जंगल से धनबाद तक पीछा… सुरक्षा बलों ने एक करोड़ के इनामी खूंखार नक्सली मिसिर बेसरा सहित तीन को दबोचा…

 

राँची/धनबाद।तीन दशक से भी ज्यादा समय तक झारखण्ड, ओडिशा और आसपास के राज्यों में दहशत का पर्याय बना भाकपा (माओवादी) का शीर्ष नेता मिसिर बेसरा आखिरकार सुरक्षा एजेंसियों के शिकंजे में आ गया। सूत्रों के मुताबिक मंगलवार रात करीब 10 बजे धनबाद के मनियाडीह थाना क्षेत्र में बेहद गोपनीय और हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन चलाकर सुरक्षाबलों ने एक करोड़ रुपये के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को दबोच लिया। उसके साथ दो अन्य माओवादी मोछू और गौरव हांसदा को भी गिरफ्तार किया गया है।

गिरिडीह के पीरटांड़ का रहने वाला मिसिर बेसरा 1980-90 के दशक में एमसीसी से जुड़ा था और बाद में माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया। वर्ष 2007 में वह गिरफ्तार हुआ था, लेकिन 2009 में चाईबासा कोर्ट ले जाते समय नक्सलियों ने विस्फोट कर उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था। तब से वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ था।

खुफिया एजेंसियों को हाल ही में इनपुट मिला था कि कोल्हान के जंगलों से निकलने के बाद मिसिर बेसरा अपने करीबी सहयोगियों के साथ धनबाद पहुंचा है और वहां से गिरिडीह की ओर निकलने की तैयारी में है। सूचना मिलते ही सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और बिना कोई मौका दिए उसे साथियों सहित गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल तीनों से गुप्त स्थान पर कड़ी पूछताछ की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मिसिर बेसरा प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व का अहम सदस्य है और संगठन की सैन्य रणनीति तय करने वालों में उसकी बड़ी भूमिका रही है। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, लातेहार, चतरा, पलामू और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में हुई कई बड़ी नक्सली वारदातों के पीछे उसका नाम सामने आता रहा है।
उसके खिलाफ सुरक्षाबलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, हथियार लूट, हत्या और करोड़ों रुपये की लेवी वसूली समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

कोल्हान क्षेत्र में लगातार चल रहे एंटी-नक्सल अभियानों के बावजूद मिसिर बेसरा हर बार सुरक्षाबलों को चकमा देकर फरार होने में सफल हो जाता था। लगातार सरेंडर और माओवादी नेटवर्क के कमजोर पड़ने के बाद वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन इस बार सुरक्षा एजेंसियों ने उसे बच निकलने का कोई मौका नहीं दिया।

सूत्रों के अनुसार करीब 15 दिन पहले तक मिसिर बेसरा चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र के मुरूम्बुरा गांव की पहाड़ियों में अपने साथियों वीरेंद्र हांसदा और मेहनत उर्फ मोछू के साथ मौजूद था। इसके बाद उसने ठिकाना बदल लिया था, लेकिन आखिरकार धनबाद में सुरक्षा एजेंसियों के जाल में फंस गया।

सुरक्षा एजेंसियां इस गिरफ्तारी को झारखण्ड और पड़ोसी राज्यों में माओवादी संगठन के खिलाफ हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सफलता मान रही हैं। माना जा रहा है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से माओवादी संगठन की रणनीतिक और संचालन क्षमता को बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि, गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

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