राँची में 10 एकड़ जमीन पर खूनी संघर्ष: 74 वर्षीय अधिवक्ता और बेटे पर जानलेवा हमले व 10 लाख की लूट का आरोप, थाना प्रभारी पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप, SSP के पास पहुँचे पीड़ित…

 

पिठोरिया थाना क्षेत्र के दुबलिया में जमीन पर झाड़ी साफ कराने और चहारदीवारी निर्माण के दौरान विवाद का मामला। अधिवक्ता रामनरेश सिंह ने 100 से अधिक लोगों के जुटने, रॉड-फरसा से हमला करने, बेटे की सोने की चेन और बोलेरो से 10 लाख रुपये समेत सामान लूटने का आरोप लगाया। पीड़ित ने SSP को आवेदन देकर FIR, गिरफ्तारी, सामान की बरामदगी और सुरक्षा की मांग की।

राँची।राजधानी राँची के पिठोरिया थाना क्षेत्र के दुबलिया गांव में 10 एकड़ जमीन को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। जमीन पर झाड़ी साफ कराने और चहारदीवारी निर्माण का काम करा रहे 74 वर्षीय अधिवक्ता रामनरेश सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि बड़ी संख्या में पहुंचे महिला-पुरुषों ने उन्हें घेरकर रॉड, फरसा और अन्य हथियारों से हमला किया। इस दौरान दोनों पिता-पुत्र घायल हो गए, जबकि वाहनों और निर्माण स्थल पर रखे सामान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

अधिवक्ता का आरोप है कि हमलावर उनके बेटे के गले से सोने की चेन और बोलेरो में रखे दो लैपटॉप, मोबाइल, ड्रोन, कैमरा तथा एक बैग में रखे 10 लाख रुपये लेकर चले गए। घटना के बाद इलाज कराने और पिठोरिया थाने में लिखित शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित पक्ष ने 29 अक्टूबर को राँची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) से मुलाकात कर कार्रवाई की गुहार लगाई है।

जमीन पर काम के दौरान अचानक पहुंचे लोग, घेरकर हमला करने का आरोप

रामनरेश सिंह की ओर से पिठोरिया थाना प्रभारी को दिए गए आवेदन के अनुसार, घटना 27 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 9:30 बजे की है। दुबलिया मौजा में स्थित खाता संख्या 47, प्लॉट संख्या 1496 और थाना संख्या 48 की 10 एकड़ जमीन पर उनका बेटा विक्रमादित्य सिंह जेसीबी मशीन से झाड़ियों की सफाई करा रहा था। साथ ही जमीन के चारों ओर चहारदीवारी निर्माण की तैयारी चल रही थी।आवेदन में कहा गया है कि इसी दौरान दुबलिया गांव के बहादुर उरांव, सचिन कुमार, विमल उरांव, संतोष करमाली, सुनील उरांव, भगत उरांव, मगन उरांव, डोन उरांव, दिलीप उरांव और बिरसा उरांव समेत अन्य लोग मौके पर पहुंचे। अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि करीब 100 या उससे अधिक महिला-पुरुष वहां जुट गए थे। उनके हाथों में लोहे की रॉड, फरसा, तलवार, दाउली सहित अन्य हथियार थे।

पीड़ित के अनुसार, लोगों ने उन्हें घेर लिया और इसी दौरान पीछे से उनके माथे पर वार किया गया। चोट लगने के बाद उन्हें चक्कर आया और वह जमीन पर गिर पड़े। आरोप है कि इसके बाद भी उनके साथ मारपीट की गई और उनकी लाइसेंसी राइफल छीनने का प्रयास किया गया।

पिता को बचाने दौड़ा बेटा, उस पर भी हमला; माथे और पीठ में चोट

शिकायत के मुताबिक, पिता पर हमला होते देख विक्रमादित्य सिंह उन्हें बचाने के लिए उनके ऊपर लेट गया। आरोप है कि इस दौरान हमलावरों ने उसके माथे और पीठ पर फरसा तथा लोहे की रॉड से वार किया। इसी क्रम में उसके गले से सोने की चेन छीन लेने का भी आरोप लगाया गया है।

