JSSC-CGL रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, प्रभावित कर्मी फिलहाल करते रहेंगे काम; कार्मिक विभाग ने जारी किया आदेश

राँची। झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद अब शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने सभी संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को प्रभावित पदाधिकारियों व कर्मियों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार ने 10 सितंबर 2026 को इस संबंध में पत्र जारी किया है। पत्र सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, JSSC के सचिव, प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलों के उपायुक्तों को भेजा गया है।

18 अगस्त को रद्द हुई थी CGL परीक्षा

मामला JSSC की CGL परीक्षा (विज्ञापन संख्या 10/2023) से जुड़ा है। मंत्रिपरिषद के 17 अगस्त 2026 के निर्णय के बाद सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर परीक्षा रद्द कर दी थी।सरकार के इस फैसले से प्रभावित पदाधिकारियों और कर्मियों की ओर से झारखण्ड हाईकोर्ट में रमेश उरांव एवं अन्य बनाम झारखण्ड राज्य एवं अन्य के नाम से रिट याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को अंतरिम आदेश पारित किया।

हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले के अमल पर लगाई रोक

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कार्मिक विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि 18 अगस्त की उस अधिसूचना के क्रियान्वयन, संचालन और निष्पादन पर अगले आदेश तक रोक लगी हुई है।अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि अधिसूचना से प्रभावित याचिकाकर्ताओं समेत अन्य संबंधित कर्मी रिट याचिका के अंतिम निष्पादन तक अपने पद पर कार्य करते रहेंगे।

अब सभी विभागों को अनुपालन का निर्देश

हाईकोर्ट के इसी अंतरिम आदेश के मद्देनजर कार्मिक विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यानी फिलहाल CGL परीक्षा रद्द किए जाने की अधिसूचना के आधार पर प्रभावित कर्मियों के कामकाज पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और वे अपने पद पर कार्य जारी रखेंगे।सरकार की ओर से जारी ताजा पत्र के बाद अब संबंधित विभागों, JSSC और जिला प्रशासन के स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल गेंद हाईकोर्ट के पाले में है। परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले पर अंतिम स्थिति अदालत के आगे के आदेश के बाद ही साफ होगी।

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