चोरी की स्कॉर्पियो बरामद हुई, फिर नीलाम कर दी गई; कागजों की कलाबाजी में फंसा DTO का लिपिक, EOU ने दबोचा

 

नवादा। चोरी की गाड़ी बरामद होने के बाद उसे उसके असली मालिक तक पहुंचाने के बजाय नीलाम कर दिए जाने का मामला अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच के घेरे में है। वर्ष 2019 में रोहतास से चोरी हुई स्कॉर्पियो गोपालगंज में शराब के साथ बरामद हुई थी। वाहन का इंजन और चेचिस नंबर मूल था, जबकि रजिस्ट्रेशन नंबर बदला हुआ बताया गया। इसके बावजूद बरामद वाहन की आगे की प्रक्रिया में ऐसी कलगुजारी हुई कि आखिरकार स्कॉर्पियो की नीलामी कर दी गई।

इसी मामले में EOU ने नवादा जिला परिवहन कार्यालय के लिपिक कन्हैया लाल को गिरफ्तार किया है। EOU में दर्ज प्राथमिकी संख्या 42/25 में जारी वारंट के आधार पर नगर थाना पुलिस के सहयोग से परिवहन कार्यालय से उसकी गिरफ्तारी हुई। कन्हैया लाल पटना के बेऊर निवासी रमाकांत तिवारी के पुत्र हैं।

चोरी की गाड़ी, शराब और बदला हुआ नंबर
मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2019 से होती है। रोहतास जिले के दिनारा थाना क्षेत्र के भगीरथा गांव से राधेश्याम सिंह की स्कॉर्पियो चोरी हो गई थी। वाहन मालिक ने इसकी प्राथमिकी दिनारा थाने में दर्ज कराई थी।करीब छह महीने बाद 19 जून 2020 को यही स्कॉर्पियो गोपालगंज के सिधवलिया थाना क्षेत्र में शराब के साथ पकड़ी गई। जांच में बताया गया कि वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर बदला हुआ था, जबकि इंजन और चेचिस नंबर मूल थे। यानी वाहन की पहचान उसके मूल तकनीकी नंबरों से की जा सकती थी।

बरामदगी के बाद भी मालिक को नहीं मिली गाड़ी
यहीं से मामला गंभीर हो जाता है। पुलिस ने जब्त वाहन की रिपोर्ट उत्पाद विभाग को भेजी और इसके बाद 27 दिसंबर 2021 को स्कॉर्पियो की नीलामी कर दी गई।सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस वाहन के चोरी होने की प्राथमिकी पहले से दर्ज थी और जिसके इंजन-चेचिस नंबर मूल बताए जा रहे थे, वह अपने वास्तविक मालिक तक पहुंचने के बजाय नीलामी की प्रक्रिया में कैसे पहुंच गया।राधेश्याम सिंह को बाद में पता चला कि उनकी चोरी हुई स्कॉर्पियो बरामद हो चुकी थी और उसे उनकी जानकारी या सहमति के बिना नीलाम कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से वाहन वापस दिलाने की मांग की।

अब खुलेंगे कागजों की कलाबाजी के राज
मामला 20 नवंबर 2025 को EOU में दर्ज हुआ। प्राथमिकी संख्या 42/25 के बाद जांच आगे बढ़ी तो वाहन के रजिस्ट्रेशन, दस्तावेजों और नीलामी से जुड़ी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई।इसी क्रम में नवादा DTO कार्यालय के लिपिक कन्हैया लाल की गिरफ्तारी हुई है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की इस स्कॉर्पियो के दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी प्रक्रिया में किस स्तर पर क्या गड़बड़ी हुई और नीलामी तक मामला कैसे पहुंचा।लिपिक की गिरफ्तारी ने इसलिए भी पूरे मामले को संगीन बना दिया है, क्योंकि अब जांच केवल चोरी हुई गाड़ी की बरामदगी और नीलामी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सरकारी दस्तावेजों और परिवहन संबंधी प्रक्रिया में कथित हेरफेर की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है। EOU की जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।

 

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