राँची BIBA शोरूम में 31.20 लाख का खेल…ऑडिट हुआ तो खुल गई पोल, चार कर्मचारियों पर FIR
राँची। राजधानी राँची में देश के चर्चित फैशन ब्रांड BIBA के शोरूम में लाखों रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने से कारोबारी जगत में हलचल मच गई है। चुटिया थाना क्षेत्र के सिरमटोली स्थित होमराह टावर, क्लब रोड के शोरूम में कंपनी के ऑडिट के दौरान कपड़ों के स्टॉक से लेकर बिक्री की रकम तक का हिसाब गड़बड़ मिला। कंपनी की शिकायत के मुताबिक, कुल 31 लाख 20 हजार 635 रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आई है। मामले में शोरूम के क्लस्टर मैनेजर, स्टोर मैनेजर और दो सेल्स स्टाफ समेत चार कर्मचारियों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
कंपनी के लीड सेल्स एचआर संजीव रंजन ने इस संबंध में चुटिया थाने में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शोरूम के माल और बिक्री से जुड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारियों के कार्यकाल के दौरान स्टॉक और बिक्री की रकम में गड़बड़ी हुई। कंपनी ने पुलिस से मामले की जांच कर कथित तौर पर गायब माल और राशि की बरामदगी तथा आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
अपने मोबाइल पर पेमेंट लेने का आरोप, कंपनी को हुआ शक
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप भुगतान प्रक्रिया को लेकर लगाया गया है। कंपनी की शिकायत के अनुसार, शोरूम के क्लस्टर मैनेजर विकास कुमार झा और स्टोर मैनेजर पीयूष ग्राहकों से कंपनी के निर्धारित माध्यम के बजाय अपने मोबाइल फोन पर भुगतान लेते थे। हालांकि, भुगतान किस तरह और कितनी बार लिया गया, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, शोरूम में कपड़ों के स्टॉक, नकदी और बिक्री से जुड़े कामकाज पर संबंधित कर्मचारियों का नियंत्रण था। ऐसे में स्टॉक और बिक्री के आंकड़ों में अंतर सामने आने के बाद कंपनी प्रबंधन को संदेह हुआ। इसके बाद शोरूम के रिकॉर्ड की जांच और ऑडिट कराने की कोशिश की गई।
अप्रैल से सितंबर तक कई बार टला ऑडिट, हर बार बनाया गया बहाना!
कंपनी की ओर से दिए गए आवेदन में बताया गया है कि अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच कई बार शोरूम का ऑडिट निर्धारित किया गया। लेकिन आरोप है कि संबंधित कर्मचारी हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर ऑडिट टालते रहे। इसके कारण निर्धारित अवधि में स्टोर का ऑडिट नहीं हो सका।
लगातार ऑडिट नहीं हो पाने के बाद कंपनी ने मामले को गंभीरता से लिया। आखिरकार 5 अक्टूबर 2026 को शोरूम का विस्तृत ऑडिट कराया गया। इसी ऑडिट में स्टॉक और बिक्री की राशि का हिसाब मेल नहीं खाने की बात सामने आई। कंपनी के मुताबिक, जांच में कपड़ों के स्टॉक के साथ नकद और कार्ड से हुई बिक्री की रकम में भी अंतर मिला।
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई लाखों की गड़बड़ी, आंकड़े देखकर कंपनी के उड़े होश
कंपनी के आवेदन में ऑडिट के दौरान सामने आई कमी का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। इसके अनुसार, शोरूम में कुल 31,20,635 रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया।ऑडिट में 29 लाख 58 हजार 300 रुपये के कपड़ों के स्टॉक की कमी दर्ज की गई। इसके अलावा 46 हजार 469 रुपये की नकद बिक्री राशि और 1 लाख 15 हजार 866 रुपये की कार्ड बिक्री राशि का हिसाब नहीं मिला।
| ऑडिट में सामने आई कमी | राशि |
|---|---|
| कपड़ों का स्टॉक | ₹29,58,300 |
| नकद बिक्री राशि | ₹46,469 |
| कार्ड बिक्री राशि | ₹1,15,866 |
| कुल कथित गड़बड़ी | ₹31,20,635 |
इस आंकड़े के सामने आने के बाद कंपनी प्रबंधन ने संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। कंपनी का आरोप है कि ऑडिट के बाद कर्मचारी शोरूम आना बंद कर गए और उनके मोबाइल फोन भी बंद हो गए। उन्हें भेजे गए कारण बताओ नोटिस का भी कोई जवाब नहीं मिला।
क्लस्टर मैनेजर से सेल्स स्टाफ तक, चार लोगों पर आरोप
कंपनी ने अपनी शिकायत में चार कर्मचारियों को नामजद किया है। इनमें क्लस्टर मैनेजर विकास कुमार झा, स्टोर मैनेजर पीयूष, सेल्स स्टाफ प्रीतम कुमार और सेल्स स्टाफ रूपाली समद शामिल हैं। शिकायत में इन सभी की भूमिका की जांच करने और कथित तौर पर गायब माल व रकम बरामद करने की मांग की गई है।
कंपनी का कहना है कि शोरूम के स्टॉक और नकदी की जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारियों के पास थी। इसलिए ऑडिट में सामने आई गड़बड़ी को लेकर उनकी भूमिका की जांच जरूरी है। हालांकि, चारों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और उनकी भूमिका पुलिस जांच में ही स्पष्ट होगी।
BNS की धाराओं में कार्रवाई की मांग, अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
कंपनी के प्रतिनिधि संजीव रंजन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4), 306, 61(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की मांग की है। आवेदन के साथ कंपनी का प्राधिकरण पत्र, 5 अक्टूबर 2026 की ऑडिट रिपोर्ट, कर्मचारियों के नियुक्ति एवं ज्वाइनिंग रिकॉर्ड, कथित हेराफेरी से संबंधित ई-मेल और संदेशों की प्रतियां तथा शिकायतकर्ता के पहचान संबंधी दस्तावेज संलग्न किए जाने का उल्लेख है।आवेदन पर चुटिया थाना में कांड संख्या 151/26 दिनांक 23 अक्टूबर 2026 को दर्ज किया गया है।
अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि स्टॉक और बिक्री की रकम में अंतर कैसे आया, ग्राहकों से भुगतान लेने के आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित तौर पर गायब माल व राशि कहां गई। जांच में कंपनी के दस्तावेजों, ऑडिट रिपोर्ट, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल अहम होगी।
फिलहाल, BIBA शोरूम में 31.20 लाख रुपये की कथित हेराफेरी का यह मामला कंपनी की शिकायत और ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों पर आधारित है। आरोपियों को दोषी ठहराया जाना अभी बाकी है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