रामनरेश सिंह का कहना है कि हमलावर दोनों को गंभीर रूप से घायल छोड़कर चले गए। इसके बाद वहां काम कर रहे मजदूरों ने पिता-पुत्र को उठाकर सड़क तक पहुंचाया। पुलिस के आने के बाद दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कांके ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रिम्स, राँची भेजा गया।हालांकि, घटना में शामिल लोगों की भूमिका और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बोलेरो, दूसरी गाड़ी और निर्माण स्थल पर तोड़फोड़ का आरोप

अधिवक्ता ने अपने आवेदन में वाहनों और निर्माण स्थल पर भी तोड़फोड़ किए जाने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, बोलेरो संख्या JH 01 BP 2367 को क्षतिग्रस्त किया गया। वह जिस दूसरी गाड़ी से घटनास्थल पहुंचे थे, उसे भी नुकसान पहुंचाया गया।इसके अलावा वहां खड़े पानी के टैंकर, निर्माणाधीन चहारदीवारी,जेसीबी,सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री को क्षति पहुंचाने की बात कही गई है। घटनास्थल पर बने कंटेनर हाउस को भी नुकसान पहुंचाने का आरोप है। पीड़ित का दावा है कि बोलेरो में रखे दो लैपटॉप, एक मोबाइल, ड्रोन, कैमरा और लगभग 10 लाख रुपये से भरा बैग गायब कर दिया गया।

 

घटना से एक दिन पहले जमीन पर दावा करने पहुंचे थे आशुतोष शाहदेव

रामनरेश सिंह ने अपने आवेदन में एक अन्य महत्वपूर्ण बात का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, घटना से एक दिन पहले यानी 26 अक्टूबर को आशुतोष शाहदेव, पिता तारानाथ शाहदेव, निवासी किशोरगंज, थाना सुखदेवनगर, राँची कुछ ग्रामीणों के साथ जमीन पर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने उक्त जमीन पर अपना दावा किया था।पीड़ित पक्ष ने इस घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए जमीन विवाद को हमले की पृष्ठभूमि से जोड़ने की बात कही है। हालांकि, जमीन के स्वामित्व और संबंधित पक्षों के दावों की वास्तविक स्थिति उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

थाने में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप, SSP से लगाई गुहार

रामनरेश सिंह का कहना है कि घटना वाले दिन 27 अक्टूबर की शाम को ही उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी थी। लेकिन, उनके आरोप के मुताबिक, अब तक प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की दिशा में कदम नहीं उठाया गया।इसी को लेकर उन्होंने 29 अक्टूबर को SSP को आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि वह 74 वर्षीय अधिवक्ता हैं और घटना में उन्हें तथा उनके बेटे को चोटें आई हैं। उन्होंने अपने समर्थन में थाने में दिए गए आवेदन की प्राप्ति, अनुमंडलाधिकारी के न्यायालय में विविध वाद संख्या M-296/2025 में 5 जुलाई 2025 को पारित आदेश एवं पुलिस रिपोर्ट तथा चोटों से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करने की बात कही है। SSP से उन्होंने पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई कराने, FIR दर्ज करने, आरोपियों की गिरफ्तारी, कथित तौर पर लूटे गए रुपये और सामान की बरामदगी तथा परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

दुबलिया की 10 एकड़ जमीन को लेकर सामने आए इस मामले में अब पुलिस की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। एक ओर अधिवक्ता रामनरेश सिंह ने सामूहिक हमले, लूटपाट और तोड़फोड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं जमीन पर दावा करने वाले पक्ष और घटना में नामजद लोगों का पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल पीड़ित पक्ष ने SSP से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। अब देखना होगा कि शिकायत के आधार पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच और आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

दूसरे पक्ष का बयान नहीं आया सामने
इस मामले में दूसरे पक्ष का बयान फिलहाल सामने नहीं आया है। जमीन के स्वामित्व और विवाद को लेकर दूसरे पक्ष की क्या दलील है, यह उनकी प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति और दोनों पक्षों के दावों की सच्चाई सामने आएगी। दूसरे पक्ष का पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

 

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