जेएसएससी नियुक्ति घोटाले में CID का बड़ा प्रहार: 10-12 अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने वाले सिंडिकेट के दो करीबी गिरफ्तार, एक खुद सरकारी अफसर निकला

 

राँची।सरकारी नौकरी पाने के लिए अभ्यर्थी दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन जेएसएससी नियुक्ति घोटाले में पर्दे के पीछे चल रहे खेल ने पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा में सेंधमारी कर अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से सफल कराने वाले सिंडिकेट पर सीआईडी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस मामले में दो ऐसे चेहरों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका सीधा कनेक्शन कथित मास्टरमाइंड मिथिलेश सिंह उर्फ आरके से जुड़ा बताया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में एक खुद इसी कथित फर्जीवाड़े के रास्ते सरकारी नौकरी हासिल कर चुका था और उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (एएसओ) के पद पर कार्यरत था।

सीआईडी ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हटिया के टोनको रोड, केशर विहार स्थित सिंह मेंसन निवासी सुमित कुमार सिंह (पिता भूपेंद्र सिंह) और बरियातू के टैगोर हिल रोड स्थित रविंद्र नगर निवासी भानु प्रताप (पिता जवाहर कुमार) के रूप में की है। दोनों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शुक्रवार को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया गया।

 

इस पूरे मामले में भानु प्रताप की गिरफ्तारी सबसे चौंकाने वाली कड़ी मानी जा रही है। जांच में सामने आया है कि वह खुद जेएसएससी परीक्षा में कथित तौर पर अवैध तरीके से सफल हुआ था और वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग में एएसओ के पद पर तैनात था। यानी जिस परीक्षा में गड़बड़ी कर अभ्यर्थियों को सफल कराने का आरोप है, उसी परीक्षा के जरिए आरोपी खुद भी सरकारी पद तक पहुंच गया था। वहीं, दूसरा आरोपी सुमित कुमार सिंह राशन और किराने की दुकान चलाता है। सीआईडी की जांच के मुताबिक दोनों आरोपी कथित मास्टरमाइंड मिथिलेश सिंह उर्फ आरके के करीबी रिश्तेदार हैं और सिंडिकेट के लिए अहम भूमिका निभा रहे थे।

 

सीआईडी की छानबीन, तकनीकी साक्ष्यों और अनुसंधान में अब तक करीब 10 से 12 अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से परीक्षा में सफल कराने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि सिंडिकेट के जरिए कितने लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल की और इस खेल में किन-किन लोगों की भूमिका रही। अभ्यर्थियों को पास कराने के बदले हुए पैसों के लेनदेन की कड़ियां भी खंगाली जा रही हैं। आशंका है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।

 

दो गिरफ्तारियों के बावजूद इस पूरे मामले का सबसे अहम किरदार कथित मास्टरमाइंड मिथिलेश सिंह उर्फ आरके अभी तक सीआईडी की गिरफ्त से बाहर है। जांच एजेंसी उसकी तलाश में जुटी है। अब सीआईडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस नेटवर्क की पूरी चेन तक पहुंचना, अवैध तरीके से सफल कराए गए अभ्यर्थियों की पहचान करना और सरकारी नौकरी तक पहुंचे लोगों का पता लगाना है। फिलहाल दो गिरफ्तारियों ने जेएसएससी नियुक्ति घोटाले के कई अनसुलझे पहलुओं को फिर से चर्चा में ला दिया है।

 

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