घोटाले की परीक्षा में पिता भी शामिल…अभय तिवारी पर पत्नी-भाई के बाद पिता को परीक्षा दिलाने का आरोप, CID जांच तेज
राँची।झारखण्ड लोक सेवा आयोग और झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई धांधली और भ्रष्टाचार की जांच में अपराध अनुसंधान विभाग के हाथ बेहद चौंकाने वाले और पुख्ता सबूत लगे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन कराने वाली एजेंसी TDPL और उसके मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी की इस पूरे सिंडिकेट में मुख्य भूमिका उजागर हुई है। जांच में सामने आया है कि अभय तिवारी ने न केवल अपनी पत्नी, भाई और रिश्तेदारों को फर्जी तरीके से परीक्षा पास करवाकर सरकारी नौकरी दिलवाई, बल्कि वर्ष 2024 में TDPL द्वारा आयोजित परीक्षा में अपने पिता सुखदेव तिवारी को भी अभ्यर्थी के तौर पर शामिल करवाया।
पीटी के लिए 5 लाख और फाइनल सेलेक्शन के 25 लाख तक की वसूली
अभय तिवारी अभ्यर्थियों को अपने परिवार और करीबियों के फर्जी चयनों का उदाहरण देकर यह भरोसा दिलाता था कि पूरा सिस्टम उसके प्रभाव में है। वह प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 5 लाख रुपये और अंतिम चयन (फाइनल मेरिट) के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपये तक वसूलता था। सिस्टम को मैनिपुलेट कर अयोग्य अभ्यर्थियों से मोटी रकम ऐंठना इस गिरोह का मुख्य जरिया बन चुका था।
लखनऊ के दफ्तर से ऑपरेट हो रहा था ‘सीक्रेट सेल’
धोखाधड़ी और धांधली के इस पूरे खेल का नियंत्रण उत्तर प्रदेश की राजधानी से संचालित हो रहा था। TDPL के लखनऊ स्थित कार्यालय (FF-67, आदर्श कॉम्प्लेक्स, जानकीपुरम) से कंपनी के निदेशकों समरपाल सिंह और रणबीर सिंह के साथ मिलकर अभय तिवारी, मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद अवध एक ‘सीक्रेट सेल’ चला रहे थे। इसी गोपनीय ठिकाने से परीक्षा परिणामों, ओएमआर शीट और सिस्टम में हेरफेर की साजिशों को अंजाम दिया जाता था।
JSSC-CGL पेपर लीक में पहले से दागी है अभय, CID खंगाल रही पूरी सूची
मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी JSSC-CGL परीक्षा पेपर लीक मामले (2024) में नामकुम थाना कांड संख्या 45/2024 के तहत पहले से नामजद आरोपी है। इस नए खुलासे के बाद CID ने पूरे मामले की जांच नए सिरे से शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब उन सभी लोगों का रिकॉर्ड और दस्तावेज खंगाल रही है, जो अभय तिवारी के संपर्क में थे और जिन्होंने हाल के वर्षों में JPSC या JSSC की परीक्षाएं देकर चयन हासिल किया है। आने वाले दिनों में आयोग के कुछ अन्य अधिकारियों और गिरोह से जुड़े कई सफेदपोशों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।

