पूछताछ में खुलासा : परीक्षा कराने वाली एजेंसी के मैनेजर ने 1.80 करोड़ में खरीदा पेपर, पत्नी-भाई समेत 15 को बोकारो में रटवाए 65 सवाल, खुद 48वीं रैंक लाया

-अभय तिवारी का रिमांड तीन दिन और बढ़ा, पत्नी व भाई भेजे गए जेल, परीक्षा लेने वाली एजेंसी वेबेल के फरार मालिक मिथिलेश ने पटना से दिल्ली तक फैलाया जाल, बोकारो के सेफ हाउस में रटवाए थे सवाल जवाब
राँची।झारखण्ड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) में सेंधमारी की परतें अब एक एक कर फिर खुल रही हैं। परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने सीआईडी रिमांड में कई चौंकाने वाला खुलासा किया है। अभय ने कबूल किया है कि उसने अपनी पत्नी, भाई और अन्य अभ्यर्थियों समेत कुल 15 लोगों से 12-12 लाख रुपए जुटाकर 1.80 करोड़ रुपए का सिंडिकेट तैयार किया था। इसी मोटी रकम के दम पर पेपर लीक कराया गया और खुद अभय तिवारी ने सेटिंग के खेल में राज्यभर में 48वीं रैंक हासिल कर ली। हैरत की बात यह है कि इस सिंडिकेट के जरिए परीक्षा में बैठे सभी 15 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए थे।
बोकारो में सीक्रेट अड्डे पर सभी को 65 सवाल-जवाब रटवाए गए
सीआईडी पूछताछ में सामने आया कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा कराने का जिम्मा संभाल रही मुख्य एजेंसी ‘वेबेल’ का संचालक मिथिलेश सिंह और उसका सहयोगी राकेश सिंह ही इस पूरे खेल के मुख्य सूत्रधार थे। परीक्षा से ठीक पहले मिथिलेश और राकेश ने बोकारो में एक गोपनीय ठिकाना तय किया। यहां अभय तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी, भाई अक्षय तिवारी समेत कुल 15 अभ्यर्थियों को जुटाया गया और परीक्षा में आने वाले 65 हूबहू प्रश्न और उनके उत्तर रातभर रटवाए गए।
पत्नी-भाई जेल भेजे गए, अभय से 3 दिन और होगी पूछताछ
तीन दिनों की रिमांड पूरी होने के बाद सीआईडी ने अभय की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी को राँची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल भेज दिया है। वहीं, मास्टरमाइंड अभय तिवारी की रिमांड अवधि तीन दिन और बढ़ा दी गई है। अभय पहले जेपीएससी मेधा घोटाले में पकड़ा गया था, अब सीआईडी जेएसएससी-सीजीएल मामले में भी उसकी विधिवत गिरफ्तारी दर्ज कर रही है।
एजेंसी वेबेल का मालिक है फरार मिथिलेश सिंह
जेएसएससी सीजीएल की परीक्षा संचालित कराने की जिम्मेदारी जिस एजेंसी वेबेल को मिली थी उसका मालिक मिथिलेश सिंह पटना का रहने वाला है। सीआईडी उसकी तलाश कर रही है, लेकिन वर्तमान में वह फरार चल रहा है। उसकी तलाश में सीआइडी की टीम दिल्ली भी जा चुकी है। सीआईडी की प्रारंभिक जांच व अभ्यर्थियों से हुई पूछताछ के बाद यह सामने आया है कि परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी वेबेल का संचालक मिथिलेश सिंह, उसके सहयोगी राकेश सिंह सहित अन्य ने मिलकर परीक्षा संबंधित डेटा लीक की, पेपर लीक होने के बाद अभ्यर्थियों को प्रश्न व उत्तर रटवाने में सहयोग किया और इसके एवज में वसूली भी हुई। अब मिथलेश सिंह से पूछताछ के बाद ही इस मामले से और पर्दा हटने की संभावना है।
एसआईटी की रडार पर पूरा नेटवर्क
जेएसएससी सीजीएल मामले की तह तक पहुंचने के लिए एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे के नेतृत्व में गठित 17 सदस्यीय एसआईटी ने जांच का दायरा तेज कर दिया है। एसआईटी की विशेष टीम अब तक 60 से अधिक संदिग्धों को तलब कर उनके विस्तृत बयान दर्ज कर चुकी है, जिससे पूरे नेटवर्क की कड़ियां तेजी से जुड़ रही हैं। पड़ताल के दौरान इस मामले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया जा रहा है। परीक्षा में अनुचित लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों पर भी सीधी कार्रवाई शुरू हो गई है, जिसके तहत अक्षय तिवारी और सुषमा कुमारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। 14वीं जेपीएससी परीक्षा मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुके मुख्य आरोपी अभय तिवारी की मुश्किलें अब और बढ़ने जा रही हैं। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में भी सेंधमारी मामले में सीआईडी अब इस केस में भी उसकी औपचारिक (ऑन-रिकॉर्ड) गिरफ्तारी दर्ज करने की प्रक्रिया में लगी है।

