीय पुलिस ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया। घटनास्थल से हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए हैं।

एक महीने पहले ही यूपी पहुंचने का मिला था इनपुट!
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को बृजेश गंझू के उत्तर प्रदेश में दाखिल होने की जानकारी करीब एक महीने पहले ही मिल गई थी। इसके बाद यूपी एसटीएफ/एटीएस की टीम उसके संभावित ठिकानों और आवाजाही पर नजर रख रही थी।हालांकि, उसके यूपी आने का वास्तविक उद्देश्य क्या था, वह किसके संपर्क में था और वाराणसी में उसे किसने मदद पहुंचाई।इन सवालों के जवाब अभी जांच का हिस्सा हैं।जांच एजेंसियां द्वारा उसके वाराणसी कनेक्शन और संभावित सहयोगियों की पड़ताल कर रही है।

चतरा से शुरू हुआ सफर, टीएसपीसी के शीर्ष तक पहुंचा
बृजेश गंझू मूल रूप से चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के लूटू गांव का रहने वाला बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वह पहले प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़ा और बाद में टीएसपीसी से जुड़कर संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका तक पहुंचा। आगे चलकर वह टीएसपीसी का शीर्ष कमांडर बना।
सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में उसका नाम हत्या, पुलिस पर हमले, हथियार, अपहरण, रंगदारी/लेवी वसूली और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े कई मामलों में सामने आया था। एनआईए भी उससे जुड़े मामलों की जांच कर रही थी।

पुलिस रिकॉर्ड में 44 मामले, कई में हत्या और पुलिस पर हमले की धाराएं

उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बृजेश गंझू के खिलाफ कुल 44 मामले दर्ज बताए गए हैं। इनमें सिमरिया, टंडवा, लावालौंग, वशिष्टनगर, राजपुर, हंटरगंज, गिद्धौर, कटकमसांडी, मयूरहंड समेत चतरा और आसपास के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के मामले शामिल हैं।इन मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, लेवी वसूली, पुलिस पर हमला, हथियार अधिनियम, आपराधिक षड्यंत्र और सीएलए/यूएपीए जैसी धाराओं का उल्लेख मिलता है।
रिकॉर्ड में वर्ष 1996 से लेकर 2018 तक के मामले शामिल हैं। शुरुआती मामलों में सिमरिया थाना क्षेत्र में हत्या, अपहरण, हथियार और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी धाराएं दर्ज हैं। बाद के वर्षों में टंडवा, लावालौंग और दूसरे इलाकों में रंगदारी, लेवी, अपहरण, हत्या और हथियार से जुड़े मामले लगातार जुड़ते गए।यानी बृजेश गंझू के खिलाफ दर्ज मामलों का सिलसिला एक-दो घटनाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि वर्षों तक अलग-अलग थाना क्षेत्रों में चलता रहा।

लेवी से टेरर फंडिंग तक पहुंची जांच
बृजेश गंझू पर निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों और कारोबारियों से लेवी वसूलने के आरोप भी लगे। बाद में उसके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी तक पहुंची और टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों में भी उसका नाम सामने आया। इसी वजह से उसकी तलाश सिर्फ झारखण्ड पुलिस तक सीमित नहीं रही।
उस पर झारखण्ड सरकार के 25 लाख और एनआईए के पांच लाख रुपये के इनाम ने भी यह स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां उसे लंबे समय से गंभीर वांछित आरोपी के तौर पर तलाश रही थीं।

अब असली जांच—वाराणसी में किसके सहारे था बृजेश?
बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल अब उसके नेटवर्क का है। वह झारखण्ड से निकलकर उत्तर प्रदेश तक कैसे पहुंचा, वाराणसी में उसके ठहरने या आवाजाही की व्यवस्था किसने की,उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।क्या वह अकेले वाराणसी आया था या उसके साथ कोई नेटवर्क भी काम कर रहा था।मुठभेड़ के दौरान उसके साथ एक साथी के होने की बात भी सामने आई है और उसके संभावित फरार साथी की तलाश की जा रही है। इसलिए अब जांच सिर्फ बृजेश की पहचान और उसके पुराने मामलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसके पूर्वांचल कनेक्शन और मददगारों तक पहुंचने की कोशिश होगी।

वर्षों की तलाश का अंत, लेकिन नेटवर्क की तलाश जारी
वाराणसी के लंका मैदान में हुई मुठभेड़ ने बृजेश गंझू की कहानी का अंत जरूर कर दिया, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज मामलों और उसके कथित नेटवर्क की जांच अब भी बाकी है। चतरा के जंगलों से लेकर वाराणसी तक उसका पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसके संपर्कों की एक नई कड़ी खोल सकता है। अब नजर इस बात पर है कि जांच में उसके साथ जुड़े और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।

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