कोयला कर्मियों के 727 करोड़ रुपये डूबने का मामला: DHFL निवेश घोटाले में CBI ने दर्ज की FIR, हाईकोर्ट के आदेश पर होगी जांच
राँची।कोयला कर्मचारियों की मेहनत की कमाई से जुड़े 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान का मामला अब सीबीआई के हवाले हो गया है। धनबाद स्थित कोल माइंस प्रोविडेंट फंड संगठन (CMPFO) की ओर से दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) में किए गए निवेश में कथित वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, राँची ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। झारखण्ड हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में CMPFO के तत्कालीन कमिश्नर अनिमेष भारती के साथ DHFL के तत्कालीन प्रमोटर कपिल वाधवान और धीरज वाधवान को भी आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा संगठन के अज्ञात अधिकारियों और अन्य लोगों को भी प्राथमिकी में शामिल किया गया है।
1,390 करोड़ का निवेश, वापस मिले नहीं पूरे पैसे
सीबीआई की प्राथमिकी के मुताबिक, CMPFO ने वर्ष 2015 से 2018 के बीच DHFL में करीब 1,390.25 करोड़ रुपये निवेश किए थे। निवेश के दौरान ही वित्तीय विशेषज्ञों और फंड मैनेजरों ने DHFL की कमजोर वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने निवेश की गई रकम समय रहते निकालने की सलाह भी दी थी। इसके बावजूद आरोप है कि अधिकारियों ने इस सलाह पर तत्काल कार्रवाई नहीं की और निवेश वापस लेने का प्रस्ताव करीब छह महीने तक लंबित रखा।
आखिरकार 20 दिसंबर 2019 को रकम निकालने का प्रस्ताव पारित हुआ, लेकिन तब तक DHFL दिवालिया होने की प्रक्रिया में जा चुकी थी। इसके परिणामस्वरूप CMPFO को 727.67 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
हाईकोर्ट ने कहा- विभागीय जांच काफी नहीं, CBI करे पड़ताल
इस मामले में झारखण्ड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (W.P. (PIL) No. 4486/2022) दायर की गई थी। याचिका में सार्वजनिक भविष्य निधि की इतनी बड़ी रकम डूबने और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की समुचित जांच नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था।मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को सीबीआई जांच का आदेश दिया। अदालत ने माना कि 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान कोई सामान्य व्यावसायिक घाटा नहीं है। मामले में आपराधिक पहलुओं की स्वतंत्र जांच जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विभागीय जांच और आपराधिक जांच अलग-अलग प्रकृति की होती हैं। इसलिए केवल विभागीय कार्रवाई को पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
अधिकारियों की भूमिका पर भी अदालत ने उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब विशेषज्ञों ने DHFL से निवेश की रकम वापस लेने की चेतावनी दी थी, तब संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाया? अदालत ने CMPFO की ओर से पूरे प्रकरण को महज व्यावसायिक नुकसान बताने की कोशिश पर भी आपत्ति जताई।
तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त पंकज कुमार के उस हलफनामे पर भी अदालत ने सवाल उठाए, जिसमें मामले को व्यावसायिक नुकसान बताते हुए आपराधिक साजिश और विश्वासघात की आशंका से इनकार किया गया था। अदालत ने निर्देश दिया कि इस तरह दी गई क्लीन चिट को जांच का आधार नहीं बनाया जाए।
तीन प्रमुख नामों पर दर्ज हुई प्राथमिकी
सीबीआई ने 22 अक्टूबर 2026 को नियमित प्राथमिकी संख्या RC0242026A0014 दर्ज की है। इसमें CMPFO के तत्कालीन कमिश्नर अनिमेष भारती तथा DHFL के तत्कालीन प्रमोटर एवं निदेशक कपिल वाधवान और धीरज वाधवान को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा CMPFO धनबाद के अज्ञात अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।सीबीआई ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 409 और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
अब सीबीआई खंगालेगी निवेश से जुड़े दस्तावेज
हाईकोर्ट ने सीबीआई को पूरे निवेश प्रकरण की गहराई से जांच करने और यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि रकम के नुकसान के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है तथा किसकी क्या भूमिका रही। जांच एजेंसी को निवेश से जुड़े फैसलों, चेतावनियों, रकम निकासी के प्रस्ताव और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करनी है। संबंधित पक्षों को भी सीबीआई के साथ सहयोग करने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
अब इस हाईप्रोफाइल वित्तीय मामले में सीबीआई की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कोयला कर्मियों के भविष्य निधि के करोड़ों रुपये के निवेश में आखिर कहां चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

