पुरुलिया में अंतरराज्यीय गौतस्करी गिरोह का बड़ा खुलासा: झारखण्ड के 7 समेत 8 गिरफ्तार, 6 लग्जरी कारें जब्त,कपाली से ऑपरेट होता था नेटवर्क..

 

ट्रकों का दौर खत्म, अब इनोवा-बोलेरो और स्कॉर्पियो से मवेशियों की चोरी! चार कारों पर नंबर प्लेट नहीं, दो पर फर्जी नंबर; पांच पुराने मामलों में भी पुलिस को थी तलाश

राँची/पुरुलिया। झारखण्ड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर सक्रिय अंतरराज्यीय मवेशी तस्करी गिरोह ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। मवेशियों की तस्करी के लिए अब ट्रक और मिनी ट्रक के बजाय लग्जरी कारों का इस्तेमाल किए जाने का खुलासा हुआ है। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आठ गौतस्कर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार तस्करों में सात झारखण्ड के सरायकेला-खरसावां जिले के रहने वाले हैं, जबकि एक आरोपी पुरुलिया का निवासी है।

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह इनोवा, बोलेरो और स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियों से इलाके में पहुंचता था। सड़क किनारे बंधे मवेशियों को खोलकर कारों में भर लिया जाता था। इतना ही नहीं, घरों से भी मवेशी चोरी कर उन्हें दूसरे स्थानों तक पहुंचाने का आरोप है। तस्करी के इस तरीके में बड़ी गाड़ियों की जगह ऐसी कारों को चुना गया, जिनसे आरोपियों को इलाके में आवाजाही करने में आसानी हो सके और लोगों का ध्यान कम जाए।

पुरुलिया के पुलिस अधीक्षक कुमार सनी राज ने गुरुवार को कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से छह कारें भी जब्त की गई हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह झारखण्ड के कपाली से संचालित हो रहा था और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में मवेशी चोरी तथा तस्करी की घटनाओं को अंजाम देने में सक्रिय था।

चार कारों पर नंबर प्लेट नहीं, दो पर मिले फर्जी नंबर

पुलिस की कार्रवाई में जब्त छह कारों में चार इनोवा, एक बोलेरो और एक स्कॉर्पियो शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से चार कारों पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी, जबकि दो कारों पर लगी नंबर प्लेट फर्जी पाई गई। वाहनों की इस स्थिति ने जांच को और गंभीर बना दिया है। पुलिस अब इन गाड़ियों के इस्तेमाल, उनकी पहचान और गिरोह की गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

एसपी के अनुसार, तस्करी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कारों की पिछली सीटें निकाल दी जाती थीं। ड्राइविंग सीट के पीछे की जगह को पूरी तरह खाली कर दिया जाता था, ताकि उसमें मवेशियों को रखा जा सके। इसी बदले हुए ढांचे का इस्तेमाल कर आरोपी सड़क किनारे बंधे मवेशियों को खोलकर ले जाते थे। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गिरोह के सदस्य घरों से मवेशियों की चोरी करने के बाद उन्हें कारों के जरिए दूसरे इलाकों तक पहुंचाते थे।इस तरह की गतिविधियों में लग्जरी कारों का इस्तेमाल पुलिस के लिए भी जांच का अहम बिंदु बन गया है। अब तक मवेशी तस्करी के मामलों में ट्रक और मिनी ट्रक के इस्तेमाल की बात प्रमुखता से सामने आती थी, लेकिन इस गिरोह ने कारों को ही तस्करी का जरिया बना लिया था।

कपाली से चल रहा था पूरा नेटवर्क, मोहम्मद कबीर गिरोह का सरगना

पुलिस के मुताबिक, इस अंतरराज्यीय गिरोह का संचालन सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली से किया जा रहा था। मोहम्मद कबीर को गिरोह का सरगना बताया गया है। पुरुलिया पुलिस ने उसे कपाली से गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि गिरोह के कुछ सदस्यों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन सरगना तक पहुंचने में जांच टीम को समय लगा।मोहम्मद अनवर को गिरोह का स्थानीय मददगार बताया गया है। पुलिस के अनुसार, वह पुरुलिया में तस्करों की गतिविधियों में सहयोग करता था। झारखण्ड से संचालित नेटवर्क और पश्चिम बंगाल में स्थानीय मदद के इस कथित तालमेल की जांच की जा रही है।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बड़ाबाजार, झालदा, बलरामपुर, काशीपुर और आद्रा क्षेत्रों में सक्रिय थे। ये इलाके झारखण्ड की सीमा से जुड़े गौतस्करी नेटवर्क की गतिविधियों के लिहाज से जांच के दायरे में हैं।

पांच मवेशी चोरी के मामलों में पहले से थी तलाश

पुरुलिया पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आठ आरोपियों की तलाश मवेशी चोरी से जुड़े पांच मामलों में पहले से की जा रही थी। अब उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस इन मामलों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किन-किन घटनाओं में इनका हाथ था, चोरी किए गए मवेशियों को कहां ले जाया जाता था और तस्करी के नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

पुलिस की कार्रवाई में छह कारों की जब्ती भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इन्हीं वाहनों के जरिए कथित तौर पर मवेशियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता था। बिना नंबर प्लेट और फर्जी नंबर प्लेट वाली कारों के इस्तेमाल से आरोपियों की पहचान छिपाने की आशंका की भी जांच की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों में सात झारखण्ड के निवासी

पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में नजरुल मीम, शेख शोएब, मोहम्मद वसीम अकरम, शाहनवाज खान, मोइन अंसारी, मोहम्मद अनवर और मोहम्मद कबीर शामिल हैं। ये सातों झारखण्ड के सरायकेला-खरसावां जिले से जुड़े बताए गए हैं, जबकि मोहम्मद अनवर को पुरुलिया का निवासी बताया गया है।

अब दूसरे सदस्यों और तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच

आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का अगला फोकस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर है। जांच में यह स्पष्ट करना अहम होगा कि चोरी किए गए मवेशियों को कहां पहुंचाया जाता था, उनके परिवहन और बिक्री में कौन-कौन शामिल था तथा फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था।पुरुलिया पुलिस की इस कार्रवाई ने मवेशी चोरी और अंतरराज्यीय तस्करी के एक ऐसे तरीके को सामने रखा है, जिसमें बड़ी गाड़ियों की जगह लग्जरी कारों को तस्करी का माध्यम बनाया गया। अब देखना होगा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े और कितने लोगों की भूमिका सामने आती है।

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