सेना,MES और रेलवे में नौकरी लगाने का फर्जी खेल..कोलकाता मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर राँची पुलिस का बड़ा एक्शन, फर्जी नियुक्ति पत्र-दस्तावेजों के साथ एक गिरफ्तार
–रेलवे और सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को बनाया निशाना, लाखों रुपये की ठगी का आरोप; चार नामजद आरोपियों पर FIR
राँची।राजधानी राँची में सेना, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) और रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी करने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कोलकाता मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली गुप्त एवं महत्वपूर्ण सूचना बनी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए राँची पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली सूचना के बाद राँची पुलिस ने जांच शुरू की और नामकुम थाना पुलिस तथा कोलकाता मिलिट्री इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के एक कथित सदस्य गौतम कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की छापेमारी में उसके कब्जे से सेना और MES में भर्ती से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आई है। बरामद दस्तावेजों को पुलिस अब जांच का अहम सुराग मान रही है।
SIT बनाकर शुरू हुई पूरे नेटवर्क की जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया।SIT को पूरे मामले की तह तक जाने, कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच करने, आरोपियों के बीच की कड़ी का पता लगाने और ठगी के शिकार लोगों की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई।जांच के दौरान पुलिस को ऐसे दस्तावेज हाथ लगे, जिनका इस्तेमाल सेना और MES में भर्ती से संबंधित प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने के लिए किए जाने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये दस्तावेज कहां तैयार किए गए, किसने तैयार किए और इनके जरिए कितने युवाओं को नौकरी का झांसा दिया गया।
नौकरी की चाहत को बनाया हथियार
एफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपियों पर युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पैसे लेने का आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार, सेना/MES में नौकरी लगवाने की बात कहकर उसे भर्ती और ज्वाइनिंग प्रक्रिया से संबंधित जानकारी एवं दस्तावेज दिखाए गए।आरोप है कि नौकरी की प्रक्रिया को भरोसेमंद दिखाने के लिए कथित तौर पर जॉइनिंग और भर्ती से जुड़े कागजात का सहारा लिया गया। बाद में नौकरी के नाम पर रकम लेने का सिलसिला चलता रहा।शिकायत में एक बिंदु पर ₹6.50 लाख की रकम दिए जाने का भी उल्लेख है। रकम लेने के बाद नौकरी नहीं मिलने और आरोपियों की ओर से टालमटोल किए जाने का आरोप लगाया गया है।
फर्जी कागजातों का बड़ा नेटवर्क होने का शक
पुलिस की कार्रवाई में सेना और MES से संबंधित कई दस्तावेज बरामद होना इस मामले को और गंभीर बना रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद दस्तावेज महज नकली कागजात हैं या इनके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।पुलिस की जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि क्या आरोपियों के पास सेना अथवा MES की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित अंदरूनी जानकारी थी या फिर युवाओं को प्रभावित करने के लिए इंटरनेट/अन्य माध्यमों से वास्तविक दस्तावेजों की नकल तैयार की गई थी।
गौतम कुमार गिरफ्तार, पूछताछ में खुलेंगे कई राज
गिरफ्तार आरोपी की पहचान गौतम कुमार, पिता देवेंद्र कुमार, निवासी नियर RTC स्कूल, लवकुश टावर, थाना सदर, जिला राँची के रूप में हुई है।पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है। पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह इस कथित नेटवर्क में किस भूमिका में था और उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।खास तौर पर पुलिस यह जानना चाहती है कि नौकरी के नाम पर पैसे लेने, फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने और कथित अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया का भरोसा दिलाने का काम कौन-कौन लोग करते थे।
FIR में चार आरोपी नामजद
शिकायतकर्ता योगेश कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर नामकुम थाना में मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।एफआईआर में नामजद आरोपियों में राजकिशोर शाह उर्फ (एफआईआर में दर्ज उपनाम), गौतम कुमार, चंदन कुमार सिंह और मृत्युंजय कुमार के नाम सामने आए हैं।इनमें से गौतम कुमार की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की पुलिस जांच कर रही है।
सेना के नाम का इस्तेमाल कर बनाया भरोसा?
पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि कथित ठगी के लिए सेना और MES जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के नाम का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के बीच सेना और सरकारी विभागों में नौकरी को लेकर भरोसा अधिक होता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति भर्ती, नियुक्ति या जॉइनिंग के नाम पर आधिकारिक दिखने वाले दस्तावेज सामने रखता है तो उसके झांसे में आना आसान हो जाता है।यही वजह है कि पुलिस इस मामले को सामान्य ठगी के बजाय फर्जी दस्तावेज और सरकारी नौकरी के नाम पर संचालित कथित संगठित ठगी के नेटवर्क के रूप में भी जांच रही है।
कितने युवाओं से हुई ठगी? पुलिस खंगाल रही पूरा रिकॉर्ड
SIT की जांच अब केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रहने वाली है। पुलिस बरामद दस्तावेजों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों को नौकरी का झांसा दिया और कितनी रकम वसूली।
अगर बरामद दस्तावेजों में अलग-अलग अभ्यर्थियों के नाम, भर्ती से संबंधित कागजात या अन्य रिकॉर्ड मिलते हैं, तो उनसे इस कथित नेटवर्क के विस्तार का पता चल सकता है।पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रांची के अलावा झारखण्ड या दूसरे राज्यों में भी इस गिरोह के संपर्क थे या नहीं।
कोलकाता मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना ने खोली पोल
इस पूरे मामले में कोलकाता मिलिट्री इंटेलिजेंस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। मिली सूचना के आधार पर राँची पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए SIT का गठन किया और नामकुम पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई को आगे बढ़ाया।छापेमारी में फर्जी दस्तावेज मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब पुलिस की नजर उन लोगों तक पहुंचने पर है, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।फिलहाल एक आरोपी गौतम कुमार गिरफ्तार है और मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। बरामद फर्जी दस्तावेज और आरोपियों से पूछताछ के बाद इस कथित नौकरी ठगी नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

